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15 के बाद चलेंगी जिले की नहरें

Fri, 30 Nov 2018 12:14 AM IST
अमर उजाला, इटावा
अमर उजाला, इटावा Updated Fri, 30 Nov 2018 12:14 AM IST
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Will move after 15th canal of district
कुड़रिया रजबहा का निरीक्षण करते सिंचाई मंत्री। अमर उजाला - फोटो : amar ujala
प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मवीर सिंह ने बृहस्पतिवार को किसानों को आश्वस्त किया कि 15 दिसंबर से नहरें चलने लगेंगी। सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। दो हजार क्यूसेक पानी रोटेशन के आधार पर लगातार प्रदेश की नहरों में बहता रहेगा। कुंभ स्नान के लिए टेहरी बांध से अतिरिक्त पानी की व्यवस्था होगी। स्नान करने वालों को इस बार घुटनों तक नहीं कमर तक पानी मिलेगा।  
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सिंचाई विभाग के निरीक्षण गृह में सिंचाई मंत्री ने बताया कि फसल व कुंभ दोनों ही आवश्यक हैं। 15 नवंबर से नहरों की सिल्ट सिंचाई का काम चल रहा है, जो 15 दिसंबर तक चलेगा। इस बार नहर के शुरुआती बिंदु (हैड) से नहीं बल्कि अंतिम बिंदु (टेल) से सिल्ट साफ करवाई जा रही है। कानपुर के अधीक्षण अभियंता ने हैड से काम शुरू करवाया तो उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रदेश सरकार की मंशा है कि पानी टेल तक नहीं, किसान के खेत तक पहुंचे। इसीलिए नया प्रबंध किया है। सफाई कार्य से पहले ड्रोन कैमरे से तस्वीर ली जा रही। डीएम की संस्तुति के बाद भुगतान होगा।  
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उन्होंने बताया कि बाढ़ से होने वाले नुकसान एवं सूखा की स्थिति को देखते हुए विभाग ने नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवीकरण सेल का गठन किया है। सिंचाई सचिव इसके अध्यक्ष हैं। नदियों के पुनर्जीवन के लिए संभल की अरिंद नदी, बदायूं की स्रोत नदी, पीलीभीत की गोमतीच, हरदोई की सई नदी, अयोध्या की तमसा, बस्ती की मनोरमा, गोरखपुर की आमी और बनारस की वरुणा समेत कुल आठ नदियां चिह्नित की गई है। ये सभी नदियां गंगा में मिलती हैं। इन्हें जन सहयोग व सरकार के जरिये पुनर्जीवित किया जा रहा है।
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इसके साथ ही बाण सागर, सरयू, मध्य गंगा नहर, अर्जुन सहायक परियोजनाओं को अगले साल तक पूरा किया जा रहा है। ये परियोजनाएं पूर्ण होने पर बुंदेलखंड में पानी की कमी नहीं होगी और पलायन रुकेेगा। मध्यप्रदेश से केन व बेतवा नदी के बंटवारे को लेकर भी समझौता हो गया है। इससे बुंदेलखंड को केन नदी से 22 प्रतिशत पानी की आपूर्ति होगी। सिंचाई मंत्री ने बताया कि वन ड्राप मोर क्रॉप स्लोगन को पूरा करने के लिए अब यूपी में इजराइल पद्धति से सिंचाई पर जोर दिया जा रहा है। यह महंगी पद्धति है, इसलिए ड्रिप स्प्रिंकलर जैसे उपकरणों पर 80 से 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। वार्ता के दौरान भरथना विधायक सावित्री कठेरिया, कृपा नारायन तिवारी, मुकेश यादव आदि मौजूद रहे।
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