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पापा मरूंगा या मार कर आऊंगा, पीठ नहीं दिखाऊंगा

Mon, 03 Oct 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
अमर उजाला ब्यूरो इटावा Updated Mon, 03 Oct 2016 11:43 PM IST
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papa i will kill terrorist but never show my back
बारामुला में शहीद हुए नितिन यादव का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

पापा पीठ दिखाकर नहीं आऊंगा, बल्कि आतंकियों को मार कर आऊंगा। आप चिंता न करें। अपना ख्याल रखें। यहां तनाव तो हैं, लेकिन हर जवान, एक- दूसरे का पूरा सहयोग करता है। यह कहना था बारामूला में शहीद होने वाले नितिन यादव का। वह शनिवार को मोबाइल पर अपने पिता बलवीर सिंह से बातचीत किए थे। पिता ने भी अपना ख्यान रखने को कहा था। उसे उम्मीद थी कि सीमा पर मोर्चा लेने के बाद बेटा घर आएगा और फिर वह पूरे परिवार के साथ जश्न मनाएंगे, लेकिन सोमवार शाम उनके शहीद होने की सूचना ने सारे सपनों पर पानी फेर दिया।

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चौबिया थाना क्षेत्र के नगला बरी निवासी बलवीर सिंह के  दो बेटे व एक बेटी है। बड़ा बेटा सचिन उनके साथ खेती बाड़ी करता है तो बेटी की शादी हो चुकी है। इसके बाद छोटा बेटा नितिन बीएसएफ में भर्ती हो गया तो परिवार में खुशियां छा गई। बलवीर भी खुश थे कि उनकी मेहनत सफल हो गई। वह जल्दी-जल्दी नितिन की शादी भी करना चाहते थे, लेकिन वह छुट्टी न मिलने का बहाना बनाकर दो साल से टाल रहा था। इस साल शादी को राजी हो गया था। सीमा पर तनाव बढ़ा तो बलवीर ने उसे मैसेज भेजा कि जब भी फुर्सत मिला करें, वह बात कर लें। नितिन ने पिता के आदेश का पालन किया। उसे जब भी मौका मिलता वह मोबाइल से घर बात जरूर करता। शनिवार को भी उसने बात की थी। पिता ने सावधानी बरतने को कहा तो उसने अपने बहादुर बेटे पर भरोसा रखने को कहा था। सोमवार को जब उसके शहीद होने की सूचना घर पहुंची तो पिता अपने बेटे की एक-एक शब्दों को याद करके बिलखने लगे। बलवीर सिंह और उनकी पत्नी ऊषा ऊषा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में सबसे छोटा होने के कारण नितिन सबके लाडले थे।
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जो भी सुना शहीद के घर दौड़ पड़ा  
बारामुला में रविवार रात हुए आतंकवादी हमले में नितिन यादव के शहीद होने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग उसके घर की ओर दौड़ पड़े। हर कोई शहीद के परिजनों को ढंाढस बंधाता रहा। इस दौरान पूरा गांव शोक में डूब गया। कोई नितिन के बचपन की बात करता तो कोई उसके पढ़ाई के दिनों की। हर कोई उसकी सादगी और सक्रियता का बखान करते हुए एक-दूसरे को ढांढस बंधाता रहा। नितिन की मां ऊषा देवी बेटे की तस्वीर देखकर बार-बार बेहोश हो जा रही है। भाई सचिन गांव में पिता के साथ खेतीबाड़ी करता है।
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अब आर या पार की लड़ाई हो
इटावा। देश में जम्मू कश्मीर क्षेत्र में बार-बार हो रहे आतंकवादी हमलों से आजिज नगला बरी गांव के लोगों का कहना है कि अब आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए। शहीद नितिन के यहां शोक प्रकट करने आए लोगों में पाकिस्तान के प्रति काफी रोष दिखा। ग्रामीणों का कहना था कि आखिर कब तक सरकार सैनिकों की शहादत कराती रहेगी। एक बार पाकिस्तान को सबक सिखा देना चाहिए।

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