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न डॉक्टर ने ढंग से देखा, न मिला ऑक्सीजन, मरीज ने दम तोड़ा

Fri, 14 May 2021 11:52 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 May 2021 11:52 PM IST
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Neither the doctor looked properly, nor did he get oxygen, the patient succumbed
इटावा। जिला अस्पताल परिसर स्थित कोविड अस्पताल लाए गए मरीज को डॉक्टर ने देखे बिना सैफई ले जाने की सलाह दे दी। तीमारदारों ने प्राथमिक उपचार के लिए मिन्नतें कीं लेकिन डॉक्टर ने सुनवाई नहीं की। मरीज को खुद बेड पर लिटाकर तीमारदार तीसरी मंजिल से ऑक्सीजन कंसंट्रटेर लेकर आया लेकिन तब तक मरीज ने दम तोड़ दिया। कोरोना जैसे लक्षण होने के बावजूद कोरोना की जांच नहीं की गई। तीमारदारों ने शव को पैक किया। शव गांव ले जाने के लिए वाहन भी सवा घंटे बाद मुहैया कराया गया।
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शुक्रवार की दोपहर 12:45 बजे अमर उजाला की टीम जिला अस्पताल में बने कोविड अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में पहुंची। बेड पर एक मरीज मृत पड़ा था। पास खड़े फर्दपुर चौबिया निवासी बॉबी ने मृतक का नाम बदले सिंह (72) बताया। बॉबी ने कहा कि निसंतान पड़ोसी बदले की पत्नी रामदेवी की काफी पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पड़ोसी देखभाल के साथ उनके भोजन आदि की व्यवस्था करते थे। शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे बदले सिंह की तबियत बिगड़ गई। बॉबी एक पड़ोसी के साथ निजी वाहन से उन्हें कोविड अस्पताल लेकर पहुंचे।
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बॉबी का आरोप है कि गेट में घुसते ही एक डॉक्टर ने कहा कि यहां बेड और ऑक्सीजन नहीं है, मरीज को सैफई ले जाओ। बॉबी ने डॉक्टर से प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन लगाने की मिन्नत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बॉबी ने मरीज को एक बेड पर लिटा दिया और ऑक्सीजन सिलिंडर न मिलने पर तीसरी मंजिल से ऑक्सीजन कंसंट्रटेर लेकर आए। इसमें करीब एक घंटा लग गया। इस बीच बदले सिंह की मौत हो गई।
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बॉबी ने खुद ही स्ट्रेचर पर शव रखा अस्पताल में ही एक कोने में खड़ा कर दिया। डॉक्टरों व कर्मचारियों से कहा कि बदले सिंह का कोई नहीं है, मानवता के चलते उन्हें अस्पताल लेकर आए थे। शव को पैक करा दीजिए। बाबी का आरोप है कि डॉक्टर ने कवर देकर कहा कि थोड़ी मानवता और दिखाओ। कर्मचारी नहीं नजर आ रहे तुम लोग खुद ही शव को पैक कर लो। बॉबी साथी के साथ शव को पैक किया।
शव को यमुना घाट पर ले जाने के लिए बॉबी ने अस्पताल के बाहर दीवार पर चस्पा कागज पर लिखे नंबर पर एंबुलेंस चालक को फोन किया। एंबुलेंस वाले ने कहा कि अस्पताल उसके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है। दूसरे एंबुलेंस वाले को फोन मिलाओ। दूसरे एंबुलेंस चालक का फोन रिसीव नहीं हुआ। मामला एसडीएम सदर तक पहुंचने के बाद दोपहर पौने तीन बजे सरकारी शव वाहन अस्पताल पहुंचा। उसमें बॉबी व साथी शव को गांव लेकर चले गए। एसडीएम सिद्धार्थ ने कहा कि कोविड अस्पताल में व्यवस्था की जिम्मेदारी एसडीएम जसवंतनगर नंदराम मौर्या, तहसीलदार एन राम व सीएमओ डॉ. भगवान दास को सौंपी गई है। तीनों अधिकारी इस पर नजर रख रहे हैं।
वर्जन
मरीज की हालत गंभीर थी, इसलिए उसे सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय ले जाने की सलाह दी गई थी। तीमारदार जिला अस्पताल के कोविड अस्पताल में भर्ती करने की जिद कर रहे थे। परिजनों की जिद के कारण मरीज की मौत हो गई। अशोक कुमार, सीएमएस महिला अस्पताल

एसडीएम सदर ने किया एनाउंसमेंट
एसडीएम सदर सिद्धार्थ दोपहर में अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी में लगे लाउडस्पीकर माध्यम से एनाउंस किया कि तीमारदार अस्पताल के भीतर से बाहर आ जाएं, वरना उनके खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। कोविड अस्पताल के भीतर रहने से तीमारदार भी संक्रमित हो सकते हैं। इससे उन्हें व उनके परिवार की जान को खतरा हो सकता है। कोविड प्रोटोकाल का पालन करें।
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