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अवध विवि में खुलेंगे चार नए संस्थान, 12 कोर्स होंगे शामिल
Updated Thu, 17 May 2018 12:32 AM IST
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अवध विवि परिसर में खुलेंगे चार नए संस्थान
फैजाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अपने नए सत्र से प्रोफेशनल कोर्सों के साथ भाषाई कोर्स खोलने की तैयारी में है। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में चार नए संस्थान खोलने जा रहा है। कुछ संस्थान पुराने कैंपस में तो, कुछ नए कैंपस में खोले जाने की तैयारी है। इन चार नए संस्थानों में 12 से अधिक कोर्स संचालित किए जाने हैं। इसमें भू-भौतिकी, भूगोल एवं जियोलॉजी समेत हिंदी, संस्कृत व अंग्रेजी में परास्नातक के कोर्स शामिल है। मौजूदा समय में इन नए कोर्सों के लिए प्रोफेसर पाठ्यक्रम तैयार कर रहे है। इसके बाद यूजीसी से मान्यता मिलते ही नए सत्र से कोर्सों को संचालित होने की उम्मीद है।
अवध विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा व नामांकन कार्य अंतिम दौर में पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन का पूरा ध्यान नए सत्र की ओर है। कुलपति मनोज दीक्षित के प्रयासों से पहले ही कुछ नए कोर्सों को शामिल किया जा चुका है। अब 12 नए कोर्सों को भी शामिल किए जाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए चार नए संस्थान खोलने की तैयारी चल रही है। इस बार जो कोर्स शामिल किए जा रहे हैं, उनमें भाषाई कोर्सों को विशेष तरजीह दी रही है। विश्वविद्यालय परिसर में हिंदी व संस्कृत में परास्नातक की डिग्री देने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज व इंग्लिश में परास्नातक की डिग्री देने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन लेंग्वेज खोलने जा रहा है। सोशल वर्क डिपार्टमेंट में एमएसडब्लयू व एमपीएस के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ साइंस में भू-भौतिकी, भूगोल व जियोलॉजी में परास्नातक की डिग्री देने जा रहा है। इसके अलावा रिमोट सेंसिग व गलेशियोलॉजी में परास्तानक की डिग्री देगा। इस सभी कोर्सों के लिए अगल-अलग इंस्टीट्यूट बनाने की तैयारी है। सेलेवस बन जाने व यूजीसी की ओर से मान्यता मिल जाने के बाद कोर्सों में दाखिला शुरू हो जाएगा।
विवि में डॉ. लोहिया पर हो सकेगी पीएचडी
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में जल्द ही शोध छात्र डॉ. लोहिया पर पीएचडी कर सकेंगे। इसके लिए पाठ्यक्रम बनने के साथ समस्त तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय के नए सत्र से लोहिया शोध पीठ खुलने की संभावनाएं प्रबल हैं। फिलहाल यह इकोनॉमिक डिपार्टमेंट के अधीन होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय अपने मद से दो करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसकी बिल्डिंग इकोनॉमिक्स डिमार्टमेंट के बगल विश्वविद्यालय की ओर से हटाए गए अतिक्रमण वाले स्थान पर बनेगी। फिलहाल मल्टी डिपार्टियल कोर्स चलाएं जाएंगे। बाद में डॉ. लोहिया पर पीएचडी व एमफिल कोर्स भी शामिल किए जाएंगे। मूल रूप से डॉ. लोहिया के अर्थशास्त्र संबंधी सिद्धांतों समेत उनके सामाजिक, राजनैतिक व संसदीय कार्यों पर शोध किए जाएंगे। सबसे खास यह है कि डॉ. लोहिया शोध पीठ में एक उनके नाम से एक बड़ी लाइब्रेरी बनेगी। इसमें डॉ. लोहिया से संबंधित तमाम हिंदी अंग्रेजी व संस्कृत की पुस्तकें उपलब्ध होंगी। नए सत्र से यह शोध पीठ शुरू होने की संभावना है। बिल्डिंग न तैयार होने की स्थिति यह नए सत्र से इकोनॉमिक्स विभाग में चलेगी। बाद में बिल्डिंग बन जाने के बाद यह अपनी शोध पीठ में स्थापित हो जाएगी।
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कवि जगन्नाथ रत्नाकर के नाम पर भी बनेगा शोध पीठ
विश्वविद्यालय में लोहिया पीठ के अलावा अयोध्या के प्रतिष्ठित कवि जगन्नाथ रास रत्नाकर द्विवेदी शोध संस्थान भी खोले जाने की योजना है। यह नए बनने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज के अधीन होगा। इसमें लोहिया शोध पीठ की पुस्तकालय व अलग से एक डिपार्टमेंट स्थापित किया जाएगा। बाद में शोध छात्र पीएचडी भी कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय परिसर में पठन-पाठन की दृष्टि से 12 नए कोर्स व चार नए इंस्टीट्यूट समेत दो नए शोध पीठ केंद्र स्थापित किए जाने हैं। इसकी तैयारियां चल रही है। उम्मीद है कि नए सत्र तक समस्त तैयारियां पूर्ण हो जाएंगी। इसके बाद कोर्सों व शोध केंद्र का संचालन होगा।- प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति, अवध विश्वविद्यालय
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फैजाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अपने नए सत्र से प्रोफेशनल कोर्सों के साथ भाषाई कोर्स खोलने की तैयारी में है। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में चार नए संस्थान खोलने जा रहा है। कुछ संस्थान पुराने कैंपस में तो, कुछ नए कैंपस में खोले जाने की तैयारी है। इन चार नए संस्थानों में 12 से अधिक कोर्स संचालित किए जाने हैं। इसमें भू-भौतिकी, भूगोल एवं जियोलॉजी समेत हिंदी, संस्कृत व अंग्रेजी में परास्नातक के कोर्स शामिल है। मौजूदा समय में इन नए कोर्सों के लिए प्रोफेसर पाठ्यक्रम तैयार कर रहे है। इसके बाद यूजीसी से मान्यता मिलते ही नए सत्र से कोर्सों को संचालित होने की उम्मीद है।
अवध विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा व नामांकन कार्य अंतिम दौर में पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन का पूरा ध्यान नए सत्र की ओर है। कुलपति मनोज दीक्षित के प्रयासों से पहले ही कुछ नए कोर्सों को शामिल किया जा चुका है। अब 12 नए कोर्सों को भी शामिल किए जाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए चार नए संस्थान खोलने की तैयारी चल रही है। इस बार जो कोर्स शामिल किए जा रहे हैं, उनमें भाषाई कोर्सों को विशेष तरजीह दी रही है। विश्वविद्यालय परिसर में हिंदी व संस्कृत में परास्नातक की डिग्री देने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज व इंग्लिश में परास्नातक की डिग्री देने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन लेंग्वेज खोलने जा रहा है। सोशल वर्क डिपार्टमेंट में एमएसडब्लयू व एमपीएस के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ साइंस में भू-भौतिकी, भूगोल व जियोलॉजी में परास्नातक की डिग्री देने जा रहा है। इसके अलावा रिमोट सेंसिग व गलेशियोलॉजी में परास्तानक की डिग्री देगा। इस सभी कोर्सों के लिए अगल-अलग इंस्टीट्यूट बनाने की तैयारी है। सेलेवस बन जाने व यूजीसी की ओर से मान्यता मिल जाने के बाद कोर्सों में दाखिला शुरू हो जाएगा।
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विवि में डॉ. लोहिया पर हो सकेगी पीएचडी
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में जल्द ही शोध छात्र डॉ. लोहिया पर पीएचडी कर सकेंगे। इसके लिए पाठ्यक्रम बनने के साथ समस्त तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय के नए सत्र से लोहिया शोध पीठ खुलने की संभावनाएं प्रबल हैं। फिलहाल यह इकोनॉमिक डिपार्टमेंट के अधीन होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय अपने मद से दो करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसकी बिल्डिंग इकोनॉमिक्स डिमार्टमेंट के बगल विश्वविद्यालय की ओर से हटाए गए अतिक्रमण वाले स्थान पर बनेगी। फिलहाल मल्टी डिपार्टियल कोर्स चलाएं जाएंगे। बाद में डॉ. लोहिया पर पीएचडी व एमफिल कोर्स भी शामिल किए जाएंगे। मूल रूप से डॉ. लोहिया के अर्थशास्त्र संबंधी सिद्धांतों समेत उनके सामाजिक, राजनैतिक व संसदीय कार्यों पर शोध किए जाएंगे। सबसे खास यह है कि डॉ. लोहिया शोध पीठ में एक उनके नाम से एक बड़ी लाइब्रेरी बनेगी। इसमें डॉ. लोहिया से संबंधित तमाम हिंदी अंग्रेजी व संस्कृत की पुस्तकें उपलब्ध होंगी। नए सत्र से यह शोध पीठ शुरू होने की संभावना है। बिल्डिंग न तैयार होने की स्थिति यह नए सत्र से इकोनॉमिक्स विभाग में चलेगी। बाद में बिल्डिंग बन जाने के बाद यह अपनी शोध पीठ में स्थापित हो जाएगी।
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कवि जगन्नाथ रत्नाकर के नाम पर भी बनेगा शोध पीठ
विश्वविद्यालय में लोहिया पीठ के अलावा अयोध्या के प्रतिष्ठित कवि जगन्नाथ रास रत्नाकर द्विवेदी शोध संस्थान भी खोले जाने की योजना है। यह नए बनने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज के अधीन होगा। इसमें लोहिया शोध पीठ की पुस्तकालय व अलग से एक डिपार्टमेंट स्थापित किया जाएगा। बाद में शोध छात्र पीएचडी भी कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय परिसर में पठन-पाठन की दृष्टि से 12 नए कोर्स व चार नए इंस्टीट्यूट समेत दो नए शोध पीठ केंद्र स्थापित किए जाने हैं। इसकी तैयारियां चल रही है। उम्मीद है कि नए सत्र तक समस्त तैयारियां पूर्ण हो जाएंगी। इसके बाद कोर्सों व शोध केंद्र का संचालन होगा।- प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति, अवध विश्वविद्यालय