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फसल बचाने को अन्नदाता पर भारी पूस की रात
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इटावा/चकरनगर/ लवेदी। हाड़कंपाऊ पूस की सर्द रातों में भी किसान को अपने रातें खेत पर ही गुजारनी पड़ रहीं हैं। भीषण सर्दी में किसान पूरी-पूरी रात जागकर छुट्टा मवेशियों से अपने खेतों की रखवाली कर रहा है।
दिन में भी खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इतनी मेहनत के बाद भी कई बार छुट्टा मवेशी खेत पर एक साथ हमला बोलकर फसल को चौपट कर देते हैं। छुट्टा मवेशी किसानों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बने हुए हैं।
बसरेहर क्षेत्र के बुलाकीपुर निवासी रामनरेश महीनों से खेत पर डटे हुए हैं। पत्ता गोभी की फसल की रखवाली के लिए चौबीस घंटे खेत पर ही रहना पड़ता है। दूसरे किसानों ने भी खेतों पर डेरा डाला हुआ है।
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बुलाकी पुर तिराहे, बट्टा और बसरेहर ब्लॉक कार्यालय के पास बड़ी संख्या में गोवंश जमा रहते हैं। इन गोवंश को किसी गोशाला में जगह नहीं मिल पाई है। किसान राज नारायण, अजय कुमार, रामकेश यादव, यदुवीर सिंह का कहना है यहां पर गोवंश काफी समय से डेरा डाले हुए हैं।
क्षेत्र में चार गोशालाएं हैं, उनमें ही इन मवेशियों को पहुंचा दिया जाए, जिससे हमारी पसल बच सके। चकरनगर क्षेत्र में सैकड़ों आवारा पशु घूम रहे हैं। इस बीहड़ अंचल किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
अन्ना मवेशियों के अलावा नीलगाय और वनरोज भी उनकी फसलें चौपट कर रहे, जिससे किसान अपनी फसल बचाने के लिए खेतों में भीषण ठंड में भी ठिठुरता रहता है।
लखना-लवेदी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में किसान खेतों पर फसल की रखवाली कर रहे हैं। पूस महीने की ठंड में भी किसान खेतों की रखवाली के लिए कभी आग का सहारा लेते हैं, तो कभी एक रजाई के सहारे पेड़ के नीचे, तो कहीं खुले आसमान के नीचे ठिठुरने को मजबूर हैं।
लखना में हरी सब्जियों की फसल अधिक है, जबकि लवेदी क्षेत्र में हरी सब्जियां, गेहूं, बेझर, चना, मटर, सरसों की फसलें हैं। मामले में जिला पशु चिकित्साधिकारी अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि निराश्रित गोवंशीय पशुओं के लिए शीघ्र ही जगह का चयन सीडीओ, डीडीओ के स्तर पर वार्ता कर गोशाला खुलवाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे किसानों की फसलों का नुकसान रोका जा सके।
गोशालाओं में कम, सड़क पर ज्यादा गोवंश
जिताने गोवंश गोशालाओं में नहीं हैं, उससे अधिक गोवंश सड़कों पर आवारा घूम रहे हैं। यही गोवंश रात के समय खेतों पर झुंड के रूप में धावा बोलते हैं। चकरनगर क्षेत्र में सहसों, अनेठा, हरौली, नौगांवा, वरचौली की गोशालाओं में 450 पशु बंद हैं और हजारों सड़कों पर निराश्रित घूम रहे हैं।
बसरेहर ब्लाक में भी जितने मवेशी गोशालाओं में नहीं हैं, उससे अधिक सड़कों और खेतों पर डेला डाले हुए हैं। लवेदी और लखना क्षेत्र में गोशालाएं हैं ही नहीं, जिसके चलते सारे पशु छुट्टा घूम रहे हैं।
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दिन में भी खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इतनी मेहनत के बाद भी कई बार छुट्टा मवेशी खेत पर एक साथ हमला बोलकर फसल को चौपट कर देते हैं। छुट्टा मवेशी किसानों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बने हुए हैं।
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बसरेहर क्षेत्र के बुलाकीपुर निवासी रामनरेश महीनों से खेत पर डटे हुए हैं। पत्ता गोभी की फसल की रखवाली के लिए चौबीस घंटे खेत पर ही रहना पड़ता है। दूसरे किसानों ने भी खेतों पर डेरा डाला हुआ है।
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बुलाकी पुर तिराहे, बट्टा और बसरेहर ब्लॉक कार्यालय के पास बड़ी संख्या में गोवंश जमा रहते हैं। इन गोवंश को किसी गोशाला में जगह नहीं मिल पाई है। किसान राज नारायण, अजय कुमार, रामकेश यादव, यदुवीर सिंह का कहना है यहां पर गोवंश काफी समय से डेरा डाले हुए हैं।
क्षेत्र में चार गोशालाएं हैं, उनमें ही इन मवेशियों को पहुंचा दिया जाए, जिससे हमारी पसल बच सके। चकरनगर क्षेत्र में सैकड़ों आवारा पशु घूम रहे हैं। इस बीहड़ अंचल किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
अन्ना मवेशियों के अलावा नीलगाय और वनरोज भी उनकी फसलें चौपट कर रहे, जिससे किसान अपनी फसल बचाने के लिए खेतों में भीषण ठंड में भी ठिठुरता रहता है।
लखना-लवेदी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में किसान खेतों पर फसल की रखवाली कर रहे हैं। पूस महीने की ठंड में भी किसान खेतों की रखवाली के लिए कभी आग का सहारा लेते हैं, तो कभी एक रजाई के सहारे पेड़ के नीचे, तो कहीं खुले आसमान के नीचे ठिठुरने को मजबूर हैं।
लखना में हरी सब्जियों की फसल अधिक है, जबकि लवेदी क्षेत्र में हरी सब्जियां, गेहूं, बेझर, चना, मटर, सरसों की फसलें हैं। मामले में जिला पशु चिकित्साधिकारी अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि निराश्रित गोवंशीय पशुओं के लिए शीघ्र ही जगह का चयन सीडीओ, डीडीओ के स्तर पर वार्ता कर गोशाला खुलवाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे किसानों की फसलों का नुकसान रोका जा सके।
गोशालाओं में कम, सड़क पर ज्यादा गोवंश
जिताने गोवंश गोशालाओं में नहीं हैं, उससे अधिक गोवंश सड़कों पर आवारा घूम रहे हैं। यही गोवंश रात के समय खेतों पर झुंड के रूप में धावा बोलते हैं। चकरनगर क्षेत्र में सहसों, अनेठा, हरौली, नौगांवा, वरचौली की गोशालाओं में 450 पशु बंद हैं और हजारों सड़कों पर निराश्रित घूम रहे हैं।
बसरेहर ब्लाक में भी जितने मवेशी गोशालाओं में नहीं हैं, उससे अधिक सड़कों और खेतों पर डेला डाले हुए हैं। लवेदी और लखना क्षेत्र में गोशालाएं हैं ही नहीं, जिसके चलते सारे पशु छुट्टा घूम रहे हैं।