फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Kanpur police brutality became the reason for the death of turtles

कानपुर पुलिस की क्रूरता बनी कछुओं के मौत की वजह

Wed, 17 Feb 2021 11:08 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Feb 2021 11:08 PM IST
विज्ञापन
Kanpur police brutality became the reason for the death of turtles
इटावा। सरसईनावर झील में हो रही कछुओं की मौत का कारण शिकारी नहीं बल्कि कानपुर पुलिस का क्रूर व्यवहार है। बुधवार को हुए पोस्टमार्टम में ज्यादातर कछुओं की मौत का कारण गंभीर चोट लगना सामने आया है। डॉक्टरों के मुताबिक पांच दिन तक बिना भोजन के बोरियों में भरकर रखे गए कछुओं को गाड़ी में ठूसकर कानपुर से यहां लाया गया था। इसकी वजह से कुछ कछुओं की ट्रांजिट शॉक भी लगा था, जो उनकी मौत का कारण बनी। सरसईनावर झील में बुधवार को भी 12 से ज्यादा कछुए मरे हुए पाए गए।
विज्ञापन

कानपुर में 6 फरवरी को शिकारियों के कब्जे से पकड़े गए 1300 कछुओं को पुलिसिया कार्रवाई के चलते पांच दिन बाद 11 फरवरी को ताखा के सरसईनावर झील में छोड़ा गया था। मंगलवार को इनमें से 25 कछुओं का शव झील में और आसपास किनारों पर पाया गया था। कुछ कछुओं का शव पोस्टमार्टम के लिए बरेली तो 13 कछुओं का शव जिला पशु अस्पताल भेज गया था।
विज्ञापन

पोस्टमार्टम करने वाले डिप्टी वेटनरी ऑफिसर डॉक्टर नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि मरने वाले कछुए वयस्क और कुछ बेहद कम उम्र के सुंदरी प्रजाति के हैं। पांच दिन तक पानी से बाहर बिना भोजन के रहने की वजह से इन कछुओं को सदमा पहुंचा था। तीन से चार दिन पहले ही इनकी मौत हो चुकी थी। वयस्क कछुओं के शरीर पर गहरी चोट पाई गई है। कुछ के पैर टूट गए थे जिसकी वजह से वह पानी में डालने के बाद तैर नहीं पाए। लंबे समय तक पानी और भोजन न मिलने की वजह से कई के आंत में संक्रमण हो चुका था। उन्होंने बताया कि कुछ कछुए बेहद कम उम्र के थे जिनकी मौत का कारण ट्रांजिट शॉक सामने आया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सामान की तहर ठूसकर लाए गए थे कछुए
वन विभाग के अफसरों का कहना है कि कानपुर पुलिस बिना उनकी टीम के 10 फरवरी की रात कछुओं को गाड़ी से लेकर यहां आई थी। सभी कछुओं को बोरियों में ठूंसा गया था। बार-बार उठाकर एक जगह से दूसरी जगह पटके जाने और गाड़ी में धक्का खाने की वजह से कछुए गंभीर रूप से चोटिल हो गए। उन्हें ट्रांजिट शॉक भी लगा था।

झील की चौकसी बेहद कम
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकारियों से सांठगांठ की वजह से वन विभाग का दस्ता झील की तरफ जाता ही नहीं है। इस क्षेत्र के रेंजर प्रबल प्रताप सिंह का कहना है कि जीवों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed