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वोट की चोट से तस्वीर बदलेगी महिलाएं
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वोट की चोट से तस्वीर बदलेगी महिलाएं
अयोध्या। जब महिलाएं-बेटियां मजबूत होगीं, रोजगार पाएंगी तो शोषण-उत्पीड़न अपने आप समाप्त हो जाएगा। इस बार वोट की चोट से महिलाएं तस्वीर बदलेंगी। पोलिंग बूथ पर महिलाओं को आगे आना होगा।
शत-प्रतिशत मतदान करना होगा। महिलाओं को चाहिए कि उस पार्टी व नेता का चुनाव करें जो महिलाओं को आधी आबादी के अनुरूप 50 प्रतिशत आरक्षण हर क्षेत्र में दिलाने की बात करे।
यह विचार अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत फैंसी महिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित वोटिंग अवेयरनेस वर्कशॉप में महिलाओं व छात्राओं ने रखे।
छात्राओं का कहना है कि हमको अपने हक की लड़ाई के लिए मतदान करना चाहिये। शिक्षिकाओं-छात्राओं ने कहा कि अगर हम सभी महिलाएं ठान लें कि इस बार का चुनाव सिर्फ महिलाओं के हक के लिए लड़ा जाएगा तो हमारे साथ होने वाली गैर बराबरी अभी खत्म हो जाएगी।
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छात्राओं ने माना है कि महिलाओं का मत प्रतिशत कम होता है। इसके जागरूक महिलाओं अपने पास-पड़ोस में जाकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए।
साथ ही मतदान वाले दिन अवश्य यह पूछ लेना चाहिए कि क्या आप ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। इससे महिलाओं का मत प्रतिशत बढ़ेगा।
शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान की अध्यापिका रंजनी मौर्या ने कहा कि मतदान के मामले में महिलाओं में जागरूकता का कमी है। महिलाएं घरेलू कार्यों में उलझकर मतदान करने नहीं जाती हैं। इसके लिए उनको जागरूक होना होगा। तभी महिलाओं का मान व सम्मान बच सकेगा।
छात्रा अंशिका पांडेय का मानना है कि मतदान का प्रतिशत लोकतंत्र में 100 प्रतिशत ही होना चाहिए। कहा कि महिलाओं के साथ उत्पीड़न की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस पर रोक के लिए उनका मतदान प्रतिशत अपने हक को लेकर 100 प्रतिशत ही होना चाहिए।
छात्रा स्वाति जायसवाल ने कहा कि महिलाओं के मतदान के प्रतिशत को बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर से लेकर प्रत्येेक को अपने स्तर तक प्रयास करना होगा। शहर व ग्रामीण की जागरूक महिलाओं को अपने पास-पड़ोस की महिलाओं को जागरूक करना चाहिए।
छात्रा सुमन पाल ने कहा कि महिलाओं में मतदान प्रतिशत को बढ़ाया जाना आवश्यक कार्य है, लेकिन इसके साथ ही अच्छे प्रत्याशियों का चयन भी जरूरी है। महिलाओं को चाहिए कि अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर लड़ाई लड़ने वाले प्रत्याशियों को वोट दें।
छात्रा किरन का मानना है कि मतदान के पहले सभी लोगों में काफी उत्साह होता है लेकिन मतदान के दिन कई कारणों के चलते महिलाएं पोलिंग बूथ तक नहीं जाती हैं। महिलाओं को चाहिए कि प्रत्येक कार्य को छोड़कर पहले मतदान फिर अन्य कार्य करना चाहिए।
छात्रा हेमलता का मानना है कि अधिकांश महिलाएं अपने विवेक व सोच के आधार पर मतदान नहीं करती हैं। घर में जिस विचार धारा के लोग होते हैं उन्हीं के साथ हो लेती हैं। महिलाओं को चाहिए कि अपने विवेक, विचार के आधार पर मतदान करें।
छात्रा आस्था पांडेय बताती हैं कि मतदान का प्रतिशत बढ़ना जरूरी है लेकिन इसमें व्यापक बदलाव के लिए महिलाओं को शिक्षित होना जरूरी है। तभी महिलाएं मतदान की अहमियत, प्रत्याशियों का चयन व अपनी विचारधारा के अनुरूप मतदान कर सकेंगी।
प्रशिक्षिका अनीता द्विवेदी ने कहा कि महिलाओं को अधिक से अधिक स्वावलंबी होने जरूरत है। महिलाओं को चाहिए कि सरकारों के चयन में इस प्रकार की पार्टी या विचारधारा का चुने जो उनके स्वावलंबन पर विशेष ध्यान दें। अपना वोट जरूर डालें।
प्रियंका गुप्ता को मानना है कि महिलाओं में वोट प्रतिशत बढ़ाने के साथ राजनीतिक दलों को चाहिए कि उनके सम्मान की लड़ाई लड़े। आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के साथ ऐसी व्यवस्था लागू करें कि किसी भी स्तर पर महिलाओं का उत्पीड़न न हो सके।
प्रीति गुप्ता बताती हैं कि महिलाओं को अपने सम्मान की लड़ाई खुद लड़नी होगी। इसमें मतदान को एक औजार के रूप में प्रयोग करना होगा। अगर महिलाएं ठान लें तो सभी स्थानों पर महिलाओं की सरकार होगी व महिलाओं से संबंधित सभी व्यवस्थाएं तुरंत लागू हो जाएंगी।
नीतू बताती हैं कि महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न के मामले में सही समय पर न्याय नहीं मिल पाता है। उनका मानना है कि महिलाओं से संबंधित केसों को विशेष रूप से निपटाने के लिए सरकारों को प्रयास करना चाहिए।
स्वाति शर्मा का मानना है कि महिलाओं को अपने हक की लड़ाई के लिए व खुद को उत्पीड़न से बचाने के मतदान में भागीदार जरूर बनना चाहिए। मतदान के दिन महिलाओं को अपने हक की लड़ाई के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचकर मतदान करना चाहिए।
रजनी गुप्ता बताती हैं कि महिलाओं को चाहिए कि मतदान के दिन अपने हक के लिए मतदान करना चाहिए। महिलाओं को चाहिए कि जो भी राजनीतिक दल बराबरी का हक दिलाए उसको वोट करना चाहिए। मताधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए।
कोमल यादव बताती हैं कि मतदान लोकतंत्र के सभी वासियों को मतदान का अधिकार प्राप्त है। महिलाओं को चाहिए कि मतदान कर अपने अधिकार का प्रयोग करें। मतदान में महिलाओं को अपने हक के लिए लड़ने वाली पार्टी को वोट देना चाहिए।
रीना सिंह का कहना है कि आधी आबादी के मनपसंद की सरकार बनाने के लिए महिलाओं को सुरक्षित रखने, आरक्षण देने सहित विभिन्न महिलाओं के मुद्दे को उठाने वाली पार्टी को मतदान करना चाहिए। इस आधी आबादी के साथ उत्पीड़न व अन्याय की प्रथा खत्म होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता भारती सिंह का कहना है कि आधी आबादी होने के नाते महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। 33 प्रतिशत आरक्षण काफी समय से प्रस्तावित है लेकिन सरकारों इसको नहीं दे रही हैं। सभी महिलाओं को वोट जरूर डालना चाहिए।
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अयोध्या। जब महिलाएं-बेटियां मजबूत होगीं, रोजगार पाएंगी तो शोषण-उत्पीड़न अपने आप समाप्त हो जाएगा। इस बार वोट की चोट से महिलाएं तस्वीर बदलेंगी। पोलिंग बूथ पर महिलाओं को आगे आना होगा।
शत-प्रतिशत मतदान करना होगा। महिलाओं को चाहिए कि उस पार्टी व नेता का चुनाव करें जो महिलाओं को आधी आबादी के अनुरूप 50 प्रतिशत आरक्षण हर क्षेत्र में दिलाने की बात करे।
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यह विचार अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत फैंसी महिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित वोटिंग अवेयरनेस वर्कशॉप में महिलाओं व छात्राओं ने रखे।
छात्राओं का कहना है कि हमको अपने हक की लड़ाई के लिए मतदान करना चाहिये। शिक्षिकाओं-छात्राओं ने कहा कि अगर हम सभी महिलाएं ठान लें कि इस बार का चुनाव सिर्फ महिलाओं के हक के लिए लड़ा जाएगा तो हमारे साथ होने वाली गैर बराबरी अभी खत्म हो जाएगी।
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छात्राओं ने माना है कि महिलाओं का मत प्रतिशत कम होता है। इसके जागरूक महिलाओं अपने पास-पड़ोस में जाकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए।
साथ ही मतदान वाले दिन अवश्य यह पूछ लेना चाहिए कि क्या आप ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। इससे महिलाओं का मत प्रतिशत बढ़ेगा।
शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान की अध्यापिका रंजनी मौर्या ने कहा कि मतदान के मामले में महिलाओं में जागरूकता का कमी है। महिलाएं घरेलू कार्यों में उलझकर मतदान करने नहीं जाती हैं। इसके लिए उनको जागरूक होना होगा। तभी महिलाओं का मान व सम्मान बच सकेगा।
छात्रा अंशिका पांडेय का मानना है कि मतदान का प्रतिशत लोकतंत्र में 100 प्रतिशत ही होना चाहिए। कहा कि महिलाओं के साथ उत्पीड़न की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस पर रोक के लिए उनका मतदान प्रतिशत अपने हक को लेकर 100 प्रतिशत ही होना चाहिए।
छात्रा स्वाति जायसवाल ने कहा कि महिलाओं के मतदान के प्रतिशत को बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर से लेकर प्रत्येेक को अपने स्तर तक प्रयास करना होगा। शहर व ग्रामीण की जागरूक महिलाओं को अपने पास-पड़ोस की महिलाओं को जागरूक करना चाहिए।
छात्रा सुमन पाल ने कहा कि महिलाओं में मतदान प्रतिशत को बढ़ाया जाना आवश्यक कार्य है, लेकिन इसके साथ ही अच्छे प्रत्याशियों का चयन भी जरूरी है। महिलाओं को चाहिए कि अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर लड़ाई लड़ने वाले प्रत्याशियों को वोट दें।
छात्रा किरन का मानना है कि मतदान के पहले सभी लोगों में काफी उत्साह होता है लेकिन मतदान के दिन कई कारणों के चलते महिलाएं पोलिंग बूथ तक नहीं जाती हैं। महिलाओं को चाहिए कि प्रत्येक कार्य को छोड़कर पहले मतदान फिर अन्य कार्य करना चाहिए।
छात्रा हेमलता का मानना है कि अधिकांश महिलाएं अपने विवेक व सोच के आधार पर मतदान नहीं करती हैं। घर में जिस विचार धारा के लोग होते हैं उन्हीं के साथ हो लेती हैं। महिलाओं को चाहिए कि अपने विवेक, विचार के आधार पर मतदान करें।
छात्रा आस्था पांडेय बताती हैं कि मतदान का प्रतिशत बढ़ना जरूरी है लेकिन इसमें व्यापक बदलाव के लिए महिलाओं को शिक्षित होना जरूरी है। तभी महिलाएं मतदान की अहमियत, प्रत्याशियों का चयन व अपनी विचारधारा के अनुरूप मतदान कर सकेंगी।
प्रशिक्षिका अनीता द्विवेदी ने कहा कि महिलाओं को अधिक से अधिक स्वावलंबी होने जरूरत है। महिलाओं को चाहिए कि सरकारों के चयन में इस प्रकार की पार्टी या विचारधारा का चुने जो उनके स्वावलंबन पर विशेष ध्यान दें। अपना वोट जरूर डालें।
प्रियंका गुप्ता को मानना है कि महिलाओं में वोट प्रतिशत बढ़ाने के साथ राजनीतिक दलों को चाहिए कि उनके सम्मान की लड़ाई लड़े। आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के साथ ऐसी व्यवस्था लागू करें कि किसी भी स्तर पर महिलाओं का उत्पीड़न न हो सके।
प्रीति गुप्ता बताती हैं कि महिलाओं को अपने सम्मान की लड़ाई खुद लड़नी होगी। इसमें मतदान को एक औजार के रूप में प्रयोग करना होगा। अगर महिलाएं ठान लें तो सभी स्थानों पर महिलाओं की सरकार होगी व महिलाओं से संबंधित सभी व्यवस्थाएं तुरंत लागू हो जाएंगी।
नीतू बताती हैं कि महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न के मामले में सही समय पर न्याय नहीं मिल पाता है। उनका मानना है कि महिलाओं से संबंधित केसों को विशेष रूप से निपटाने के लिए सरकारों को प्रयास करना चाहिए।
स्वाति शर्मा का मानना है कि महिलाओं को अपने हक की लड़ाई के लिए व खुद को उत्पीड़न से बचाने के मतदान में भागीदार जरूर बनना चाहिए। मतदान के दिन महिलाओं को अपने हक की लड़ाई के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचकर मतदान करना चाहिए।
रजनी गुप्ता बताती हैं कि महिलाओं को चाहिए कि मतदान के दिन अपने हक के लिए मतदान करना चाहिए। महिलाओं को चाहिए कि जो भी राजनीतिक दल बराबरी का हक दिलाए उसको वोट करना चाहिए। मताधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए।
कोमल यादव बताती हैं कि मतदान लोकतंत्र के सभी वासियों को मतदान का अधिकार प्राप्त है। महिलाओं को चाहिए कि मतदान कर अपने अधिकार का प्रयोग करें। मतदान में महिलाओं को अपने हक के लिए लड़ने वाली पार्टी को वोट देना चाहिए।
रीना सिंह का कहना है कि आधी आबादी के मनपसंद की सरकार बनाने के लिए महिलाओं को सुरक्षित रखने, आरक्षण देने सहित विभिन्न महिलाओं के मुद्दे को उठाने वाली पार्टी को मतदान करना चाहिए। इस आधी आबादी के साथ उत्पीड़न व अन्याय की प्रथा खत्म होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता भारती सिंह का कहना है कि आधी आबादी होने के नाते महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। 33 प्रतिशत आरक्षण काफी समय से प्रस्तावित है लेकिन सरकारों इसको नहीं दे रही हैं। सभी महिलाओं को वोट जरूर डालना चाहिए।