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इटावाः इस बार शिक्षकों को ही खरीदने पडेंगे सांकेतिक झंडे
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इटावा। शिक्षक दिवस से पहले शासन के आदेश पर बिकने वाले सांकेतिक झंडों की कीमत भी इस बार प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को अदा करनी होगी। लॉकडाउन के कारण विद्यालयों में शिक्षक कार्य बंद है। बच्चे विद्यालय नहीं आ सकते। ऐसे मेे झंडों की जिम्मेदारी भी शिक्षकों प्रधानाचार्यों को दे दी गई है। शिक्षक अपनी अपनी कक्षा की छात्र संख्या के अनुसार सांकेतिक झंडे क्रय करेंगे। इसके बाद जब विद्यालय खुलेंगे तब ये झंडे बच्चों को बिक्री किए जा सकेंगे।
शासन के आदेश पर हर साल शिक्षक दिवस से पहले छात्र छात्राओं को सांकेतिक झंडा दिया जाता है। इस झंडे की कीमत दो रुपये होती है। सभी जिलों से एकत्रित होने वाली इस राशि को शिक्षक कल्याण कोष में जमा किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों के हित में यह धनराशि खर्च की जाती है। पहले तो स्कूल खुलते रहे। धनराशि भी इकट्ठा होती रही। इस बार स्थिति उलट है। विद्यालय खुल नहीं रहे। ऐसे में शासन ने भी इस जिम्मेदारी को शिक्षकों के ऊपर ही डाल दिया।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजू राणा ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया है कि वे अपनी अपनी छात्र संख्या के आधार पर सांकेतिक झंडा निर्धारित शुल्क अदा कर प्राप्त कर लेें। इन सांकेतिक झंडों को शिक्षकों को क्रय करना होगा। इसके बाद प्राप्त धनराशि को कार्यालय में जमा करके रसीद प्राप्त की जा सकेगी।
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शासन के आदेश पर हर साल शिक्षक दिवस से पहले छात्र छात्राओं को सांकेतिक झंडा दिया जाता है। इस झंडे की कीमत दो रुपये होती है। सभी जिलों से एकत्रित होने वाली इस राशि को शिक्षक कल्याण कोष में जमा किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों के हित में यह धनराशि खर्च की जाती है। पहले तो स्कूल खुलते रहे। धनराशि भी इकट्ठा होती रही। इस बार स्थिति उलट है। विद्यालय खुल नहीं रहे। ऐसे में शासन ने भी इस जिम्मेदारी को शिक्षकों के ऊपर ही डाल दिया।
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जिला विद्यालय निरीक्षक राजू राणा ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया है कि वे अपनी अपनी छात्र संख्या के आधार पर सांकेतिक झंडा निर्धारित शुल्क अदा कर प्राप्त कर लेें। इन सांकेतिक झंडों को शिक्षकों को क्रय करना होगा। इसके बाद प्राप्त धनराशि को कार्यालय में जमा करके रसीद प्राप्त की जा सकेगी।
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