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Etawah News: किराये से भी सस्ता आलू, कोल्ड स्टोर में किसानों के अरमान ठंडे
Thu, 15 Oct 2026 11:30 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:30 PM IST
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फोटो 15::जिला उद्यान कार्यालय में आलू अनुदान योजना की जानकारी करने आए किसान। संवाद
इटावा। आलू की गिरती कीमतों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि कोल्ड स्टोर से आलू निकालने में भी किसानों को घाटा नजर आ रहा है। जिले के 58 कोल्ड स्टोरों में इस बार 6,13,696 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ था, लेकिन अब तक 50 फीसदी आलू की ही निकासी हो सकी है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 60 फीसदी से अधिक आलू निकल चुका था। अब 31 अक्तूबर तक निकासी के लिए महज 15 दिन बचे हैं, लेकिन किसान आलू निकालने में रुचि नहीं ले रहे हैं। किराया भी न निकलने से किसानों के अरमान कोल्ड स्टोर में ठंडे हो गए।
आलू की कीमत और भंडारण किराये के बीच का अंतर किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। एक क्विंटल आलू कोल्ड स्टोर में रखने का किराया करीब 250 से 280 रुपये है, जबकि बाजार में इसका भाव 200 से 240 रुपये प्रति क्विंटल तक ही मिल रहा है। ऐसे में आलू निकालकर बेचने पर भी किसान को किराये की रकम तक पूरी नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि कई किसानों ने अपनी उपज को कोल्ड स्टोर में ही छोड़ दिया है।
आलू की निकासी धीमी होने से कोल्ड स्टोर संचालक भी परेशान हैं। स्थिति यह है कि कई जगह संचालक किराये की रकम के बदले ही आलू लेने या बेचने को तैयार हैं। बाजार में आलू का भाव भंडारण खर्च से भी कम होने के कारण किसानों के सामने उपज निकालने और उसे कोल्ड स्टोर में छोड़ने, दोनों ही स्थितियों में नुकसान है। निकासी की अंतिम तिथि नजदीक आने के बावजूद कीमतों में सुधार नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
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बटाईदार किसानों नहीं ले पा रहे अनुदान योजना का लाभ
आलू भंडारण शुल्क अनुदान योजना का लाभ जिले के बड़ी संख्या में किसान नहीं उठा पा रहे हैं। योजना में निजी खेतों पर आलू पैदावार करने वाले किसानों को ही पात्र माना गया है, जबकि जिले में 50 फीसदी से अधिक किसान बटाई पर जमीन लेकर आलू की खेती करते हैं। योजना के तहत किसानों को निजी कोल्ड स्टोर में आलू भंडारण करने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सहायता दी जाती है। एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक अनुदान मिल सकता है। जिले में अब तक केवल 270 किसानों को करीब 30 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर निर्धारित है। इसके बावजूद पात्रता संबंधी शर्तों के कारण बड़ी संख्या में किसान योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। किसानों की मांग है कि पात्रता की शर्तों को व्यावहारिक बनाया जाए और आवेदन प्रक्रिया सरल की जाए। अनुदान के लिए किसानों को उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के पोर्टल potato.uphorticulture.in पर पंजीकरण कराना होगा। आवेदन के लिए खसरा-खतौनी, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और बैंक पासबुक या निरस्त चेक की प्रति जरूरी है। तकनीकी समस्या या जानकारी के लिए जिला उद्यान कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
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बाजार ने उम्मीदों पर फेरा पानी
ग्राम चमरपुर निवासी किसान राजेश ने बताया कि उन्होंने 27 बीघा से अधिक रकबे में आलू की बोआई की थी। आलू को कोल्ड स्टोर में भी रख दिया, भाव की स्थितियों को देखते हुए समझ नहीं आ रहा है क्या किया जाए। इस बार बाजार ने आलू किसानों की उम्मीदों पर पानी ही फेर दिया है।
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शुरुआत से ही कीमतों में नहीं दिखा इजाफा
ग्राम इंद्रापुर निवासी विनोद कुमार दुबे ने बताया कि इस बार शुरू से ही आलू की कीमतों में इजाफा देखने को नहीं मिला। बीच में कुछ दिनों तक लगा कि अक्तूबर में आलू की कीमतों में इजाफा हो सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीते कई साल बाद आलू की यह दुर्दशा हुई है।
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आलू अनुदान योजना के तहत लगातार किसानों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को आलू की निकासी के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए हर दिन बड़ी संख्या में किसान कार्यालय में भी अभिलेखों का सत्यापन करवाने पहुंच रहे हैं।
- श्याम सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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आलू की कीमत और भंडारण किराये के बीच का अंतर किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। एक क्विंटल आलू कोल्ड स्टोर में रखने का किराया करीब 250 से 280 रुपये है, जबकि बाजार में इसका भाव 200 से 240 रुपये प्रति क्विंटल तक ही मिल रहा है। ऐसे में आलू निकालकर बेचने पर भी किसान को किराये की रकम तक पूरी नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि कई किसानों ने अपनी उपज को कोल्ड स्टोर में ही छोड़ दिया है।
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आलू की निकासी धीमी होने से कोल्ड स्टोर संचालक भी परेशान हैं। स्थिति यह है कि कई जगह संचालक किराये की रकम के बदले ही आलू लेने या बेचने को तैयार हैं। बाजार में आलू का भाव भंडारण खर्च से भी कम होने के कारण किसानों के सामने उपज निकालने और उसे कोल्ड स्टोर में छोड़ने, दोनों ही स्थितियों में नुकसान है। निकासी की अंतिम तिथि नजदीक आने के बावजूद कीमतों में सुधार नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
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बटाईदार किसानों नहीं ले पा रहे अनुदान योजना का लाभ
आलू भंडारण शुल्क अनुदान योजना का लाभ जिले के बड़ी संख्या में किसान नहीं उठा पा रहे हैं। योजना में निजी खेतों पर आलू पैदावार करने वाले किसानों को ही पात्र माना गया है, जबकि जिले में 50 फीसदी से अधिक किसान बटाई पर जमीन लेकर आलू की खेती करते हैं। योजना के तहत किसानों को निजी कोल्ड स्टोर में आलू भंडारण करने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सहायता दी जाती है। एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक अनुदान मिल सकता है। जिले में अब तक केवल 270 किसानों को करीब 30 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर निर्धारित है। इसके बावजूद पात्रता संबंधी शर्तों के कारण बड़ी संख्या में किसान योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। किसानों की मांग है कि पात्रता की शर्तों को व्यावहारिक बनाया जाए और आवेदन प्रक्रिया सरल की जाए। अनुदान के लिए किसानों को उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के पोर्टल potato.uphorticulture.in पर पंजीकरण कराना होगा। आवेदन के लिए खसरा-खतौनी, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और बैंक पासबुक या निरस्त चेक की प्रति जरूरी है। तकनीकी समस्या या जानकारी के लिए जिला उद्यान कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
बाजार ने उम्मीदों पर फेरा पानी
ग्राम चमरपुर निवासी किसान राजेश ने बताया कि उन्होंने 27 बीघा से अधिक रकबे में आलू की बोआई की थी। आलू को कोल्ड स्टोर में भी रख दिया, भाव की स्थितियों को देखते हुए समझ नहीं आ रहा है क्या किया जाए। इस बार बाजार ने आलू किसानों की उम्मीदों पर पानी ही फेर दिया है।
शुरुआत से ही कीमतों में नहीं दिखा इजाफा
ग्राम इंद्रापुर निवासी विनोद कुमार दुबे ने बताया कि इस बार शुरू से ही आलू की कीमतों में इजाफा देखने को नहीं मिला। बीच में कुछ दिनों तक लगा कि अक्तूबर में आलू की कीमतों में इजाफा हो सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीते कई साल बाद आलू की यह दुर्दशा हुई है।
आलू अनुदान योजना के तहत लगातार किसानों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को आलू की निकासी के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए हर दिन बड़ी संख्या में किसान कार्यालय में भी अभिलेखों का सत्यापन करवाने पहुंच रहे हैं।
- श्याम सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

फोटो 15::जिला उद्यान कार्यालय में आलू अनुदान योजना की जानकारी करने आए किसान। संवाद

फोटो 15::जिला उद्यान कार्यालय में आलू अनुदान योजना की जानकारी करने आए किसान। संवाद

फोटो 15::जिला उद्यान कार्यालय में आलू अनुदान योजना की जानकारी करने आए किसान। संवाद