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लाइन में लगने वालों को हर हाल में मिले कैश
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Tue, 15 Nov 2016 11:29 PM IST
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इकदिल में एसबीआई शाखा पर लगा ताला, बाहर खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
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पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने की वजह से बैंकों में सुबह से लाइन लग रही है, लेकिन कैश नहीं होने की वजह से ज्यादातर लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। इन ग्राहकों का कहना था कि लाइन लगाने का समय निर्धारित होना चाहिए। यह भी तय हो कि कितने लोगों को कैश दिया जाएगा। इससे निर्धारित संख्या के बाद लोग लाइन नहीं लगाएंगे। अमर उजाला ने मंगलवार कई गांवों में जाकर पड़ताल की। इस दौरान कहीं नगदी की किल्लत तो कहीं सर्वर फेल होने की समस्या मिली। लोगों ने बताया कि दिनभर लाइन में लगे होने के बाद घर लौटना पड़ा।
लंबी कतार, नहीं सुन रहे सरकार
निबाड़ीकलां कस्बा स्थित पूर्वांचल बैंक में सुबह 10 बजे लोगों की लंबी कतार दिखी। गांव के राम सनेही आदि ने बताया कि वह सुबह 7 बजे के आए हैं, जिससे जल्दी नंबर आए। लाइन में ज्यादातर लोग किसान और रोज कमाने खाने वाले है। निर्धारित समय पर बैंक खुली तो लोगों के चेहरे भी खिले। मगर यह क्या, जल्द ही बैंक के अंदर से खबर आई कि आज कैश नहीं है। इसलिए नोटों की बदली नहीं हो सकेगी। कुछ देर पहले जिन चेहरों पर खुशी के भाव थे, वह मायूस हो गए। कई लोगों ने दूसरे बैंक जाकर नोट बदलने का मन बना लिया।
तमाम इस उम्मीद में खड़े रहे कि शायद करेंसी आ जाए। अमर उजाला टीम ने शाम 4 बजे दोबारा जाकर माहौल देखा तो बैंक के बाहर लोग मौजूद मिले। नोट एक्सचेंज नहीं हो रहे थे। जमा करने वाले मौजूद थे। लोगों ने बताया कि पूरा दिन गुजर गया। करेंसी नहीं आई। शाम को मायूसी के साथ घर लौटे। इस बारे में बैंक मैनेजर केके तिवारी ने बताया कैश न होने की वजह से एक्सचेंज का काम नहीं हो सका। चौकी प्रभारी मनोज परमार व्यवस्था बनाने में जुटे रहे। इकदिल एसबीआई शाखा पर लोग सुबह से ही जम गए। यह शाखा करीब 10 मिनट देरी से खुली, फिर कामकाज शुरू हुआ।
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पैसा देने का समय तय हो
सुबह करीब साढ़े 11 बजे कस्बा अहेरीपुर स्थित सेंट्रल बैंक में कतार में लगे लोग परेशान है। लाइन में लगे जगमोहनपुर, वीरपुर, निवाड़ीखुर्द, सलेमपुर, नगरिया, मुकटपुर आदि गांव के लोगों ने बताया बैंक वाले सर्वर फेल बता रहे हैं। इस बैंक का यही हाल रहता है। आए दिन सर्वर फेल हो जाता है। मंगलवार को इस बैंक से भी कोई लेनदेन संभव नहीं हो सका। न नोट बदले गए और न ही खातों में रकम जमा हो सकी। यहीं हाल अहेरीपुर उप डाकघर का रहा। पूरे दिन नगदी की अदला बदली नहीं हुई। डाकघर बाबू सुरेश यादव ने बताया उन्हें अब तक दो बार कैश मिला है। जो बांटा जा चुका है। अब डाकघर में कोई कैश नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की कि कैश देने का समय तय हो।
गेट तक पहुंचता हूं तो नकदी खत्म हो जाती है
लवेदी कस्बा स्थित स्टेट बैंक में दोपहर करीब एक बजे जबरदस्त भीड़ दिखी। एक मात्र काउंटर होने से कतार में लगे लोग परेशान हैं। कतार में लगे मनोज कुमार नोट बंदी पर एकदम भड़क उठे। बोले चार दिन से आ रहा हूं। जब तक गेट तक आ पाता हूं। नगदी खत्म हो जाती है। बैरंग लौटना पड़ रहा है। गरीब तबका परेशान है। कतार में कुछ आगे लगे लवेदी के ही निशक्त राजवीर चौबे के चेहरे पर कोई मलाल नहीं दिखा।
बोले हम तो विकलांग हैं। फिर भी लाइन में लगे हैं। इसी तरह चंदपुरा की शोभा दीक्षित ने अपनी पीड़ा बताई। कहा चार दिन से प्रयास हो रहे हैं। गेट तक पहुंचते हैं और बैंक बंद हो जाता है। नवादा के दरबारीलाल ने बताया कि मजदूरी करते हैं। पत्नी बीमार है और दवाई तक के लिए पैसे नहीं हैं। सिर्फ 500 को नोट बदलाने आए हैं। देखते हैं कि नंबर आ पाता है या नहीं। बहादुरपुर की सावित्री देवी ने बताया वह पहले अपने गांव में बैंक गई थी। वहां नोट न बदल पाने से यहां आई हूं। उसे अपनी भैंस के लिए दाना व चारा लेना है।
एक दुल्हन भी अपनी बारी का इंतजार करती रही
भरथना कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में स्थित स्टेट बैंक में काफी लंबी लाइन है। दोपहर लंच से पहले भीड़ अपने चरम पर मिली। महिलाओं की लाइन में एक दुल्हन भी अपनी बारी का इंतजार कर रही है। हाथों में मेहंदी व कंगन बांधे और काली शॉल से खुद को ढांके हुए है। नगला छोला निवासी उक्त युवती ने बताया कि फिरोजाबाद से उसकी बारात आनी है। घर में हलवाई लग चुका है। रुपयों की जरूरत है। दो-तीन दिन से उसके पिता बैंक में लाइन लगा रहे हैं। भीड़ की वजह से न तो नोट बदल नहीं पाए। इसलिए आज उसे अपनी चाची के साथ खुद यहां आना पड़ा है।
दोबारा नोट बदलने वालों की होगी पहचान
इटावा। बैंकों व पोस्ट ऑफिस में नोट बदलने वालों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है। मंगलवार को सुबह सात बजे से ही लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। दिन में कई बार नोट बदलने वालों की पहचान करने के लिए पोस्ट आफिस में एक साफ्टवेयर लगाया गया है। जिससे नोट बदलने वालों की पहचान हो सकेगी। मुख्य डाकघर के पोस्ट मास्टर प्रभात मिश्रा ने बताया एक साफ्टवेयर बनाया गया है। जिसे सर्वर से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति एक बार नोट बदल ले गया और अपनी आईडी से दोबारा नोट बदलने आएगा तो सर्वर पर वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा। इससे बार बार लाइन में लगने वाले की पहचान करने में आसानी हो जाएगी। इस साफ्टवेयर के लगने से रोजाना लाइन में लग कर नोट बदलने वालों से राहत मिलेगी।
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लंबी कतार, नहीं सुन रहे सरकार
निबाड़ीकलां कस्बा स्थित पूर्वांचल बैंक में सुबह 10 बजे लोगों की लंबी कतार दिखी। गांव के राम सनेही आदि ने बताया कि वह सुबह 7 बजे के आए हैं, जिससे जल्दी नंबर आए। लाइन में ज्यादातर लोग किसान और रोज कमाने खाने वाले है। निर्धारित समय पर बैंक खुली तो लोगों के चेहरे भी खिले। मगर यह क्या, जल्द ही बैंक के अंदर से खबर आई कि आज कैश नहीं है। इसलिए नोटों की बदली नहीं हो सकेगी। कुछ देर पहले जिन चेहरों पर खुशी के भाव थे, वह मायूस हो गए। कई लोगों ने दूसरे बैंक जाकर नोट बदलने का मन बना लिया।
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तमाम इस उम्मीद में खड़े रहे कि शायद करेंसी आ जाए। अमर उजाला टीम ने शाम 4 बजे दोबारा जाकर माहौल देखा तो बैंक के बाहर लोग मौजूद मिले। नोट एक्सचेंज नहीं हो रहे थे। जमा करने वाले मौजूद थे। लोगों ने बताया कि पूरा दिन गुजर गया। करेंसी नहीं आई। शाम को मायूसी के साथ घर लौटे। इस बारे में बैंक मैनेजर केके तिवारी ने बताया कैश न होने की वजह से एक्सचेंज का काम नहीं हो सका। चौकी प्रभारी मनोज परमार व्यवस्था बनाने में जुटे रहे। इकदिल एसबीआई शाखा पर लोग सुबह से ही जम गए। यह शाखा करीब 10 मिनट देरी से खुली, फिर कामकाज शुरू हुआ।
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पैसा देने का समय तय हो
सुबह करीब साढ़े 11 बजे कस्बा अहेरीपुर स्थित सेंट्रल बैंक में कतार में लगे लोग परेशान है। लाइन में लगे जगमोहनपुर, वीरपुर, निवाड़ीखुर्द, सलेमपुर, नगरिया, मुकटपुर आदि गांव के लोगों ने बताया बैंक वाले सर्वर फेल बता रहे हैं। इस बैंक का यही हाल रहता है। आए दिन सर्वर फेल हो जाता है। मंगलवार को इस बैंक से भी कोई लेनदेन संभव नहीं हो सका। न नोट बदले गए और न ही खातों में रकम जमा हो सकी। यहीं हाल अहेरीपुर उप डाकघर का रहा। पूरे दिन नगदी की अदला बदली नहीं हुई। डाकघर बाबू सुरेश यादव ने बताया उन्हें अब तक दो बार कैश मिला है। जो बांटा जा चुका है। अब डाकघर में कोई कैश नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की कि कैश देने का समय तय हो।
गेट तक पहुंचता हूं तो नकदी खत्म हो जाती है
लवेदी कस्बा स्थित स्टेट बैंक में दोपहर करीब एक बजे जबरदस्त भीड़ दिखी। एक मात्र काउंटर होने से कतार में लगे लोग परेशान हैं। कतार में लगे मनोज कुमार नोट बंदी पर एकदम भड़क उठे। बोले चार दिन से आ रहा हूं। जब तक गेट तक आ पाता हूं। नगदी खत्म हो जाती है। बैरंग लौटना पड़ रहा है। गरीब तबका परेशान है। कतार में कुछ आगे लगे लवेदी के ही निशक्त राजवीर चौबे के चेहरे पर कोई मलाल नहीं दिखा।
बोले हम तो विकलांग हैं। फिर भी लाइन में लगे हैं। इसी तरह चंदपुरा की शोभा दीक्षित ने अपनी पीड़ा बताई। कहा चार दिन से प्रयास हो रहे हैं। गेट तक पहुंचते हैं और बैंक बंद हो जाता है। नवादा के दरबारीलाल ने बताया कि मजदूरी करते हैं। पत्नी बीमार है और दवाई तक के लिए पैसे नहीं हैं। सिर्फ 500 को नोट बदलाने आए हैं। देखते हैं कि नंबर आ पाता है या नहीं। बहादुरपुर की सावित्री देवी ने बताया वह पहले अपने गांव में बैंक गई थी। वहां नोट न बदल पाने से यहां आई हूं। उसे अपनी भैंस के लिए दाना व चारा लेना है।
एक दुल्हन भी अपनी बारी का इंतजार करती रही
भरथना कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में स्थित स्टेट बैंक में काफी लंबी लाइन है। दोपहर लंच से पहले भीड़ अपने चरम पर मिली। महिलाओं की लाइन में एक दुल्हन भी अपनी बारी का इंतजार कर रही है। हाथों में मेहंदी व कंगन बांधे और काली शॉल से खुद को ढांके हुए है। नगला छोला निवासी उक्त युवती ने बताया कि फिरोजाबाद से उसकी बारात आनी है। घर में हलवाई लग चुका है। रुपयों की जरूरत है। दो-तीन दिन से उसके पिता बैंक में लाइन लगा रहे हैं। भीड़ की वजह से न तो नोट बदल नहीं पाए। इसलिए आज उसे अपनी चाची के साथ खुद यहां आना पड़ा है।
दोबारा नोट बदलने वालों की होगी पहचान
इटावा। बैंकों व पोस्ट ऑफिस में नोट बदलने वालों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है। मंगलवार को सुबह सात बजे से ही लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। दिन में कई बार नोट बदलने वालों की पहचान करने के लिए पोस्ट आफिस में एक साफ्टवेयर लगाया गया है। जिससे नोट बदलने वालों की पहचान हो सकेगी। मुख्य डाकघर के पोस्ट मास्टर प्रभात मिश्रा ने बताया एक साफ्टवेयर बनाया गया है। जिसे सर्वर से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति एक बार नोट बदल ले गया और अपनी आईडी से दोबारा नोट बदलने आएगा तो सर्वर पर वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा। इससे बार बार लाइन में लगने वाले की पहचान करने में आसानी हो जाएगी। इस साफ्टवेयर के लगने से रोजाना लाइन में लग कर नोट बदलने वालों से राहत मिलेगी।