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झूठा मामला दर्ज कराने पर दो दिन की सजा
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इटावा। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट कोर्ट अवधेश कुमार ने छेड़छाड़ जानमाल की धमकी और एससी-एसटी एक्ट मुकदमे में वादी के मुकरने पर आरोपियों को दो वर्ष पहले दोषमुक्त कर दिया था। झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने पर वादी पर मुकदमा चलाया गया। इसमें मंगलवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। वादी को दो दिन के कारावास की सजा सुनाई और 500 रुपये जुर्माना लगाया है।
विशेष शासकीय अधिवक्ता एससी-एसटी कोर्ट रमाकांत चतुर्वेदी ने बताया कि ऊसराहार थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी जागेश्वर दयाल ने गांव के रवि व अखिलेश के खिलाफ पुत्री के साथ छेड़छाड़ करने, जान से मारने की धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट में 14 अगस्त 2012 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जागेश्वर दयाल कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोपियों पर लगाए आरोपों से मुकर गए। इसके आधार पर कोर्ट ने रवि और अखिलेश को 29 अक्टूबर 2020 को दोष मुक्त कर दिया था। कोर्ट ने वादी जागेश्वर दयाल के विरुद्ध धारा 344 के तहत मुकदमा चलाने के लिए आदेश दिए थे। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने जागेश्वर दयाल को दोषी पाया और दो दिन के कारावास की सजा सुनाई।
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विशेष शासकीय अधिवक्ता एससी-एसटी कोर्ट रमाकांत चतुर्वेदी ने बताया कि ऊसराहार थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी जागेश्वर दयाल ने गांव के रवि व अखिलेश के खिलाफ पुत्री के साथ छेड़छाड़ करने, जान से मारने की धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट में 14 अगस्त 2012 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जागेश्वर दयाल कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोपियों पर लगाए आरोपों से मुकर गए। इसके आधार पर कोर्ट ने रवि और अखिलेश को 29 अक्टूबर 2020 को दोष मुक्त कर दिया था। कोर्ट ने वादी जागेश्वर दयाल के विरुद्ध धारा 344 के तहत मुकदमा चलाने के लिए आदेश दिए थे। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने जागेश्वर दयाल को दोषी पाया और दो दिन के कारावास की सजा सुनाई।
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