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चैत में तप रही जेठ सी दोपहरी
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तेज धूप से बचने को कैप लगाकर जाती साइकिल सवार छात्रा
- फोटो : ETAWAH
इटावा। चैत (चैत्र) की दोपहरी इस बार जेठ महीने की तरह तपने रही है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है जबकि पिछले वर्ष 29 मार्च को तापमान 39 डिग्री था। तापमान बढ़ने से दिन चढ़ने के साथ ही गर्म हवाएं चलने लगीं हैं। अंगैछी और टोपी से सिर ढके बिना दोपहर में सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है। बढ़ते तापमान का दुष्प्रभाव मानवों के साथ पशु पक्षियों और फसलों पर भी पड़ रहा है।
इस समय इंग्लिश कैलेंडर का मार्च और हिंदू पंचांग में चैत्र महीना चल रहा है। होली के बाद से तापमान लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। सुबह 10 बजे से ही गर्म हवाएं चलने लगती हैं। दोपहर होते-होते जमीन तपने लगती है। बाहर निकलने पर कुछ ही देर में हलक सूखने के साथ थकान होवी हो जाती है। लोगों का कहना है कि मार्च में यह हाल है तो अप्रैल, मई व जून में तो आग ही बरसेगी।
तापमान बढ़ने से पिछौती की गेहूं की फसलें समय के पहले पकने लगी हैं। इससे फसल में दाना कमजोर होने की आशंका है। जायद की मक्का, उड़द, मूंग, सब्जी और तरबूज व खरबूजे की पहले बोई गई फसलें कुम्हलाने लगी हैं। जो फसलें बाद में बोई गई हैं, उनमें अंकुरण देरी से हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक इंजीनियर भूपेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि तापमान अधिक होने से जायद में बोई गई फसलों के बीजों में अंकुरण कम होगा। पहले से बोई गई फसलों में किसान सिंचाई करते रहें।
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जिला अस्पताल में बढ़ गए मरीज
तापमान अधिक होने से लोग गर्मी जनित बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 1000 से अधिक हो गई है। सोमवार को 1277 और मंगलवार को 1086 मरीजों ने पर्चे बनवाए। खांसी, बुखार, सिरदर्द और त्वचा रोगियों की संख्या अधिक है। फिजीशियन डॉ. शांतनु ने कहा कि गर्मी में सिर पर ठंडा पानी न डालें। धूप से आने के बाद तुरंत मुंह भी न धोएं। ऐसा करने से बीमार पड़ सकते हैं। धूप से आकर तुरंत एसी में भी न जाएं। बाहरी खान पान, गन्ने के रस और चुस्की का सेवन करने से बचें। रस और चुस्की में प्रयोग की जाने वाली कच्ची बर्फ नुकसान पहुंचा सकती है।
आठ दिन का तापमान
तारीख अधिकतम
22 मार्च 38 डिग्री
23 मार्च 37 डिग्री
24 मार्च 37 डिग्री
25 मार्च 38 डिग्री
26 मार्च 37 डिग्री
27 मार्च 38 डिग्री
28 मार्च 39 डिग्री
29 मार्च 40 डिग्री
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इस समय इंग्लिश कैलेंडर का मार्च और हिंदू पंचांग में चैत्र महीना चल रहा है। होली के बाद से तापमान लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। सुबह 10 बजे से ही गर्म हवाएं चलने लगती हैं। दोपहर होते-होते जमीन तपने लगती है। बाहर निकलने पर कुछ ही देर में हलक सूखने के साथ थकान होवी हो जाती है। लोगों का कहना है कि मार्च में यह हाल है तो अप्रैल, मई व जून में तो आग ही बरसेगी।
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तापमान बढ़ने से पिछौती की गेहूं की फसलें समय के पहले पकने लगी हैं। इससे फसल में दाना कमजोर होने की आशंका है। जायद की मक्का, उड़द, मूंग, सब्जी और तरबूज व खरबूजे की पहले बोई गई फसलें कुम्हलाने लगी हैं। जो फसलें बाद में बोई गई हैं, उनमें अंकुरण देरी से हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक इंजीनियर भूपेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि तापमान अधिक होने से जायद में बोई गई फसलों के बीजों में अंकुरण कम होगा। पहले से बोई गई फसलों में किसान सिंचाई करते रहें।
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जिला अस्पताल में बढ़ गए मरीज
तापमान अधिक होने से लोग गर्मी जनित बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 1000 से अधिक हो गई है। सोमवार को 1277 और मंगलवार को 1086 मरीजों ने पर्चे बनवाए। खांसी, बुखार, सिरदर्द और त्वचा रोगियों की संख्या अधिक है। फिजीशियन डॉ. शांतनु ने कहा कि गर्मी में सिर पर ठंडा पानी न डालें। धूप से आने के बाद तुरंत मुंह भी न धोएं। ऐसा करने से बीमार पड़ सकते हैं। धूप से आकर तुरंत एसी में भी न जाएं। बाहरी खान पान, गन्ने के रस और चुस्की का सेवन करने से बचें। रस और चुस्की में प्रयोग की जाने वाली कच्ची बर्फ नुकसान पहुंचा सकती है।
आठ दिन का तापमान
तारीख अधिकतम
22 मार्च 38 डिग्री
23 मार्च 37 डिग्री
24 मार्च 37 डिग्री
25 मार्च 38 डिग्री
26 मार्च 37 डिग्री
27 मार्च 38 डिग्री
28 मार्च 39 डिग्री
29 मार्च 40 डिग्री

कचहरी परिसर में वाटर कूलर से पानी पीती महिला- फोटो : ETAWAH