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गोशाला में भूख से 28 मवेशी मरे
Updated Thu, 12 Oct 2017 10:47 PM IST
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तारुन। क्षेत्र के ककोली गांव में बिना पंजीकरण के गोशाला में रखे चार सौ मवेशियों के लिए चारे का संकट मौत का सबब बन रहा है।
पखवारेभर में 28 मवेशियों की चारे के अभाव में मौत हो गई है। दो मवेशियों की बुधवार को मौत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस व पशुपालन विभाग के अफसरों ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की है।
उधर, गोशाला संचालकों ने जिला प्रशासन व सरकार को पहले ही पत्र भेजकर चारा-भूसा व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की गोहार लगाई है।
छुट्टा जानवरों के संरक्षण के लिए बाहरपुर गांव के कुछ लोग आगे आए थे। गांव वालों के सहयोग से गोशाला की व्यवस्था शुरू कर दी गई, जिसका उद्घाटन भी बीते 15 अगस्त को क्षेत्रीय विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू ने किया था।
बताया गया कि एक महीने तक गोवा के एक समाजसेवी ने पशुओं के चारे पानी की व्यवस्था की, लेकिन बाद में उसने सहयोग बंद कर दिया।
इसके बाद समिति से जुड़े राजेश, जेठू सहित अन्य ने भूसा व अन्य सामान गांव-गांव मांगकर पशुओं के खाने की व्यवस्था करते रहे। गोशाला शुरू होते ही लगभग 400 मवेशी गोशाला में लाए गए।
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इसके बाद चारे के अभाव को लेकर गोशाला पर संकट के बादल मंडराने लगे। चारे के अभाव में पखवारे में 28 मवेशी अलग-अलग दिनों में मरते गए, जिसमें दो मवेशी बुधवार को मर गए।
संचालकों के उड़े होश तो प्रशासन में भी हड़कंप
गोशाला में रह रहे मवेशियों के मरने का सिलसिला जारी है, जिससे संचालकों के होश उड़ गए हैं। बताया गया कि इस व्यवस्था से जुड़े लोगों ने शासन-प्रशासन को इसकी सूचना दी तो अफसरों में भी हड़कंप मच गया।
बुधवार को बीकापुर की पुलिस क्षेत्राधिकारी आभा पांडेय व गुरुवार को पशु चिकित्साधिकारी तारुन डॉ. लालमणि प्रजापति मौके पर पहुंचे। उनके साथ भाजपा के नलिनेश प्रताप सिंह, पवन तिवारी, शैलेन्द्र सिंह आदि भी थे।
तब मामले की सच्चाई सामने आई। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. लालमणि प्रजापति ने बताया कि रिपोर्ट मुख्य चिकित्साधिकारी को भेजी गई है। आगे निर्देश के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
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पखवारेभर में 28 मवेशियों की चारे के अभाव में मौत हो गई है। दो मवेशियों की बुधवार को मौत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस व पशुपालन विभाग के अफसरों ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की है।
उधर, गोशाला संचालकों ने जिला प्रशासन व सरकार को पहले ही पत्र भेजकर चारा-भूसा व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की गोहार लगाई है।
छुट्टा जानवरों के संरक्षण के लिए बाहरपुर गांव के कुछ लोग आगे आए थे। गांव वालों के सहयोग से गोशाला की व्यवस्था शुरू कर दी गई, जिसका उद्घाटन भी बीते 15 अगस्त को क्षेत्रीय विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू ने किया था।
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बताया गया कि एक महीने तक गोवा के एक समाजसेवी ने पशुओं के चारे पानी की व्यवस्था की, लेकिन बाद में उसने सहयोग बंद कर दिया।
इसके बाद समिति से जुड़े राजेश, जेठू सहित अन्य ने भूसा व अन्य सामान गांव-गांव मांगकर पशुओं के खाने की व्यवस्था करते रहे। गोशाला शुरू होते ही लगभग 400 मवेशी गोशाला में लाए गए।
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इसके बाद चारे के अभाव को लेकर गोशाला पर संकट के बादल मंडराने लगे। चारे के अभाव में पखवारे में 28 मवेशी अलग-अलग दिनों में मरते गए, जिसमें दो मवेशी बुधवार को मर गए।
संचालकों के उड़े होश तो प्रशासन में भी हड़कंप
गोशाला में रह रहे मवेशियों के मरने का सिलसिला जारी है, जिससे संचालकों के होश उड़ गए हैं। बताया गया कि इस व्यवस्था से जुड़े लोगों ने शासन-प्रशासन को इसकी सूचना दी तो अफसरों में भी हड़कंप मच गया।
बुधवार को बीकापुर की पुलिस क्षेत्राधिकारी आभा पांडेय व गुरुवार को पशु चिकित्साधिकारी तारुन डॉ. लालमणि प्रजापति मौके पर पहुंचे। उनके साथ भाजपा के नलिनेश प्रताप सिंह, पवन तिवारी, शैलेन्द्र सिंह आदि भी थे।
तब मामले की सच्चाई सामने आई। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. लालमणि प्रजापति ने बताया कि रिपोर्ट मुख्य चिकित्साधिकारी को भेजी गई है। आगे निर्देश के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।