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Etawah News: बारिश में कच्चा घर गिरा, मलबे में दबकर मां व चार बच्चे घायल

Mon, 25 Sep 2023 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा Updated Mon, 25 Sep 2023 11:36 PM IST
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Kutcha house collapses in rain, mother and four children injured after being buried under debris
इटावा/बकेवर। लवेदी क्षेत्र के गांव नबादा में सोमवार तड़के मूसलाधार बारिश में कच्चा मकान ढह गया। इसके मलबे में दबकर चार बच्चों समेत एक महिला घायल हो गई। सभी को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां पर दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
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तीन दिन से लगातार हो रही बारिश लोगों के आशियाने ढहा रही है। नबादा गांव निवासी अजय तिवारी उर्फ शीलू दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। घर पर पत्नी बबली, अपने बच्चों राशि (14), आयुष (10), अंशिका (8) व पीयूष (6) के साथ गांव में रहती हैं। रविवार रात सब लोग घर के बाहरी हिस्से में बने कच्चे कमरे में सो रहे थे।
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सोमवार सुबह करीब चार बजे गरज के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश के बीच लगभग सवा चार बजे कमरा ढह गया। मलबे में बबली और चारों बच्चे दब गए। चीखपुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़े। ग्रामीणों ने मलबे में दबे पांचों लोगों को बाहर निकालने के प्रयास शुरू किए। इस बीच थाना प्रभरी लवेदी गिरजा शंकर दुबे फोर्स के साथ पहुंच गए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर सभी को निकालकर महेवा सीएचसी भिजवाया।
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वहां से पांचों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां बबली और छोटे बेटे पीयूष की हालत गंभीर देखते हुए उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहीं, सूचना पर चकरनगर तहसीलदार ब्रह्मदत्त मिश्रा, सीओ भरथना विवेक जावला ने भी क्षेत्रीय लेखपाल पुष्पेंद्र यादव के साथ पहुंचकर मुआयना किया। पंचायत सचिव नेहा दीक्षित ने पहुंचकर हाल जाना। पति अजय तिवारी भी दोपहर को दिल्ली से सैफई पहुंच गया।



दो किस्तें मिलीं, पर नहीं पड़ सकी छत


अजय तिवारी के पास खेती नहीं है। वह दिल्ली में 12 हजार रुपये की तनख्वाह पर काम करता है। पूरा जीवन कच्चे घर में बिता दिया। लंबे समय की कवायद के बाद वर्ष 2022 में उसकी पत्नी के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला। अजय तिवारी ने बताया कि आवास की दो किस्तें जनवरी व मार्च में एक लाख दस हजार रुपये की मिल चुकी है। लेकिन पिलर और दीवारें बनवाने में ही दोनों किस्तें कम पड़ गईं। कुछ अपने पास तो कुछ उधार लेकर किसी तरह दीवारें पूरी होने तक काम कराया। दूसरी किस्त में लेंटर बनवाना होता है, लेकिन इतनी महंगाई में उक्त किस्तों से लेंटर तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में तीसरी किस्त का इंतजार कर रहे थे। उसके मिलने के बाद लेंटर पड़वाते। ग्राम पंचायत सचिव नेहा दीक्षित ने बताया कि आवास की दो किस्तें बबली को मिल चुकी थीं। इन किस्तों में लेंटर पड़ने के बाद फिनीशिंग के काम के लिए तीसरी किस्त मिलती है। अभी तक उनके यहां लेंटर न पड़ने से तीसरी किस्त नहीं मिल सकी। इसे लेकर नोटिस तक दिया जा चुका है। हादसे के बाद लोगों में यही चर्चा रही कि यदि बारिश से पहले मकान का लेंटर पड़ जाता तो शायद हादसा न होता।
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