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Etawah News: इस बार पालकी पर सवार होकर आएंगी मां अंबे
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इटावा। नवसंवत्सर का शुभारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी पहले नवरात्रि से होगा। इस बार चैत्र नवरात्र 19 से 27 मार्च तक रहेंगे। इस बार माता रानी पालकी में सवार होकर आएंगी और हाथी पर बैठकर प्रस्थान करेंगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि पालकी में सवार होकर आने का संकेत यह है कि इस बार उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इसका असर संपूर्ण विश्व पर पड़ेगा। देश-दुनिया महामारी और बीमारी की चपेट में आ सकती है। वहीं, इसे व्यापार, अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिए भी शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान माता रानी दुष्टों का नाश करती हैं और पाप कर्मों का दंड देती हैं। ऐसे में इस बार मां की स्तुति व भक्ति का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
फिलहाल देवी मंदिरों व आश्रमों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के कालीवाह मंदिर, काली बाड़ी मंदिर, लखना का कालिका मंदिर, बलरई का ब्रह्माणी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों पर नवरात्रि के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
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- इस तरह तय होता है मां का वाहन
आचार्य पंडित कपिल देव त्रिपाठी ने बताया कि मां दुर्गा का वाहन सिंह यानी शेर माना जाता है। मां दुर्गा शेर पर ही सवार रहती हैं लेकिन जब मां नवरात्रि में पृथ्वीलोक पर आती हैं तब उनका वाहन बदल जाता है। मां के वाहन में बदलाव दिन के वार के हिसाब से होता है। जब नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार या शुक्रवार के दिन से शुरू होती है तो मां पालकी पर सवार होकर आती हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है। इसलिए माता रानी इस बार पालकी पर सवार होकर आने वाली हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि पालकी में सवार होकर आने का संकेत यह है कि इस बार उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इसका असर संपूर्ण विश्व पर पड़ेगा। देश-दुनिया महामारी और बीमारी की चपेट में आ सकती है। वहीं, इसे व्यापार, अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिए भी शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान माता रानी दुष्टों का नाश करती हैं और पाप कर्मों का दंड देती हैं। ऐसे में इस बार मां की स्तुति व भक्ति का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
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फिलहाल देवी मंदिरों व आश्रमों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के कालीवाह मंदिर, काली बाड़ी मंदिर, लखना का कालिका मंदिर, बलरई का ब्रह्माणी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों पर नवरात्रि के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
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- इस तरह तय होता है मां का वाहन
आचार्य पंडित कपिल देव त्रिपाठी ने बताया कि मां दुर्गा का वाहन सिंह यानी शेर माना जाता है। मां दुर्गा शेर पर ही सवार रहती हैं लेकिन जब मां नवरात्रि में पृथ्वीलोक पर आती हैं तब उनका वाहन बदल जाता है। मां के वाहन में बदलाव दिन के वार के हिसाब से होता है। जब नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार या शुक्रवार के दिन से शुरू होती है तो मां पालकी पर सवार होकर आती हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है। इसलिए माता रानी इस बार पालकी पर सवार होकर आने वाली हैं।