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सोमवती अमावस्या पर भी नहीं हुयीं मंदिरों में पूजा
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सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है।
ऐसे में सावन के तीसरे सोमवार पर मंदिर बंद होने से लोगों ने घरों पर ही दीर्घायु कामना के लिए व्रत कर पूजन किया। साथ ही कुछ लोगों ने मौन व्रत रखकर पूजा अर्चना की।
वैसे तो सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। सावन के सोमवार को शिव पूजा का विशेष फल मिलता है।
कोरोना के कारण भक्तों ने तीसरे सोमवार को भी घर में भगवान शिव की पूजा की। इस बार सावन के तीसरे सोमवार पर सर्वाध सिद्धि योग में 43 साल बाद सोमवती अमावस्या का योग बना था।
कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर प्रबंधकों ने मंदिर में भक्तों के आने-जाने पर रोक लगाई गई है। ऐसे में सावन के तीसरे सोमवार पर भी लोगों ने घरों में विशेष पूजा अर्चना की। कुछ लोग मंदिर जरूर पहुंचे।
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शहर के टिक्सी मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर चौगुर्जी, ज्ञान मंदिर फ्रेंड्स कॉलोनी, द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर बंद रहे।
सावन की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। लोगों ने सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया।
पितरों के निमित्त तर्पण भी किया गया। तीसरा सोमवार होने के कारणा कई लोगों ने उपवास भी रखा। जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा देकर पीपल के वृक्ष की पूजा भी की। इस दिन पीपल, बरगद, केला, नींबू या तुलसी का पौधा लगाया जाता है।
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ऐसे में सावन के तीसरे सोमवार पर मंदिर बंद होने से लोगों ने घरों पर ही दीर्घायु कामना के लिए व्रत कर पूजन किया। साथ ही कुछ लोगों ने मौन व्रत रखकर पूजा अर्चना की।
वैसे तो सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। सावन के सोमवार को शिव पूजा का विशेष फल मिलता है।
कोरोना के कारण भक्तों ने तीसरे सोमवार को भी घर में भगवान शिव की पूजा की। इस बार सावन के तीसरे सोमवार पर सर्वाध सिद्धि योग में 43 साल बाद सोमवती अमावस्या का योग बना था।
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कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर प्रबंधकों ने मंदिर में भक्तों के आने-जाने पर रोक लगाई गई है। ऐसे में सावन के तीसरे सोमवार पर भी लोगों ने घरों में विशेष पूजा अर्चना की। कुछ लोग मंदिर जरूर पहुंचे।
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सावन की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। लोगों ने सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया।
पितरों के निमित्त तर्पण भी किया गया। तीसरा सोमवार होने के कारणा कई लोगों ने उपवास भी रखा। जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा देकर पीपल के वृक्ष की पूजा भी की। इस दिन पीपल, बरगद, केला, नींबू या तुलसी का पौधा लगाया जाता है।