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वितविहीन विद्यालयों के बिना संभव नहीं बोर्ड परीक्षा
Updated Wed, 25 Oct 2017 11:30 PM IST
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फैजाबाद। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए केंद्रों का ऑनलाइन निर्धारण व राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही प्राथमिकता देने की तैयारी भले ही की हो, लेकिन बिना वित्तविहीन विद्यालयों को शामिल किए परीक्षा आसान नहीं है।
इसका कारण जिले में राजकीय विद्यालयों की संख्या में कमी व इन विद्यालयों में संसाधनों का अभाव है। इसकी अपेक्षा वित्तविहीन विद्यालय संसाधनों से लैस दिख रहे हैं। जिले के 55 सरकारी या सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही केंद्र बनाया जा सकता है, इसके अतिरिक्त वित्तविहीन विद्यालयों का सहारा है।
इस प्रकार सरकार का नकल विहीन परीक्षा कराने का सपना साकार होने के आसार कम दिख रहे हैं। यूपी सरकार ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा को नकल विहीन कराने की तैयारी की है। इसके लिए परीक्षा केंद्र निर्धारण की नीति तैयार कराई गई है।
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इसके तहत परीक्षा केंद्र बनाने के लिए राजकीय या सहायता प्राप्त विद्यालयों को प्राथमिकता देने की बात की गई है। निर्धारित केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे समेत, पक्की छत वाले कक्षों व उनमें पर्याप्त फर्नीचर, चहारदीवारी, गेट, विद्युत, पेयजल, शौचालय व्यवस्था, पहुंच मार्ग आदि सुविधाओं से युक्त राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को ही केंद्र बनाने की मंशा जाहिर की है।
जिले में 24 राजकीय विद्यालय हैं, जिनमें से सिर्फ 9 विद्यालय ही केंद्र बनाने योग्य हैं। शेष विद्यालयों में चहारदीवारी, मानक के अनुसार कमरों सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसी प्रकार जिले में 50 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं, जिनमें से गत वर्ष 46 केंद्र बनाए गए थे, इस बार भी आंकड़ा कमोवेश वैसा ही प्रतीत होता है।
इन विद्यालयों में भी भवन जर्जर होने सहित तमाम खामियां हैं। वर्ष 2018 की परीक्षा में लगभग 99 हजार परीक्षार्थियों के शामिल होने के आसार हैं, जिसके लिए करीब दो सौ केंद्रों का निर्धारण आवश्यक है। विभाग के अनुसार सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों को मिलाकर करीब 55 केंद्र बन सकते हैं, शेष परीक्षार्थियों के लिए जिले के करीब 307 वित्तविहीन विद्यालयों का ही सहारा है।
शहर से लेकर देहात तक कई राजकीय, सहायता प्राप्त विद्यालयों को अपडेट किया जा रहा है, लेकिन इनकी अपेक्षा वित्तविहीन विद्यालयों के भवन नवनिर्मित होने के साथ ये विद्यालय बिजली, पानी, शौचालय सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं से लैश हैं।
इन विद्यालयों में सीसीटीवी आदि लगाने की कवायद भी चल रही है। विभाग के अनुसार कितने विद्यालयों में अब तक सीसीटीवी लग चुका है, इसका आंकलन किया जा रहा है। गत वर्ष की परीक्षा में 194 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिनमें भी 139 वित्तविहीन विद्यालयों को शामिल किया गया था। इस बार का आंकड़ा इससे जुदा नहीं प्रतीत हो रहा है।
नकल के लिए वित्तविहीन विद्यालय बदनाम
माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त कई विद्यालय नकल के लिए बदनाम हैं। खासकर देहात क्षेत्रों में संचालित वित्तविहीन विद्यालय इस दायरे में अधिक देखे जाते हैं। देहात क्षेत्रों कुछ सहायता प्राप्त विद्यालय भी नकल कराने में गत वर्षों में माहिर रहे हैं। नई व्यवस्था के अनुसार यदि परीक्षा हुई तो इन पर अंकुश लग सकता है।
सभी माध्यमिक विद्यालयों ने आंकड़े अपलोड कर दिए हैं। गूगल मैप भेजने पर ऑनलाइन जांच की जाएगी। मानक के अनुसार सारी सुविधाएं मिलने पर ही केंद्र निर्धारण किया जाएगा। कितने विद्यालयों में सीसीटीवी लग चुके हैं, इसकी जांच कराई जा रही है।
-राजेश कुमार आर्य, डीआईओएस
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इसका कारण जिले में राजकीय विद्यालयों की संख्या में कमी व इन विद्यालयों में संसाधनों का अभाव है। इसकी अपेक्षा वित्तविहीन विद्यालय संसाधनों से लैस दिख रहे हैं। जिले के 55 सरकारी या सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही केंद्र बनाया जा सकता है, इसके अतिरिक्त वित्तविहीन विद्यालयों का सहारा है।
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इस प्रकार सरकार का नकल विहीन परीक्षा कराने का सपना साकार होने के आसार कम दिख रहे हैं। यूपी सरकार ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा को नकल विहीन कराने की तैयारी की है। इसके लिए परीक्षा केंद्र निर्धारण की नीति तैयार कराई गई है।
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इसके तहत परीक्षा केंद्र बनाने के लिए राजकीय या सहायता प्राप्त विद्यालयों को प्राथमिकता देने की बात की गई है। निर्धारित केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे समेत, पक्की छत वाले कक्षों व उनमें पर्याप्त फर्नीचर, चहारदीवारी, गेट, विद्युत, पेयजल, शौचालय व्यवस्था, पहुंच मार्ग आदि सुविधाओं से युक्त राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को ही केंद्र बनाने की मंशा जाहिर की है।
जिले में 24 राजकीय विद्यालय हैं, जिनमें से सिर्फ 9 विद्यालय ही केंद्र बनाने योग्य हैं। शेष विद्यालयों में चहारदीवारी, मानक के अनुसार कमरों सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसी प्रकार जिले में 50 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं, जिनमें से गत वर्ष 46 केंद्र बनाए गए थे, इस बार भी आंकड़ा कमोवेश वैसा ही प्रतीत होता है।
इन विद्यालयों में भी भवन जर्जर होने सहित तमाम खामियां हैं। वर्ष 2018 की परीक्षा में लगभग 99 हजार परीक्षार्थियों के शामिल होने के आसार हैं, जिसके लिए करीब दो सौ केंद्रों का निर्धारण आवश्यक है। विभाग के अनुसार सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों को मिलाकर करीब 55 केंद्र बन सकते हैं, शेष परीक्षार्थियों के लिए जिले के करीब 307 वित्तविहीन विद्यालयों का ही सहारा है।
शहर से लेकर देहात तक कई राजकीय, सहायता प्राप्त विद्यालयों को अपडेट किया जा रहा है, लेकिन इनकी अपेक्षा वित्तविहीन विद्यालयों के भवन नवनिर्मित होने के साथ ये विद्यालय बिजली, पानी, शौचालय सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं से लैश हैं।
इन विद्यालयों में सीसीटीवी आदि लगाने की कवायद भी चल रही है। विभाग के अनुसार कितने विद्यालयों में अब तक सीसीटीवी लग चुका है, इसका आंकलन किया जा रहा है। गत वर्ष की परीक्षा में 194 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिनमें भी 139 वित्तविहीन विद्यालयों को शामिल किया गया था। इस बार का आंकड़ा इससे जुदा नहीं प्रतीत हो रहा है।
नकल के लिए वित्तविहीन विद्यालय बदनाम
माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त कई विद्यालय नकल के लिए बदनाम हैं। खासकर देहात क्षेत्रों में संचालित वित्तविहीन विद्यालय इस दायरे में अधिक देखे जाते हैं। देहात क्षेत्रों कुछ सहायता प्राप्त विद्यालय भी नकल कराने में गत वर्षों में माहिर रहे हैं। नई व्यवस्था के अनुसार यदि परीक्षा हुई तो इन पर अंकुश लग सकता है।
सभी माध्यमिक विद्यालयों ने आंकड़े अपलोड कर दिए हैं। गूगल मैप भेजने पर ऑनलाइन जांच की जाएगी। मानक के अनुसार सारी सुविधाएं मिलने पर ही केंद्र निर्धारण किया जाएगा। कितने विद्यालयों में सीसीटीवी लग चुके हैं, इसकी जांच कराई जा रही है।
-राजेश कुमार आर्य, डीआईओएस