{"_id":"618d597a5ce6922a9a00a4b5","slug":"riverside-funerals-etawah-news-knp6633869145","type":"story","status":"publish","title_hn":"नदियों के किनारे अंत्येष्टि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नदियों के किनारे अंत्येष्टि
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चकरनगर। नदियों को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए सरकार ने नदियों से लगे किनारों पर लाखों रुपये खर्च कर अंत्येष्टि स्थलों की स्थापना करवाई। अंत्येष्टि संस्कार स्थलों को निर्माण के बाद से अनदेखा कर दिया गया।
ग्राम पंचायत स्तर पर बने दाह संस्कार स्थल को आने वालों के लिए सभी प्रकार की सुविधा युक्त होने के बावजूद भी इनका सदुपयोग नहीं हो पा रहा और आज भी लोग नदियों किनारे अंत्येष्टि कर रहे हैं।
सरकार ने नहाने-धोने के लिए बाथरूम, छांव में बैठकर संस्कार करने की संपूर्ण व्यवस्था है। अंत्येष्टि स्थल की देखभाल करने वालों के ठहराव के लिए भवन की भी व्यवस्था है।
विज्ञापन
दुर्भाग्य की बात यह है पैसा खर्च होने के बावजूद भी नदियों के किनारे शवों का दाह संस्कार होने से जलीय प्रदूषण बढ़ रहा है। जहां एक ओर सरकार है नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए तमाम एनजीओ व सरकारी महकमा मुस्तैद कर रखा है।
वहीं, नदियों के किनारे हो रहे दाह संस्कारों को रोकने के लिए कोई भी जहमत नहीं उठाता, जिससे की अंत्येष्टि स्थलों का सदुपयोग हो सके। नदियों को प्रदूषण मुक्त करने में एक ठोस कदम आगे बढ़ाया सके।
सेंचुअरी वन क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला बताते हैं कि यह प्रथा जरूर है कि नदियों के किनारे दैविक काल से ही दाह संस्कार होते रहे हैं। ग्रामीणों को जागरूक होना चाहिए। नदियों को प्रदूषित करने के साथ-साथ दुर्लभ जलीय जीवों को भी हानि पहुंचती है।
नदियों के किनारे किसी भी प्रकार का दाह संस्कार करने पर सरकार ने रोक लगा रखी है। पकड़े जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। क्षेत्रीय लोगों से अपील है कि वह है नदियों के किनारों पर बने शवदाह गृहों में अंतिम संस्कार कराएं, जिससे प्रदूषण से भी बचा जा सके।
खंड विकास अधिकारी चकरनगर सतीश चंद्र पांडे ने बताया कि विकास क्षेत्र में तीन डिभोली, अनेठा, सिंडोस में अंत्येष्टि स्थल स्थापित हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर 15 लाख रुपये की लागत से निर्माण करवाए गए हैं। जिनका उद्देश्य है कि ग्रामीण नदियों में दाह संस्कार क्रिया पर रोक लगाना है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायत स्तर पर बने दाह संस्कार स्थल को आने वालों के लिए सभी प्रकार की सुविधा युक्त होने के बावजूद भी इनका सदुपयोग नहीं हो पा रहा और आज भी लोग नदियों किनारे अंत्येष्टि कर रहे हैं।
विज्ञापन
सरकार ने नहाने-धोने के लिए बाथरूम, छांव में बैठकर संस्कार करने की संपूर्ण व्यवस्था है। अंत्येष्टि स्थल की देखभाल करने वालों के ठहराव के लिए भवन की भी व्यवस्था है।
विज्ञापन
दुर्भाग्य की बात यह है पैसा खर्च होने के बावजूद भी नदियों के किनारे शवों का दाह संस्कार होने से जलीय प्रदूषण बढ़ रहा है। जहां एक ओर सरकार है नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए तमाम एनजीओ व सरकारी महकमा मुस्तैद कर रखा है।
वहीं, नदियों के किनारे हो रहे दाह संस्कारों को रोकने के लिए कोई भी जहमत नहीं उठाता, जिससे की अंत्येष्टि स्थलों का सदुपयोग हो सके। नदियों को प्रदूषण मुक्त करने में एक ठोस कदम आगे बढ़ाया सके।
सेंचुअरी वन क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला बताते हैं कि यह प्रथा जरूर है कि नदियों के किनारे दैविक काल से ही दाह संस्कार होते रहे हैं। ग्रामीणों को जागरूक होना चाहिए। नदियों को प्रदूषित करने के साथ-साथ दुर्लभ जलीय जीवों को भी हानि पहुंचती है।
नदियों के किनारे किसी भी प्रकार का दाह संस्कार करने पर सरकार ने रोक लगा रखी है। पकड़े जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। क्षेत्रीय लोगों से अपील है कि वह है नदियों के किनारों पर बने शवदाह गृहों में अंतिम संस्कार कराएं, जिससे प्रदूषण से भी बचा जा सके।
खंड विकास अधिकारी चकरनगर सतीश चंद्र पांडे ने बताया कि विकास क्षेत्र में तीन डिभोली, अनेठा, सिंडोस में अंत्येष्टि स्थल स्थापित हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर 15 लाख रुपये की लागत से निर्माण करवाए गए हैं। जिनका उद्देश्य है कि ग्रामीण नदियों में दाह संस्कार क्रिया पर रोक लगाना है।