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खुलेंगे छह नए राजकीय हाईस्कूल
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Sun, 10 May 2015 11:34 PM IST
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माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में छह नए राजकीय हाईस्कूल खोले जाएंगे। जिला स्तर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। शासन से अनुमोदन मिलने का इंतजार है।
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समझा जा रहा है कि अगले शिक्षण सत्र से उक्त विद्यालय अस्तित्व में आ जाएंगे। प्रत्येक स्कूल भवन के निर्माण पर 58.12 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बजट में 50 फीसदी केंद्र सरकार का और 50 राज्य सरकार का होगा।
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गौरतलब है कि बेसिक की तर्ज पर जिले में माध्यमिक शिक्षा अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत पांच साल के भीतर 11 राजक ीय हाईस्कूल ग्रामीण क्षेत्र में खोले जा चुके है।
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अभियान के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर कराए गए जीपीएस स्कूल मैपिंग सर्वे में 29 जूनियर हाई स्कूलों को हाईस्कूल बनाने की सूची शासन से प्राप्त हुई थी, लेकिन 23 गांव अन्य मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जिले के छह गांवों में हाईस्कूल भवन बनाने का प्रस्ताव एक माह पहले शासन को भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि साल के अंत तक शासन से बजट प्राप्त हो जाएगा। इसके तुरंत बाद ही औपचारिकताएं पूरी कर भवन निर्माण का काम
प्रारंभ हो जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत महेवा विकास खंड के कर्बा बुजुर्ग, बसरेहर के बीना तथा गोपालपुरा गांव मेें राजकीय हाईस्कूल खोले जाएंगे। इसी प्रकार भरथना के अकबरपुर, चकरनगर के कचहरी, जसवंतनगर के मड़ैया फकीर में भी राजकीय हाईस्कूल खोले जाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
प्रत्येक स्कूल भवन के निर्माण पर 58.12 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन स्कूलों के भवन में पेयजल के साथ शौचालयों की भी व्यवस्था की जाएगी।
जिन गांवों को राजकीय स्कूल के लिए चुना गया हैं उन गांवों से पांच-पांच किमी की दूरी पर कोई भी राजकीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त हाईस्कूल न होने के कारण कमजोर तबके की छात्राएं मिडिल पास करने के बाद ही घर बैठ जाती हैं, लेकिन अब उन्हें घर के पास ही स्कूल की सुविधा मिल जाएगी।
माना जा रहा है कि प्रस्तावित हाईस्कूल बालिका शिक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होेंगे। जिला समन्वयक (माध्यमिक शिक्षा अभियान) यशवंत कुमार ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत कराए गए सर्वे में 29 गांव निकलकर आए थे। इनमें से छह को मानक के अनुसार माना गया है।
उक्त गांवों में राजकीय हाईस्कूल खोले जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से अनुमोदन हो जाने के बाद भवन निर्माण की औपचारिकताएं शुरू कर दी जांएगी।