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फाग व ढोलक की थाप सुन निकल आते हैं बिच्छू
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Tue, 22 Mar 2016 11:35 PM IST
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हाथ में बिच्छुओं को लिए सौंथना गांव के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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ऊसराहार (इटावा)। बात चौंकाने वाली जरूर है, पर सच है। ताखा क्षेत्र के गांव सौंथना में भैनसान देवी के टीला पर होली के दिन फाग गायन के दौरान ढोलक की थाप के साथ ही तमाम बिच्छू अपने बिलों से निकल आते हैं। खास बात यह है कि ये बिच्छू किसी को डंक नहीं मारते, गांव के लोग इन्हें अपनी हथेली पर रखकर ऐसे घूमते हैं, जैसे वे उनके दोस्त हों। हर साल होली के दिन बिच्छुओं के अपना स्वाभाव त्यागने की यह घटना अनूठी होने के साथ ही अबूझ पहेली भी बनी हुई है।
गांव निवासी शिक्षक कृष्ण प्रताप भदौरिया बताते हैं कि प्राचीन समय में इस टीले पर भैनसान देवी का प्रसिद्ध मंदिर हुआ करता था। भैंसे की बलि देने के कारण मंदिर का नाम भैनसान देवी पड़ा। रखरखाव के अभाव में मंदिर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। होली के दिन फाग गायन की परंपरा जमाने से चली आ रही है। फाग गायन के साथ ढोलक की थाप गूंजते ही खंडहर में बिलों में रहने वाले ढेरों बिच्छू बाहर निकल आते हैं, पर आज तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है।
ग्राम प्रधान उमाकांत शुक्ला के मुताबिक होली के दिन होने वाली यह घटना अपने आप में अनूठी है। लोगों को होली के त्योहार का इंतजार रहता है। इस दिन बड़ी संख्या ग्रामीण टीले पर फाग गायन के दौरान जुटते हैं और इस घटना के साक्षी बनते हैं। वहीं, गांव वाले कहते हैं कि वैसे तो बिच्छू को देखते ही रूह कांप जाती है, लेकिन जब यहीं बिच्छू दोस्ताना अंदाज में पेश आएं तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है।
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गांव निवासी शिक्षक कृष्ण प्रताप भदौरिया बताते हैं कि प्राचीन समय में इस टीले पर भैनसान देवी का प्रसिद्ध मंदिर हुआ करता था। भैंसे की बलि देने के कारण मंदिर का नाम भैनसान देवी पड़ा। रखरखाव के अभाव में मंदिर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। होली के दिन फाग गायन की परंपरा जमाने से चली आ रही है। फाग गायन के साथ ढोलक की थाप गूंजते ही खंडहर में बिलों में रहने वाले ढेरों बिच्छू बाहर निकल आते हैं, पर आज तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है।
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ग्राम प्रधान उमाकांत शुक्ला के मुताबिक होली के दिन होने वाली यह घटना अपने आप में अनूठी है। लोगों को होली के त्योहार का इंतजार रहता है। इस दिन बड़ी संख्या ग्रामीण टीले पर फाग गायन के दौरान जुटते हैं और इस घटना के साक्षी बनते हैं। वहीं, गांव वाले कहते हैं कि वैसे तो बिच्छू को देखते ही रूह कांप जाती है, लेकिन जब यहीं बिच्छू दोस्ताना अंदाज में पेश आएं तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है।
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