{"_id":"696140a5910a8a74580338d5","slug":"names-of-others-are-mentioned-in-consolidation-forms-and-no-one-has-half-the-land-etawah-news-c-216-1-etw1012-136058-2026-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: चकबंदी प्रपत्रों में चढ़े दूसरों के नाम तो किसी में आधी जमीन नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: चकबंदी प्रपत्रों में चढ़े दूसरों के नाम तो किसी में आधी जमीन नहीं
विज्ञापन
लवेदी। कस्बा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नवादा खुर्द-कला में चकबंदी एक्ट की धारा 23 के तहत चार दिन में 2200 प्रपत्रों में से लगभग 1500 प्रपत्रों का वितरण किया गया। किसानों का आरोप है कि ज्यादातर प्रपत्रों में गड़बड़ी आ रही है। कहीं उनके प्रपत्रों में दूसरों के नाम शामिल कर दिए गए हैं तो फिर कहीं उनकी कुछ जमीन प्रपत्र में शामिल नहीं की गई है। वह कहीं और जोड़ दी गई है जिससे उसका पता ही नहीं चल रहा है।
नगला तिवारी निवासी किसान ओम प्रकाश को जब प्रपत्र मिला तो उनके दो भाइयों के नाम के अलावा नवादा गांव के दो अन्य लोगों के नाम उसमें अंकित दिखाई दिए जबकि उनका जमीन से कोई लेना देना नहीं है। हरिनारायण पुर निवासी सुमित ने बताया कि पहले उनके तीन चक होते थे, लेकिन इस बार प्रपत्र में केवल दो चक ही शामिल हैं।
उनकी 28 डिसमिल जमीन का हिस्सा कहीं और खाते में चला गया है, जिसका पता नहीं चल रहा है। नवादा खुर्द-कलां निवासी बाबूराम ने कहा कि उन्होंने सात वर्ष पहले गोविंद सिंह से एक बीघा दो डिसमिल जमीन का बैनामा कराया था जो प्रपत्र में दर्ज नहीं है। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि बैनामे का दाखिला-खारिज नहीं कराए जाने से ये स्थिति आना सम्भव है।
विज्ञापन
प्रपत्र लेने आए ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोई भी प्रपत्र पूरी तरह सही नहीं है। इससे कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगेंगे और जमीन बंटवारे पर विवाद बढ़ेंगे। कुछ ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि प्रपत्रों की संख्या अधिक होने पर इन्हें एक-एक मजरा और गांव में वितरित करना चाहिए था, ताकि चार दिनों तक पंचायत घर पर समय न बर्बाद होता।
विज्ञापन
नगला तिवारी निवासी किसान ओम प्रकाश को जब प्रपत्र मिला तो उनके दो भाइयों के नाम के अलावा नवादा गांव के दो अन्य लोगों के नाम उसमें अंकित दिखाई दिए जबकि उनका जमीन से कोई लेना देना नहीं है। हरिनारायण पुर निवासी सुमित ने बताया कि पहले उनके तीन चक होते थे, लेकिन इस बार प्रपत्र में केवल दो चक ही शामिल हैं।
विज्ञापन
उनकी 28 डिसमिल जमीन का हिस्सा कहीं और खाते में चला गया है, जिसका पता नहीं चल रहा है। नवादा खुर्द-कलां निवासी बाबूराम ने कहा कि उन्होंने सात वर्ष पहले गोविंद सिंह से एक बीघा दो डिसमिल जमीन का बैनामा कराया था जो प्रपत्र में दर्ज नहीं है। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि बैनामे का दाखिला-खारिज नहीं कराए जाने से ये स्थिति आना सम्भव है।
विज्ञापन
प्रपत्र लेने आए ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोई भी प्रपत्र पूरी तरह सही नहीं है। इससे कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगेंगे और जमीन बंटवारे पर विवाद बढ़ेंगे। कुछ ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि प्रपत्रों की संख्या अधिक होने पर इन्हें एक-एक मजरा और गांव में वितरित करना चाहिए था, ताकि चार दिनों तक पंचायत घर पर समय न बर्बाद होता।