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इटावाः लॉकडाउन में बन गए चप्पल फैक्ट्री के मालिक
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बसरेहर। कोरोना की वजह से ज्यादातर परिवार रोजी रोटी के संकट से जूझ रहे हैं। वहीं बसरेहर ब्लॉक क्षेत्र के बनकटी खुर्द गांव के गजेंद्र कुमार अपनी मेहनत के बलबूते हवाई चप्पल फैक्ट्री के मालिक बन गए हैं। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा, बल्कि कई युवाओं को भी उन्होंने रोजगार दिया हुआ है।
गजेंद्र दिल्ली में एक हवाई चप्पल फैक्ट्री में काम करते थे। लॉकडाउन लागू हुआ तो वे परिवार समेत अपने गांव बनकटी खुर्द आ गए। उन्होंने हालात से समझौता करने की जगह मेहनत जोर दिया और खुद की चप्पल फैक्ट्री खड़ा कर ली। गांव के बाजार में उनकी हवाई चप्पल की अच्छी खासी मांग है। खास बात यह कि वह उन्होंने दो युवाओं को रोजगार भी दिया हुआ है।
गजेंद्र ने बताया कि दिल्ली से आने के बाद करीब एक महीने तक अपनी जमा पूंजी से गुजर बसर करते रहे। फिर किसी दोस्त ने हाथ से चलने वाली हवाई चप्पल बनाने की मशीन खरीदने की सलाह दी। उन्हें इसका अनुभव भी था। जो उनके काम आया। इस काम शुरू करने के लिए करीब 50-60 हजार रुपये की पूंजी लगानी थी। रिश्तेदारों और दोस्तों से रकम उधार ली। उसके बाद उनका कारोबार शुरू हो गया।
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हर रोज बना लेते हैं 300 जोड़ी चप्पल
गजेंद्र के अनुसार वह हर रोज करीब 300 जोड़ी चप्पल तैयार कर लेते हैं। अनलॉक होने से जल्द ही मांग के अनुरूप कच्चा माल भी मिलने लगेगा। इससे प्रोडक्शन में इजाफा होगा।
गुणवत्ता में कहीं कोई कमी नहीं
गजेंद्र का मानना है कि बाजार में वहीं माल टिक सकता है। जिसकी गुणवत्ता अच्छी हो वह किफायती भी हो। उनकी फैक्ट्री की चप्पल किसी ब्रांडेड कंपनी से कमतर नहीं होती है।
आसपास के छोटे बाजार में की खपत
गजेंद्र ने माल को बेचने के लिए किसी बड़े शहर में सप्लाई देने की बजाय गांव व कस्बों के छोटे हॉट बाजार का रुख किया। जिसका काफी फायदा हुआ।
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गजेंद्र दिल्ली में एक हवाई चप्पल फैक्ट्री में काम करते थे। लॉकडाउन लागू हुआ तो वे परिवार समेत अपने गांव बनकटी खुर्द आ गए। उन्होंने हालात से समझौता करने की जगह मेहनत जोर दिया और खुद की चप्पल फैक्ट्री खड़ा कर ली। गांव के बाजार में उनकी हवाई चप्पल की अच्छी खासी मांग है। खास बात यह कि वह उन्होंने दो युवाओं को रोजगार भी दिया हुआ है।
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गजेंद्र ने बताया कि दिल्ली से आने के बाद करीब एक महीने तक अपनी जमा पूंजी से गुजर बसर करते रहे। फिर किसी दोस्त ने हाथ से चलने वाली हवाई चप्पल बनाने की मशीन खरीदने की सलाह दी। उन्हें इसका अनुभव भी था। जो उनके काम आया। इस काम शुरू करने के लिए करीब 50-60 हजार रुपये की पूंजी लगानी थी। रिश्तेदारों और दोस्तों से रकम उधार ली। उसके बाद उनका कारोबार शुरू हो गया।
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हर रोज बना लेते हैं 300 जोड़ी चप्पल
गजेंद्र के अनुसार वह हर रोज करीब 300 जोड़ी चप्पल तैयार कर लेते हैं। अनलॉक होने से जल्द ही मांग के अनुरूप कच्चा माल भी मिलने लगेगा। इससे प्रोडक्शन में इजाफा होगा।
गुणवत्ता में कहीं कोई कमी नहीं
गजेंद्र का मानना है कि बाजार में वहीं माल टिक सकता है। जिसकी गुणवत्ता अच्छी हो वह किफायती भी हो। उनकी फैक्ट्री की चप्पल किसी ब्रांडेड कंपनी से कमतर नहीं होती है।
आसपास के छोटे बाजार में की खपत
गजेंद्र ने माल को बेचने के लिए किसी बड़े शहर में सप्लाई देने की बजाय गांव व कस्बों के छोटे हॉट बाजार का रुख किया। जिसका काफी फायदा हुआ।