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करोड़ों की जमीन में फर्जीवाड़ा करने वाले कानूनगो, लेखपाल का पता नहीं
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ताखा के ऊसराहार में करोड़ों रुपये के नाले की सरकारी जमीन को फर्जीवाड़ा करके भूमाफिया के नाम करने वाले कानूनगो और लेखपाल का पता ही नहीं चल रहा है।
इसी बीच जांच करके कार्रवाई का निर्देश देने वाले एसडीएम नंद प्रकाश मौर्य का ताखा तहसील से तबादला हुआ तो नाले की जमीन से जुड़े अभिलेख ही तहसील से गायब हो गए।
ऊसराहार के मोहरी गांव की करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की 22 बीघा नाले की जमीन पर अवैध कब्जे की जांच ताखा के पूर्व एसडीएम नंद प्रकाश मौर्य ने की थी।
जांच में सामने आया कि कई साल पहले पत्रावलियों के डिजिटलाइजेशन के समय तत्कालीन लेखपाल और कानूनगो ने नाले की जमीन खतौनी में मोहरी गांव के तीन लोगों के नाम दर्ज कर दी थी।
एसडीएम ने 9 जून को कब्जा हटवाकर कब्जेदारों और तत्कालीन लेखपाल, कानूनगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने का निर्देश तहसीलदार श्रीराम यादव को दिया था।
इसी बीच नंद प्रकाश का तबादला ताखा से जिला मुख्यालय पर कर दिया गया। उनकी जगह एसडीएम नम्रता सिंह ने चार्ज संभालने के बाद छानबीन शुरू की।
शुक्रवार को पड़ताल में पता चला कि नाले की जमीन से संबंधित खसरा गायब है। खतौनी में नाम परिवर्तन करने वाले किसी लेखपाल या कानूनगो का हस्ताक्षर नहीं है।
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तहसीलदार श्रीराम यादव का कहना है कि फर्जीवाड़े के समय तैनात रहे सभी लेखपाल और कानूनगो की जानकारी जुटाई जा रही है। सबके बयान लेकर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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इसी बीच जांच करके कार्रवाई का निर्देश देने वाले एसडीएम नंद प्रकाश मौर्य का ताखा तहसील से तबादला हुआ तो नाले की जमीन से जुड़े अभिलेख ही तहसील से गायब हो गए।
ऊसराहार के मोहरी गांव की करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की 22 बीघा नाले की जमीन पर अवैध कब्जे की जांच ताखा के पूर्व एसडीएम नंद प्रकाश मौर्य ने की थी।
जांच में सामने आया कि कई साल पहले पत्रावलियों के डिजिटलाइजेशन के समय तत्कालीन लेखपाल और कानूनगो ने नाले की जमीन खतौनी में मोहरी गांव के तीन लोगों के नाम दर्ज कर दी थी।
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एसडीएम ने 9 जून को कब्जा हटवाकर कब्जेदारों और तत्कालीन लेखपाल, कानूनगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने का निर्देश तहसीलदार श्रीराम यादव को दिया था।
इसी बीच नंद प्रकाश का तबादला ताखा से जिला मुख्यालय पर कर दिया गया। उनकी जगह एसडीएम नम्रता सिंह ने चार्ज संभालने के बाद छानबीन शुरू की।
शुक्रवार को पड़ताल में पता चला कि नाले की जमीन से संबंधित खसरा गायब है। खतौनी में नाम परिवर्तन करने वाले किसी लेखपाल या कानूनगो का हस्ताक्षर नहीं है।
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तहसीलदार श्रीराम यादव का कहना है कि फर्जीवाड़े के समय तैनात रहे सभी लेखपाल और कानूनगो की जानकारी जुटाई जा रही है। सबके बयान लेकर आगे कार्रवाई की जाएगी।