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Etawah News: नौकरी और लोन का झांसा देकर हथिया लेते थे जरूरतमंदों के दस्तावेज

Tue, 03 Feb 2026 11:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 11:49 PM IST
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They used to take away documents of the needy by promising them jobs and loans.
फोटो 39::::आरोपी अंकित जौहरी।
इटावा। नौकरी, लोन दिलाने और योजनाओं का लाभ देने के नाम पर आरोपी भोले-भाले लोगों के दस्तावेज ले लेते थे। उनके दस्तावेजों से फर्म बनाकर वह पूरा फर्जीवाड़ा करते थे। अभी तक पुलिस की जांच में प्रथम दृष्टया 50-60 फर्म फर्जी मिली हैं। जांच अभी जारी है।
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सीओ सिटी अभय नारायण राय ने बताया कि पुलिस पूछताछ एवं अब तक की विवेचना में पता चला है कि आरोपी अंकित जौहरी व तरुण अग्रवाल गहरे दोस्त हैं। यह दोनों मिलकर ही पूरे रैकेट को रास्ता दिखाते थे। दोनों के ही निर्देशन में फर्जी, कागजी जीएसटी फर्मों का निर्माण कराया जाता था। इन फर्मों के नाम से बिना किसी वास्तविक माल आपूर्ति के जीएसटीआर-1 में अधिक बिक्री दर्शाई जाती थी, जिससे अवैध रूप से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) जनरेट कर ली जाती थी। यह आईटीसी विभिन्न ठेकेदारों, व्यापारियों को पास-ऑन की जाती थी, जिसके एवज में आरोपी ढाई प्रतिशत तक कमीशन भी लेते थे।
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पुलिस पूछताछ में अंकित जौहरी ने स्वीकार किया कि वह चार्टर्ड अकाउंटेंट न होने के बावजूद अकाउंटिंग, ऑडिट, जीएसटी रजिस्ट्रेशन एवं रिटर्न फाइलिंग का कार्य करता था तथा सीए हस्ताक्षर की आवश्यकता होने पर अभियुक्त तरुण अग्रवाल की फर्म के नाम का उपयोग करता था। शिवा जौहरी, अंकित जौहरी, आसिफ खां, अभिषेक शाक्य व देवेश कार्यालय में जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3बी, अकाउंटिंग एवं बिल तैयार करने का कार्य करते थे। आरोपी अंकित जौहरी के खिलाफ जसवंतनगर, फ्रेंड्स कॉलोनी और शहर कोतवाली में तीन प्राथमिकी दर्ज हैं।
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एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अंकित जौहरी व तरुण अग्रवाल एक से अधिक ई-मेल आईडी बनाकर उनसे 50 से 60 जीएसटी रजिस्टर्ड फर्में बनाई हैं। इनमें जांच के पश्चात जीएसटी विभाग को भारी अनियमितताएं पाए जाने पर उन्हें निरस्त किया गया है।

एसएसपी ने बताया कि जीएसटी ट्रेल को जटिल बनाने के लिए अधिकतर फर्मों को देश के अलग-अलग राज्यों के पते पर फर्में खोलकर आईटीसी पास ऑन किया जाता है। ताकि साधारण जांच या विवेचना से इन्हें ट्रेस न किया जा सके।


सीए तरुन अग्रवाल और अंकित जौहरी अच्छे दोस्त हैं। इन दोनों ने कुछ समय पहले ही शहर से सटे कचौरा रोड पर एक सिने कांपलेक्स का संचालन शुरू किया था। यह दोनों के परिजनों के नाम से पंजीकृत है।



पुलिस की जांच में पता चला है कि अंकित एक विद्यालय का भी संचालन करता है। उसके विद्यालय में ही एक कार्यालय बना हुआ था, जिसमें सभी बैठकर फर्म से जुड़े काम और आपसी बैठकें करते थे। उधर, आरोपी आसिफ शहर के एक बड़े व्यवसायी के यहां एकाउंट का काम करता था। चूंकि सभी अकाउंट में बड़े मजबूत थे। ऐसे में आसानी से फर्जीवाड़ा कर लेते थे।
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