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अब शिक्षकों को नहीं करनी पड़ेगी जनगणना
Sat, 19 Jan 2019 10:34 PM IST
gaurav gaurav
इटावा
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Published by: gaurav gaurav
Updated Sat, 19 Jan 2019 10:34 PM IST
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Assam panchayat election
- फोटो : social media
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अब परिषदीय शिक्षकों को आर्थिक जनगणना नहीं करनी पड़ेगी। इसी माह से शुरू होने वाली सातवीं जनगणना के लिए कॉमन सर्विस सेंटर के ऑपरेटरों की ड्यूटी लगाई जा रही है। सांख्यिकी मंत्रालय ने इस संबंध में सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड से करार किया है।
2011 की आर्थिक जनगणना विभिन्न योजनाओं का आधार है। हर दस साल बाद नई गणना होती है। इस लिहाज से 2021 के लिए आर्थिक जनगणना की शुरुआत हो रही है। पिछली बार आर्थिक जनगणना में परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई थी।
इस बार यह काम सीएससी के जरिए नियुक्त होने वाले ऑपरेटर करेंगे। जिले में इस समय करीब तीन लाख परिवार और आबादी करीब 17 लाख है। कुल 471 ग्राम पंचायतों में सीएससी के 806 केंद्र हैं। आर्थिक जनगणना के लिए हर एक सीएससी पर एक सुपरवाइजर और पांच ऑपरेटर रखे जाएंगे।
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इस तरह कुल करीब चार हजार ऑपरेटर जिले में सर्वे करेंगे। इसी माह से यह प्रक्रिया शुरू होगी। ऑपरेटर मोबाइल एप के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति से जुड़ा डाटा एकत्रित करेंगे। सर्वे छह माह में पूरा किया जाएगा।
आर्थिक जनगणना सर्वे में मोबाइल एप का अहम रोल रहेगा। इस एप को चलाने के लिए ऑपरेटरों को ट्रेंड किया जाएगा। एप की खासियत यह होगी कि इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। ऑपरेटर जिस घर पर जाएगा। उसकी जियो टैगिंग करेगा। साथ ही डाटा अपलोड में देरी नहीं होगी। इसी वजह से सर्वे कार्य महज छह महीने में पूरा हो जाएगा।
परिवार की आर्थिक स्थिति का होगा आकलन ऑपरेटर परिवार की आर्थिक स्थिति जानने के लिए कई सवाल करेंगे। परिवार के सदस्यों की उम्र, उनकी शैक्षिक योग्यता, इनकम और उसका स्रोत, नौकरी है या नहीं आदि जानकारी जुटाएंगे।
इस सर्वे कार्य से जुड़े ऑपरेटर हर रोज कम से कम 500 रुपये कमाएंगे। जानकारी के अनुसार ऑपरेटर को प्रति परिवार 20 रुपये मिलेंगे। एक दिन में करीब 25 परिवारों का सर्वे करने पर वह हर रोज 500 रुपये कमा सकेंगे।
साल 2011 की आर्थिक जनगणना के अनुसार जिले में कुल दो लाख 77 हजार 527 परिवार और 15 लाख 81 हजार 810 की आबादी थी। इसमें 8 लाख 45 हजार 856 पुरुष व 7 लाख 35 हजार 954 महिलाएं रही हैं। आबादी अब बढ़कर करीब 17 लाख हो चुकी है।
सीएससी के जिला प्रबंधक आकाश सोनी ने बताया कि तीन दिन में सीएससी के पोर्टल पर ऑफीसिएट सर्विसेज की सूची में आर्थिक जनगणना भी जुड़ जाएगी। इसके बाद प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सीएससी संचालक ही सुपरवाइजर होंगे। यह सुपरवाइजर ही पांच ऑपरेटर रखेंगे। जिनकी न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट होगी। सुपरवाइजर संबंधित क्षेत्र के ही रखे जाएंगे। 20 रुपये प्रति परिवार के हिसाब से ऑपरेटर को भुगतान होगा। हालांकि अभी इसके आदेश आना बाकी हैं।
आर्थिक जनगणना ता सर्वे कार्य इस बार सीएससी एजेंसी करेगी। इसलिए सर्वे कार्य में सहायक अध्यापक नहीं लगाए जाएंगे। इसी महीने में सर्वे कार्य शुरू हो जाएगा। - दीपांशु, ई-डिस्ट्रिक्ट
सरकार ने सहायक अध्यापकों की जगह सीएससी के माध्यम से आर्थिक जनगणना सर्वे कराने का सही निर्णय लिया है। सरकार यदि मिड डे मील से भी प्रधानाध्यापक को अलग कर दे तो विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था में काफी सुधार हो सकता है। - विनोद यादव, जिलाध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ, इटावा
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2011 की आर्थिक जनगणना विभिन्न योजनाओं का आधार है। हर दस साल बाद नई गणना होती है। इस लिहाज से 2021 के लिए आर्थिक जनगणना की शुरुआत हो रही है। पिछली बार आर्थिक जनगणना में परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई थी।
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इस बार यह काम सीएससी के जरिए नियुक्त होने वाले ऑपरेटर करेंगे। जिले में इस समय करीब तीन लाख परिवार और आबादी करीब 17 लाख है। कुल 471 ग्राम पंचायतों में सीएससी के 806 केंद्र हैं। आर्थिक जनगणना के लिए हर एक सीएससी पर एक सुपरवाइजर और पांच ऑपरेटर रखे जाएंगे।
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इस तरह कुल करीब चार हजार ऑपरेटर जिले में सर्वे करेंगे। इसी माह से यह प्रक्रिया शुरू होगी। ऑपरेटर मोबाइल एप के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति से जुड़ा डाटा एकत्रित करेंगे। सर्वे छह माह में पूरा किया जाएगा।
आर्थिक जनगणना सर्वे में मोबाइल एप का अहम रोल रहेगा। इस एप को चलाने के लिए ऑपरेटरों को ट्रेंड किया जाएगा। एप की खासियत यह होगी कि इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। ऑपरेटर जिस घर पर जाएगा। उसकी जियो टैगिंग करेगा। साथ ही डाटा अपलोड में देरी नहीं होगी। इसी वजह से सर्वे कार्य महज छह महीने में पूरा हो जाएगा।
परिवार की आर्थिक स्थिति का होगा आकलन ऑपरेटर परिवार की आर्थिक स्थिति जानने के लिए कई सवाल करेंगे। परिवार के सदस्यों की उम्र, उनकी शैक्षिक योग्यता, इनकम और उसका स्रोत, नौकरी है या नहीं आदि जानकारी जुटाएंगे।
इस सर्वे कार्य से जुड़े ऑपरेटर हर रोज कम से कम 500 रुपये कमाएंगे। जानकारी के अनुसार ऑपरेटर को प्रति परिवार 20 रुपये मिलेंगे। एक दिन में करीब 25 परिवारों का सर्वे करने पर वह हर रोज 500 रुपये कमा सकेंगे।
साल 2011 की आर्थिक जनगणना के अनुसार जिले में कुल दो लाख 77 हजार 527 परिवार और 15 लाख 81 हजार 810 की आबादी थी। इसमें 8 लाख 45 हजार 856 पुरुष व 7 लाख 35 हजार 954 महिलाएं रही हैं। आबादी अब बढ़कर करीब 17 लाख हो चुकी है।
सीएससी के जिला प्रबंधक आकाश सोनी ने बताया कि तीन दिन में सीएससी के पोर्टल पर ऑफीसिएट सर्विसेज की सूची में आर्थिक जनगणना भी जुड़ जाएगी। इसके बाद प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सीएससी संचालक ही सुपरवाइजर होंगे। यह सुपरवाइजर ही पांच ऑपरेटर रखेंगे। जिनकी न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट होगी। सुपरवाइजर संबंधित क्षेत्र के ही रखे जाएंगे। 20 रुपये प्रति परिवार के हिसाब से ऑपरेटर को भुगतान होगा। हालांकि अभी इसके आदेश आना बाकी हैं।
आर्थिक जनगणना ता सर्वे कार्य इस बार सीएससी एजेंसी करेगी। इसलिए सर्वे कार्य में सहायक अध्यापक नहीं लगाए जाएंगे। इसी महीने में सर्वे कार्य शुरू हो जाएगा। - दीपांशु, ई-डिस्ट्रिक्ट
सरकार ने सहायक अध्यापकों की जगह सीएससी के माध्यम से आर्थिक जनगणना सर्वे कराने का सही निर्णय लिया है। सरकार यदि मिड डे मील से भी प्रधानाध्यापक को अलग कर दे तो विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था में काफी सुधार हो सकता है। - विनोद यादव, जिलाध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ, इटावा