फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   no check up in government hospital

सरकारी अस्पतालों में जांच नहीं, कैसे मिलें डेंगू के मरीज

Mon, 17 Oct 2022 12:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 17 Oct 2022 12:19 AM IST
विज्ञापन
no check up in government hospital
इटावा। जिले में बढ़ते डेंगू के मामले को लेकर केंद्रीय टीम के आने की चर्चा के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। इसके बाद भी रोजाना जिला अस्पताल में इसके मरीज सामने आ रहे हैं। हाल ये है कि अभी तक रैपिड किट से हुई जांच में 52 रोगी मिल चुके हैं, लेकिन विभाग एलाइजा जांच में सिर्फ सात ही मरीज मिलने की बात कह रहा है। वास्तविकता ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में कहीं जांच के इंतजाम ही नहीं हैं। ऐसे में वहां सिर्फ खानापूरी की जा रही है। सरसईनावर सीएचसी में रैपिड किट नहीं हैं, जबकि बसरेहर, उदी, जसवंतनगर, भरथना समेत सभी सीएचसी में सात से लेकर 20 जांच करने तक का दावा किया जा रहा है।
विज्ञापन

सरसईनावर सीएचसी में जांच की मशीन नहीं
ताखा। सीएचसी सरसईनावर में प्रतिदिन 70 से 80 मरीज ओपीडी में दिखाने आते हैं। एक सप्ताह में 549 मरीज दिखाने आए। इनमें से अधिकांश बुखार, खांसी, जुकाम और शरीर दर्द से पीड़ित थे। इसके बावजूद सीएचसी में डेंगू की जांच के कोई इंतजाम नहीं हैं। रैपिड किट मिली नहीं हैं। पांच एलाइजा किटें मिली हैं, पर इनसे जांच के लिए मशीन नहीं है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. उदय प्रताप ने बताया कि डेंगू की जांच सीएचसी पर उपलब्ध नहीं है। सीएमओ से मशीन की मांग की गई है। (संवाद)
विज्ञापन

बसरेहर में एक सप्ताह के अंदर सिर्फ छह जांचें
बसरेहर। सीएचसी में सौ से सवा सौ मरीज प्रतिदिन ओपीडी में दिखाने आते हैं। इनमें से भी अधिकांश मरीज डेंगू, मलेरिया और वायरल के लक्षण वाले होते हैं। इसके बावजूद यहां जांचें नाम मात्र के लिए की जा रही हैं। एक सप्ताह में करीब एक हजार मरीज दिखाने आए। इनमें से 400 मरीज बुखार, खांसी के थे, फिर भी सिर्फ छह ही जांचें कराई गईं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास सचान ने बताया कि डेंगू की जांच के लिए रैपिड किट हैं। लक्षण दिखने पर जांच कराई जाती है। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

एक सप्ताह में आए 800 मरीज, जांचें सिर्फ 20
भरथना। सीएचसी में प्रतिदिन 100 से 125 मरीज ओपीडी में आते हैं। एक सप्ताह में करीब 800 मरीज आए। इनमें से लगभग 400 मरीज बुखार, खांसी, जुकाम के थे। इसके बावजूद सिर्फ 20 जांचें ही रैपिड किट से की गईं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमित दीक्षित ने बताया कि रैपिड किटें मिली हैं। उनसे ही लक्षण वाले मरीजों की जांच कर रहे हैं। उधर, सीएचसी राजपुरा में भी 10-11 जांचें होती हैं। सीएचसी अधीक्षक अजय विक्रम ने बताया कि अभी तक कोई मरीज पॉजिटिव नहीं मिला है। (संवाद)
50 बेड के दो अस्पताल, दोनों में सुविधा नहीं
बकेवर। जिले में एक अस्पताल शहर तो दूसरा 50 बेड का अस्पताल कस्बे में बना है। यहां डेेंगू की जांच का कोई इंतजाम नहीं है। कस्बे के मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट लैब जाना पड़ रहा है। मरीज 20 किलोमीटर दूर शहर तक दौड़ लगाने को मजबूर हैं। प्रभारी डॉ. संदीप ने बताया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों की खून की जांच शुरू कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सीएमओ को पत्र भेजा गया है। उधर, ग्राम नौधना निवासी जितेंद्र ने बताया कि एक सप्ताह पहले बदन दर्द होने के साथ बुखार आ गया था। 50 बेड के अस्पताल में दिखाने गए तो डॉक्टरों ने जांच न होने की बात कहते हुए दवाइयां देने की बात कही। इस पर प्राइवेट लैब से जांच कराई है। (संवाद)

लक्षण वाले सभी मरीजों की डेंगू की जांच करने के आदेश दिए गए हैं, जिन अस्पतालों में जांच के इंतजाम नहीं हैं। वहां व्यवस्था कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. गीताराम, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed