{"_id":"62f6a5539144c003ab16adf5","slug":"10-lakh-devotees-took-a-dip-in-saryu-faizabad-news-lko6436851114","type":"story","status":"publish","title_hn":"10 लाख भक्तों ने सरयू में लगाई डुबकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
10 लाख भक्तों ने सरयू में लगाई डुबकी
विज्ञापन
अयोध्या। रामनगरी में पखवारे भर से चल रहे प्रसिद्ध सावन झूला मेला के मुख्य पर्व पूर्णिमा पर 10 लाख श्रद्धालुओं ने पतित पावनी सरयू में डुबकी लगाई। इस बार पूर्णिमा स्नान का पर्व दो दिन मनाया गया।
पूर्णिमा तिथि पर 11 अगस्त को जहां लाखों भक्तों ने सरयू स्नान कर मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन किया तो वहीं उदया तिथि की मान्यता के चलते 12 अगस्त को भी सरयू स्नान व दर्शन-पूजन के लिए घाटों से लेकर मठ-मंदिरों तक कतार लगी रही।
सावन मेले के अंतिम पर्व श्रावण पूर्णिमा पर रामनगरी में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। गुरुवार व शुक्रवार को भोर से ही घाटों से लेकर नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनकभवन, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीरामजन्मभूमि, कालेराम मंदिर, दशरथ महल आदि मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए आस्था की कतार लग गई। स्नानघाटों पर ब्रह्ममुहूर्त से ही वैदिक मंत्र गूंजने लगे तो सरयू घाट की आध्यात्मिक छटा निखर उठी।
विज्ञापन
घाटों पर गूंजते जयकारे व श्रद्धालुओं का रेला आस्था का चरम प्रदर्शित कर रहा था। सूर्योदय होते ही घाटों पर उत्सव जैसा माहौल दिखा। स्नान, दान को लेकर भक्तों में होड़ सी रही। सरयू में डुबकी लगाने के बाद भक्तों की भीड़ दर्शन-पूजन के लिए प्रतिष्ठित मंदिरों की ओर निकल पड़ी। नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनकभवन में दर्शन-पूजन के बाद भक्त रामलला के दरबार में भी हाजिरी लगाना नहीं भूले।
रामलला के दरबार की भव्यता देखकर भक्त आनंदित नजर आ रहे थे। भी? नियंत्रित करने के लिए पूरे अयोध्या धाम में बैरियरों का जाल बिछा दिया गया था। डीएम नितीश कुमार, एसएसपी प्रशांत वर्मा, एसपी सिटी विजयपाल सिंह, सीओ अयोध्या डॉ.राजेश तिवारी स्वयं मेलाक्षेत्र में भ्रमणशील रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
श्रावण पूर्णिमा पर्व पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं की वापसी भी शुरू हो गई। इस दौरान रेलवे स्टेशन व बस स्टेशन पर वापसी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। मेले में कई श्रद्धालु और उनके साथ आए बच्चे व महिलाएं भारी भीड़ के चलते भटक गईं। ऐेसे में पुलिस द्वारा नयाघाट, कोतवाली अयोध्या पर बनाया गया खोया-पाया कैंप उनके लिए वरदान साबित हुआ।
मेला क्षेत्र में लगाए गए ध्वनि विस्तारक यंत्र से दिन-रात श्रद्धालुओं के खोने की सूचनाएं प्रसारित की जाती रहीं। भटके श्रद्धालुओं को खोया-पाया कैंप के माध्यम से परिजनों से मिलाया जाता रहा।
विज्ञापन
पूर्णिमा तिथि पर 11 अगस्त को जहां लाखों भक्तों ने सरयू स्नान कर मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन किया तो वहीं उदया तिथि की मान्यता के चलते 12 अगस्त को भी सरयू स्नान व दर्शन-पूजन के लिए घाटों से लेकर मठ-मंदिरों तक कतार लगी रही।
विज्ञापन
सावन मेले के अंतिम पर्व श्रावण पूर्णिमा पर रामनगरी में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। गुरुवार व शुक्रवार को भोर से ही घाटों से लेकर नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनकभवन, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीरामजन्मभूमि, कालेराम मंदिर, दशरथ महल आदि मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए आस्था की कतार लग गई। स्नानघाटों पर ब्रह्ममुहूर्त से ही वैदिक मंत्र गूंजने लगे तो सरयू घाट की आध्यात्मिक छटा निखर उठी।
विज्ञापन
घाटों पर गूंजते जयकारे व श्रद्धालुओं का रेला आस्था का चरम प्रदर्शित कर रहा था। सूर्योदय होते ही घाटों पर उत्सव जैसा माहौल दिखा। स्नान, दान को लेकर भक्तों में होड़ सी रही। सरयू में डुबकी लगाने के बाद भक्तों की भीड़ दर्शन-पूजन के लिए प्रतिष्ठित मंदिरों की ओर निकल पड़ी। नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनकभवन में दर्शन-पूजन के बाद भक्त रामलला के दरबार में भी हाजिरी लगाना नहीं भूले।
रामलला के दरबार की भव्यता देखकर भक्त आनंदित नजर आ रहे थे। भी? नियंत्रित करने के लिए पूरे अयोध्या धाम में बैरियरों का जाल बिछा दिया गया था। डीएम नितीश कुमार, एसएसपी प्रशांत वर्मा, एसपी सिटी विजयपाल सिंह, सीओ अयोध्या डॉ.राजेश तिवारी स्वयं मेलाक्षेत्र में भ्रमणशील रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
श्रावण पूर्णिमा पर्व पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं की वापसी भी शुरू हो गई। इस दौरान रेलवे स्टेशन व बस स्टेशन पर वापसी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। मेले में कई श्रद्धालु और उनके साथ आए बच्चे व महिलाएं भारी भीड़ के चलते भटक गईं। ऐेसे में पुलिस द्वारा नयाघाट, कोतवाली अयोध्या पर बनाया गया खोया-पाया कैंप उनके लिए वरदान साबित हुआ।
मेला क्षेत्र में लगाए गए ध्वनि विस्तारक यंत्र से दिन-रात श्रद्धालुओं के खोने की सूचनाएं प्रसारित की जाती रहीं। भटके श्रद्धालुओं को खोया-पाया कैंप के माध्यम से परिजनों से मिलाया जाता रहा।