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इस चुप्पी का क्या मतलब है सरकार!

Fri, 24 Jul 2015 11:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Fri, 24 Jul 2015 11:12 PM IST
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This silence does not mean the government!

लायन सफारी में पांचवें शावक की भी मौत हो चुकी है। शुक्रवार को उसका शव जांच के लिए पशु अनुसंधान संस्थान बरेली भेजा गया।

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अमर उजाला ने सूत्रों के हवाले से गुरुवार को ही आशंका जाहिर कर दी थी कि आखिरी बचे शावक में भी किसी तरह की हरकत नहीं हो रही है। रहस्य गहराता जा रहा है कि आखिर पांच शावकों के जन्म और उनकी मौत की सूचना को शासन और उनके अफसर प्रदेश की जनता से छिपाए क्यों है? आखिर इसके पीछे मंशा क्या है?

लॉयन सफारी में ईद के दिन खुशी की जो लहर उठी थी, वह अब मातम में बदल गई है। जितना मातम गहराता जा रहा है उससे कहीं अधिक शावकों की मौत का रहस्य। करीब सप्ताह भर से शावकों के पैदा होने से लेकर उनकी मौत की खबरें सुर्खियां बन रही हैं लेकिन किसी भी अफसर ने जन्म पर न बधाई स्वीकारी और न मौत पर गम बांटा।
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जाहिर है कि शासन और उनके अफसरान मौन को ढाल बनाए हुए हैं। पर सवाल दर सवाल ये कि आखिर ऐसा क्यों? शावकों की मौत की सूचना छिपाने के पीछे शासन की मंशा क्या है? जो भी हो पर अब सूचना छिपाकर अखिलेश सरकार कटघरे में खड़ी हो चुकी है। इटावा लायन सफारी में अब तक सात शेरों की मौत हो चुकी है।
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फिलहाल लायन सफारी में हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। गेट पर मीडिया कर्मी भी सुबह, दोपहर, शाम डेरा डाले हुए हैं। कभी लायन सफारी की खूबियां बताने के लिए जिन मीडिया कर्मियों को न्योता दिया जाता था अब उनके प्रवेश पर भी पाबंदी लगा दी गई है।

अधिकारियों ने अब सिर्फ मौन ही नहीं साध रखा है, उन्होंने सारी ताकत खबरों को रोकने में भी लगा दी है। सफारी के अंदर काम कर रहे कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे मीडिया कर्मियों से बात न करें। मुख्य वन संरक्षक रूपक डे की मौजूदगी में ग्रीष्मा के तीन शावक की मौत के बाद से तो अफसरों के होश उड़े हुए हैं।

आम जनमानस के मन में भी तमाम शंकाएं कुलबुला रही हैं। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट लॉयन सफारी में हैदराबादी बब्बर शेरों की मौत से इतनी हलचल पैदा नहीं हुई थी, जितनी इन दिनों बनी हुई है। दरअसल सरकार की इस बेहद अहम योजना पर शावकों की मौत ने मानों विराम सा लगा दिया है।

सफारी प्रशासन उम्मीद तो यह लगाए हुए था कि जुलाई में होने वाले शावकों को कोर एरिया में छोड़कर जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लेंगे लेकिन हुआ इसके उलट, शावकों की मौत से इन उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

शावकों को बचाने में सफारी प्रशासन का जोर कितना रहा, यह तो साफ नहीं है लेकिन सफारी के अंदर की खबरों को रोकने के लिए उसने जो ताकत लगाई है, वह जगजाहिर है। अफसरों की इस कवायद का मकसद भी समझ से परे है। लोगों को सफारी के अंदर की सटीक जानकारी देने के बजाय सफारी प्रशासन इन्हें छिपाने में लगा रहा।


हर कर्मचारी और अधिकारी को सख्ती से इस पर अमल करने को कहा गया। सफारी के सूत्र अब अपने नाम का खुलासा न करने का आग्रह करने लगे हैं।

सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को भी मुख्य वन संरक्षक रूपक डे सफारी में मौजूद रहे। लॉयन सफारी से लगाव रखने वाले अभी भी उम्मीद लगाए हैं कि अफसर सफारी के अंदर घटने वाली घटनाओं का खुलासा करेंगे ताकि सही तथ्य उजागर होंगे। सभी को अफसरों के सामने आने का इंतजार है। मीडिया वाले भी सवालों का पुलिंदा लिए अफसरों के बोलने का इंतजार कर रहे हैं।

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