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Etawah News: पुरानी मशीनों की मियाद खत्म, नई लगाने पर सिर्फ मंथन
Mon, 10 Apr 2023 12:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Mon, 10 Apr 2023 12:40 AM IST
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इटावा/सैफई। चार माह पहले शासन से स्वीकृति मिलने के बाद भी आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में नई सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन नहीं लग सकी है। अभी तक सिर्फ कौन सी कंपनी से काम कराना है, इस पर ही मंथन चल रहा है। मियाद खत्म होने के बाद भी चल रही पुरानी मशीनें अक्सर खराब हो जाती हैं। इस कारण मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ती है।
आयुर्विज्ञान विवि में प्रतिदिन तीन से चार हजार मरीज ओपीडी में दिखाने आते हैं। इनमें जिले के साथ ही मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया समेत कई जनपदों मरीज शामिल हैं। रोजाना हादसों या अन्य घटनाओं में घायल 100 से अधिक लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीब 70 से 80 लोगों को सीटी स्कैन और एमआरआई जांच लिखी जाती है। मियाद के बाद भी चल रही मशीनें आए दिन खराब होने और गर्म होने की वजह से दगा दे जाती हैं।
इसके कारण बड़ी संख्या में मरीजों को लौटना पड़ता है। बाहर से महंगी जांचें करानी पड़ती हैं। इस परेशानी को देखते हुए विवि की ओर से कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अभी तक मशीनें नहीं बदल सकी हैं। नवंबर 2022 में शासन से स्वीकृति मिलने के बाद भी पुरानी मशीनें लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं।
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प्रमुख सचिव चिकित्सा दे गए थे आश्वासन
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने जुलाई 2021 में मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। इस दौरान सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन खराब रहने का मुददा उठाया गया था। इस पर प्रमुख सचिव ने कहा था कि मशीनें पुरानी हो गई हैं। उन्होंने जल्द मशीनें बदलवाने के लिए आश्वस्त किया था। दो साल पूरे होने को हैं, लेकिन अभी तक मशीनें बदली नहीं गईं।
वारंटी खत्म होने के बाद देने लगीं गच्चा
विवि में सीटी स्कैन और एमआरआई की मशीन 2007 में लगवाई गई थीं। अधिकारियों के अनुसार, दोनों मशीनों की मेंटीनेंस की मियाद अधिकतम 10 साल होती है। 2017 में यह खत्म हो चुकी है। इसके कुछ साल बाद से ही मशीनें गच्चा देने लगी हैं।
बैठक में लिया जाएगा निर्णय
प्रभारी कुलसचिव चंद्रवीर सिंह ने बताया कि मशीन जल्द लगवाने का प्रयास किया जा रहा है। शासन की ओर से पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। अब इसे लेकर दो दिन बाद बैठक होगी। इसमें तय होगा कि मशीन कब तक बदल सकती हैं।
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आयुर्विज्ञान विवि में प्रतिदिन तीन से चार हजार मरीज ओपीडी में दिखाने आते हैं। इनमें जिले के साथ ही मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया समेत कई जनपदों मरीज शामिल हैं। रोजाना हादसों या अन्य घटनाओं में घायल 100 से अधिक लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीब 70 से 80 लोगों को सीटी स्कैन और एमआरआई जांच लिखी जाती है। मियाद के बाद भी चल रही मशीनें आए दिन खराब होने और गर्म होने की वजह से दगा दे जाती हैं।
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इसके कारण बड़ी संख्या में मरीजों को लौटना पड़ता है। बाहर से महंगी जांचें करानी पड़ती हैं। इस परेशानी को देखते हुए विवि की ओर से कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अभी तक मशीनें नहीं बदल सकी हैं। नवंबर 2022 में शासन से स्वीकृति मिलने के बाद भी पुरानी मशीनें लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं।
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प्रमुख सचिव चिकित्सा दे गए थे आश्वासन
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने जुलाई 2021 में मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। इस दौरान सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन खराब रहने का मुददा उठाया गया था। इस पर प्रमुख सचिव ने कहा था कि मशीनें पुरानी हो गई हैं। उन्होंने जल्द मशीनें बदलवाने के लिए आश्वस्त किया था। दो साल पूरे होने को हैं, लेकिन अभी तक मशीनें बदली नहीं गईं।
वारंटी खत्म होने के बाद देने लगीं गच्चा
विवि में सीटी स्कैन और एमआरआई की मशीन 2007 में लगवाई गई थीं। अधिकारियों के अनुसार, दोनों मशीनों की मेंटीनेंस की मियाद अधिकतम 10 साल होती है। 2017 में यह खत्म हो चुकी है। इसके कुछ साल बाद से ही मशीनें गच्चा देने लगी हैं।
बैठक में लिया जाएगा निर्णय
प्रभारी कुलसचिव चंद्रवीर सिंह ने बताया कि मशीन जल्द लगवाने का प्रयास किया जा रहा है। शासन की ओर से पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। अब इसे लेकर दो दिन बाद बैठक होगी। इसमें तय होगा कि मशीन कब तक बदल सकती हैं।