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सीरियल ब्लास्ट केस में नहीं हुई जिरह
Updated Wed, 05 Sep 2018 12:08 AM IST
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सीरियल ब्लास्ट केस में नहीं हुई जिरह
फैजाबाद। कचहरी सीरियल ब्लास्ट केस में बचाव पक्ष के दोनों गवाहों को वापस लौटना पड़ा। जिरह कौन करे इसके लिए दी गई अर्जी पर बचावपक्ष से आपत्ति मांगी गई है। अब इसमें अगली पेशी 11 सितंबर नियत की गई है।
अधिवक्ता केके पांडेय ने बताया कि मंगलवार को कचहरी सीरियल ब्लास्ट की पेशी थी। बचावपक्ष के दो गवाह आजमगढ़ निवासी मोहम्मद हारुन व मोहम्मद तालिब से अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं को जिरह करनी थी। दोनों गवाहों की ओर से शपथपत्र पूर्व में दाखिल है। जिरह के लिए एटीएस के वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अतुल ओझा और दोनों गवाह भी कोर्ट में मौजूद थे। बचावपक्ष के अधिवक्ताओं ने एटीएस के एसपीओ की ओर से जिरह करने पर यह कहकर आपत्ति जताई कि गवाहों से जिरह केवल डीजीसी फौजदारी ही कर सकते हैं। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 24 में हुए संशोधन के तहत व्यवस्था है कि जिस मामले में विवेचना एटीएस करे उसमें साक्ष्य की कार्रवाई भी उसकी ओर से नियुक्त एपीओ या एसपीओ कर सकते हैं। इसके लिए अभियोजन पक्ष से अर्जी भी दी गई है। इस अर्जी पर कोर्ट ने बचावपक्ष से आपत्ति मांगी है। अब इस अर्जी पर सुनवाई अगली पेशी पर होगी। तीनों आरोपी को जेल में लगी विशेष अदालत में अपर जिलाजज अमरजीत त्रिपाठी की कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद तीनों को वापस जेल भेज दिया गया।
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फैजाबाद। कचहरी सीरियल ब्लास्ट केस में बचाव पक्ष के दोनों गवाहों को वापस लौटना पड़ा। जिरह कौन करे इसके लिए दी गई अर्जी पर बचावपक्ष से आपत्ति मांगी गई है। अब इसमें अगली पेशी 11 सितंबर नियत की गई है।
अधिवक्ता केके पांडेय ने बताया कि मंगलवार को कचहरी सीरियल ब्लास्ट की पेशी थी। बचावपक्ष के दो गवाह आजमगढ़ निवासी मोहम्मद हारुन व मोहम्मद तालिब से अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं को जिरह करनी थी। दोनों गवाहों की ओर से शपथपत्र पूर्व में दाखिल है। जिरह के लिए एटीएस के वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अतुल ओझा और दोनों गवाह भी कोर्ट में मौजूद थे। बचावपक्ष के अधिवक्ताओं ने एटीएस के एसपीओ की ओर से जिरह करने पर यह कहकर आपत्ति जताई कि गवाहों से जिरह केवल डीजीसी फौजदारी ही कर सकते हैं। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 24 में हुए संशोधन के तहत व्यवस्था है कि जिस मामले में विवेचना एटीएस करे उसमें साक्ष्य की कार्रवाई भी उसकी ओर से नियुक्त एपीओ या एसपीओ कर सकते हैं। इसके लिए अभियोजन पक्ष से अर्जी भी दी गई है। इस अर्जी पर कोर्ट ने बचावपक्ष से आपत्ति मांगी है। अब इस अर्जी पर सुनवाई अगली पेशी पर होगी। तीनों आरोपी को जेल में लगी विशेष अदालत में अपर जिलाजज अमरजीत त्रिपाठी की कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद तीनों को वापस जेल भेज दिया गया।
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