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राम-रावण युद्ध देख लोग रोमांचित
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जसवंतनगर। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रामलीला में कुंभकरण, मेघनाथ, दुर्मुख और अतिकाय सहित रावण दल के अनेक योद्धा मारे गए। नागपाश की लीला काफी मनोरंजक रही। सड़कों पर युद्ध लीला देखने के लिए भारी भीड़ जुटी। रावण दल ने सड़कों पर खूब कोड़े बरसाए और लोगों से उठक बैठक भी लगवाई।
दोपहर लगभग एक बजे रावण दल के लोग श्रीराम से युद्ध करने के लिए रामलीला मैदान स्थित दशानन सैन्य छावनी से निकले। रथों पर सवार होकर बड़ा चौराहा, छोटा चौराहा से होते हुए केला गमा देवी मंदिर पहुंचे।
वहां पर देवी को प्रसन्न करने के लिए हवन पूजन किया। इसके बाद लोहा मंडी, जैन बाजार होते हुए मोहल्ला कटरा पुख्ता स्थित भगवान नरसिंह मंदिर पहुंचे। जहां से राम-लक्ष्मण व उनके दल के साथ सड़कों पर युद्ध लीला की शुरुआत हुई।
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कटरा बुलाकीदास, बड़ा चौराहा, नगर पालिका, कोतवाली होते हुए वापस रामलीला मैदान में दोनों दल युद्ध करते हुए पहुंचे। मार्ग में दोनों ओर से सैकड़ों की संख्या में तीर छोड़े गए और तलवारबाजी का प्रदर्शन किया गया। सड़कों पर इस लीला को देखने के लिए सड़कें व घरों की बालकनी तक में लोग मौजूद थे।
सबसे पहले कुंभकरण का वध दिखाया गया। इसके बाद मेघनाथ, राम-लक्ष्मण से युद्ध करने के लिए पहुंचता है। दोनों ही ओर से घमासान युद्ध होता है। इसके बाद मेघनाथ पूरे राम दल को नागपाश में बांध देता है। फिर युद्ध होता है, जिसमें लक्ष्मण के हाथों मेघनाथ मारा जाता है।
सती सुलोचना की लीला भी दर्शाई गई। इससे पूर्व श्रीराम के हाथों अतिकाय तथा दुर्मुख भी युद्ध के बाद मारे जाते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार सिंह भी लीला देखने पहुंचे।
वहां भीड़ देखकर रामलीला समिति के अनुरोध पर उन्होंने डेढ़ सेक्शन पीएसी, बड़ी संख्या में पुलिस बल व महिला सिपाही तैनात किए। सड़कों पर युद्ध करते समय शिवांश मिश्रा, शिवम गुप्ता ने मेघनाथ और श्रेयांश मिश्र व मनी गुप्ता ने कुंभकरण की भूमिका निभाई।
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दोपहर लगभग एक बजे रावण दल के लोग श्रीराम से युद्ध करने के लिए रामलीला मैदान स्थित दशानन सैन्य छावनी से निकले। रथों पर सवार होकर बड़ा चौराहा, छोटा चौराहा से होते हुए केला गमा देवी मंदिर पहुंचे।
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वहां पर देवी को प्रसन्न करने के लिए हवन पूजन किया। इसके बाद लोहा मंडी, जैन बाजार होते हुए मोहल्ला कटरा पुख्ता स्थित भगवान नरसिंह मंदिर पहुंचे। जहां से राम-लक्ष्मण व उनके दल के साथ सड़कों पर युद्ध लीला की शुरुआत हुई।
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कटरा बुलाकीदास, बड़ा चौराहा, नगर पालिका, कोतवाली होते हुए वापस रामलीला मैदान में दोनों दल युद्ध करते हुए पहुंचे। मार्ग में दोनों ओर से सैकड़ों की संख्या में तीर छोड़े गए और तलवारबाजी का प्रदर्शन किया गया। सड़कों पर इस लीला को देखने के लिए सड़कें व घरों की बालकनी तक में लोग मौजूद थे।
सबसे पहले कुंभकरण का वध दिखाया गया। इसके बाद मेघनाथ, राम-लक्ष्मण से युद्ध करने के लिए पहुंचता है। दोनों ही ओर से घमासान युद्ध होता है। इसके बाद मेघनाथ पूरे राम दल को नागपाश में बांध देता है। फिर युद्ध होता है, जिसमें लक्ष्मण के हाथों मेघनाथ मारा जाता है।
सती सुलोचना की लीला भी दर्शाई गई। इससे पूर्व श्रीराम के हाथों अतिकाय तथा दुर्मुख भी युद्ध के बाद मारे जाते हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार सिंह भी लीला देखने पहुंचे।
वहां भीड़ देखकर रामलीला समिति के अनुरोध पर उन्होंने डेढ़ सेक्शन पीएसी, बड़ी संख्या में पुलिस बल व महिला सिपाही तैनात किए। सड़कों पर युद्ध करते समय शिवांश मिश्रा, शिवम गुप्ता ने मेघनाथ और श्रेयांश मिश्र व मनी गुप्ता ने कुंभकरण की भूमिका निभाई।