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पराली जलाई तो सम्मान निधि नहीं
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इटावा। अगर आपने पराली को खेत पर जलाया तो किसान सम्मान निधि से वंचित होना पड़ेगा। पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए अबकी कृषि विभाग ने सख्त फरमान जारी किया है।
फरमान में साफ कहा गया कि अगर किसी भी किसान ने खेत पर पराली जलाई तो उसको सम्मान निधि से वंचित कर दिया जाएगा। किसान सम्मान निधि की किस्त दिसंबर में किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
यदि उनका नाम पराली जलाने वालों की सूची मेें आया तो खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं होगा। उधर, इसे कानून का खौफ कहें या या जागरुकता इस साल पराली जलाने की घटनाओं में लगभग 50 फीसदी की कमी आई है।
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कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल पराली जलाने के 43 मामले दर्ज किए गए थे। इस साल सितंबर-अक्तूबर के महीने में कृषि विभाग, स्काउट गाइड सहित अन्य कई विभागों ने मिलकर पूरे जिले में किसानों को पराली जलाने के नुकसान गिनाए।
कानून का डर भी दिखाया। इसका असर अब देखने को मिला। इस साल अभी तक पराली जलाने की केवल 22 घटनाएं दर्ज की गई।
पराली जलाने के नुकसान
किसान पराली बिल्कुल न जलाएं। एक टन धान के फसल अवशेष जलाने से तीन किलो कणिका तत्व, 60 किलो कार्बन मोनो आक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाई आक्साइड, 199 किलो राख एवं दो किलो सल्फर डाई आक्साइड अवमुक्त होता है।
इन गैसों के कारण सामान्य वायु की गुणवत्ता में कमी आती है, जिससे आंखों में जलन एवं त्वचा रोग तथा सूक्ष्म कणों के कारण जीर्ण हृदय एवं फेफड़े की बीमारी के रूप में मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 5.5 किलो पोटैशियम आक्साइड, 1.2 किलो सल्फर, धान द्वारा शोषित 50-70 प्रतिशत सूक्ष्म पोषक तत्व एवं 400 किलो कार्बन की क्षति होती है।
पोषक तत्वों के नष्ट होने के अतिरिक्त मिट्टी के कुछ गुण जैसे भूमि तापमान, पीएच नमी उपलब्ध फास्फोरस एवं जैविक पदार्थ भी अत्यधिक प्रभावित होते हैं। साथ ही मृदा में उपलब्ध लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
पराली प्रबंधन अपनाएं किसान
पराली प्रबंध के अंतर्गत सुपर एसएमएम लगे कंबाइन हार्वेस्टर से ही धान की मड़ाई करें। पराली प्रबंधन वाले यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर, रिवर्सेवल एमबी प्लाऊ, श्रब मास्टर आदि का ही प्रयोग करें।
पराली से कंपोस्ट खाद बनाने के लिए राजकीय बीज भंडार पर निशुल्क बेस्ट डिकंपोजर प्राप्त कर सकते हैं।
पराली गोशाला भेजें, भाड़ा देगी सरकार
किसान अपनी पराली को निकटतम गोशाला में भी भेज सकते हैं। जिसकी ढुलाई का खर्च मनरेगा या वित्त आयोग से वहन करेगा। व्यक्तिगत तौर पर दो ट्राली पराली गोशाला ले जाने पर एक ट्राली खाद गोशाला से प्राप्त कर सकते है।
जुर्माने का भी है प्रावधान
राष्ट्रीय हरित अधिकरण की धारा 24 एवं 26 के अनुसार एक एकड़ तक पराली जलाने पर 2500 रुपये, एक से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र की पराली जलाने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना का प्राविधान है।
साथ ही जो किसान धान पराली जलाएंगे उनकी पीएम सम्मान निधि बंद की जा सकती है।
-अभिनंदन सिंह, उप कृषि निदेशक, इटावा
गोशालाओं में भेजी गई पराली
महेवा। ब्लॉक क्षेत्र के कई ग्रामों में कृषि विभाग ने पराली न जलाने को लेकर जहां अभियान चलाया है, वहीं, खेतों से पराली भरवाकर गोशालाओं में भी पहुंचाई जा रही है।
पराली एकत्रित करने व तथा खेतों में ही नष्ट करने की मशीनें भी दी गईं हैं। सहायक विकास अधिकारी कृषि राजेश चौबे द्वारा शुक्रवार की सुबह ही हर्राजपुर, लुधियानी, भरईपुर आदि ग्रामों में अभियान चलाकर खेतों से पराली उठवाकर गोशालाओं में पहुंचाई गई।
इस मौके पर प्रधान प्रतिनिधि रजनीश शर्मा, तकनीकी सहायक हरि योगेंद्र आदि मौजूद रहे।
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फरमान में साफ कहा गया कि अगर किसी भी किसान ने खेत पर पराली जलाई तो उसको सम्मान निधि से वंचित कर दिया जाएगा। किसान सम्मान निधि की किस्त दिसंबर में किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
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यदि उनका नाम पराली जलाने वालों की सूची मेें आया तो खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं होगा। उधर, इसे कानून का खौफ कहें या या जागरुकता इस साल पराली जलाने की घटनाओं में लगभग 50 फीसदी की कमी आई है।
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कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल पराली जलाने के 43 मामले दर्ज किए गए थे। इस साल सितंबर-अक्तूबर के महीने में कृषि विभाग, स्काउट गाइड सहित अन्य कई विभागों ने मिलकर पूरे जिले में किसानों को पराली जलाने के नुकसान गिनाए।
कानून का डर भी दिखाया। इसका असर अब देखने को मिला। इस साल अभी तक पराली जलाने की केवल 22 घटनाएं दर्ज की गई।
पराली जलाने के नुकसान
किसान पराली बिल्कुल न जलाएं। एक टन धान के फसल अवशेष जलाने से तीन किलो कणिका तत्व, 60 किलो कार्बन मोनो आक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाई आक्साइड, 199 किलो राख एवं दो किलो सल्फर डाई आक्साइड अवमुक्त होता है।
इन गैसों के कारण सामान्य वायु की गुणवत्ता में कमी आती है, जिससे आंखों में जलन एवं त्वचा रोग तथा सूक्ष्म कणों के कारण जीर्ण हृदय एवं फेफड़े की बीमारी के रूप में मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 5.5 किलो पोटैशियम आक्साइड, 1.2 किलो सल्फर, धान द्वारा शोषित 50-70 प्रतिशत सूक्ष्म पोषक तत्व एवं 400 किलो कार्बन की क्षति होती है।
पोषक तत्वों के नष्ट होने के अतिरिक्त मिट्टी के कुछ गुण जैसे भूमि तापमान, पीएच नमी उपलब्ध फास्फोरस एवं जैविक पदार्थ भी अत्यधिक प्रभावित होते हैं। साथ ही मृदा में उपलब्ध लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
पराली प्रबंधन अपनाएं किसान
पराली प्रबंध के अंतर्गत सुपर एसएमएम लगे कंबाइन हार्वेस्टर से ही धान की मड़ाई करें। पराली प्रबंधन वाले यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर, रिवर्सेवल एमबी प्लाऊ, श्रब मास्टर आदि का ही प्रयोग करें।
पराली से कंपोस्ट खाद बनाने के लिए राजकीय बीज भंडार पर निशुल्क बेस्ट डिकंपोजर प्राप्त कर सकते हैं।
पराली गोशाला भेजें, भाड़ा देगी सरकार
किसान अपनी पराली को निकटतम गोशाला में भी भेज सकते हैं। जिसकी ढुलाई का खर्च मनरेगा या वित्त आयोग से वहन करेगा। व्यक्तिगत तौर पर दो ट्राली पराली गोशाला ले जाने पर एक ट्राली खाद गोशाला से प्राप्त कर सकते है।
जुर्माने का भी है प्रावधान
राष्ट्रीय हरित अधिकरण की धारा 24 एवं 26 के अनुसार एक एकड़ तक पराली जलाने पर 2500 रुपये, एक से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र की पराली जलाने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना का प्राविधान है।
साथ ही जो किसान धान पराली जलाएंगे उनकी पीएम सम्मान निधि बंद की जा सकती है।
-अभिनंदन सिंह, उप कृषि निदेशक, इटावा
गोशालाओं में भेजी गई पराली
महेवा। ब्लॉक क्षेत्र के कई ग्रामों में कृषि विभाग ने पराली न जलाने को लेकर जहां अभियान चलाया है, वहीं, खेतों से पराली भरवाकर गोशालाओं में भी पहुंचाई जा रही है।
पराली एकत्रित करने व तथा खेतों में ही नष्ट करने की मशीनें भी दी गईं हैं। सहायक विकास अधिकारी कृषि राजेश चौबे द्वारा शुक्रवार की सुबह ही हर्राजपुर, लुधियानी, भरईपुर आदि ग्रामों में अभियान चलाकर खेतों से पराली उठवाकर गोशालाओं में पहुंचाई गई।
इस मौके पर प्रधान प्रतिनिधि रजनीश शर्मा, तकनीकी सहायक हरि योगेंद्र आदि मौजूद रहे।