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टिशू कल्चर तकनीक किसानों के लिए साबित हो रही वरदान

Sun, 27 Feb 2022 11:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 11:38 PM IST
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Tissue culture technology is proving to be a boon for farmers
इटावा। नावली के प्रगतिशील किसान ने गांव में ही आलू बीज तैयार करने की प्रयोगशाला स्थापित कर दी है। टिश्यू कल्चर बेटे के साथ मिलकर वह उन्नत किस्त के आलू बीज तैयार कर जिले के किसानों को उपलब्ध करा रहे हैं। इससे किसानों का आलू बीज की नई प्रजातियों के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है।
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जिले में आलू का बड़ा रकबा होने के बावजूद किसानों को उन्नत बीज के लिए भटकना पड़ता था। गांव नावली निवासी राम करन तिवारी भी आलू की खेती करते हैं। वह भी बीज के लिए मेरठ आदि जिलों में जाते थे लेकिन उनकी पसंद के बीच नहीं मिल पाते थे।
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वर्ष 2016 में राम करन कृषि विभाग की ओर से आलू अनुसंधान संस्थान मेरठ गए। वहां टिश्यू कल्चर विधि से आलू का बीज तैयार करने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से चर्चा कर इटावा में आलू का बीज तैयार करने का फैसला लिया।
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उन्होंने एक प्रयोगशाला तैयार कर टिश्यू कल्चर विधि से आलू बीज तैयार करना शुरू कर दिया। पुत्र शिवम भी उनका हाथ बंटाने लगे। अब राम करन उन्नत बीज इटावा के किसानों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध करा रहे है। इससे जिले के किसानों के खेतों में उपज बढ़ गई है। राम करन ने बताया जिले के कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
क्या है टिश्यू कल्चर तकनीक
वर्ष 1902 में जर्मनी के कृषि वैज्ञानिक हेवर लांट ने टिश्यू कल्चर से उन्नत बीज तैयार करने की तकनीक विकसित की थी। वर्ष 1970 में केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र शिमला में इस तकनीक को अपनाया गया। आलू की अच्छी व रोग रोधक क्षमता वाली प्रजातियां तैयार की गईं। इस विधि में पौधे के किसी भी भाग से टिश्यू लिया जाता है। टिश्यू को एक निश्चित तापमान पर रखा जाता है।उसे संवर्धन घोल में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसके करीब बीस दिन बाद पौधा तैयार हो जाता है। इसके बाद पौधों को निकालकर नेट हाउस में रखा जाता है। जहां पौधों को ग्रोथ ट्रे में नारियल के बुरादे में प्रत्यारोपित किया जाता है नेट हाउस का तापमान 20 से 25 डिग्री रखा जाता है। जब पौधों में मजबूती आ जाती है उसके बाद पौधों को खेत में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है । एक एकड़ में करीब दो लाख पौधे लग जाते हैं।
पांच हजार में आता है मदर प्लांट
किसान राम करन ने बताया कि वह शिमला से पांच हजार रुपये में एक वैरायटी का एक मदर प्लांट लाते हैं। फिर टिश्यू कल्चर विधि से बीज तैयार करते है। पिछले सालों में वह कुफरी, ख्याति, कुफरी बहार, कुफरी मोहन, कुफरी लोकर व पुखराज के मदर प्लांट लाते थे। इस साल उन्होंने अन्य प्रजातियों के बीज तैयार किए हैं। जिसमें कुफरी फ्रायओम, कुफरी संगम, कुफरी लीमा , कुफरी सुख्याति, कुफरी नीलकंठ की प्रजातियां हैं।

एक लाख से अधिक का आता है खर्चा
राम करन तिवारी ने बताया कि एक एकड़ के लिए आलू का बीज तैयार करने में एक लाख से अधिक का खर्चा आता है। पहली बार प्रति पौधे में चार-पांच बीज तैयार होते हैं। पहले साल में इन्हें जी 0 नाम दिया जाता है दूसरी साल में जी 1 और तीसरे साल में जी दो, चौथे साल जी तीन बीज होता है। उसके बाद फाउंडेशन बीज तैयार होता है।
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