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फर्जी लैब संचालकों ने बढ़ाई ग्रामीणों की समस्या
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ग्रामीण क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे पैथालॉजी लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहें है।
अहेरीपुर, निवाड़ीकला, उरैंग, भरईपुर समेत कई गांवों में खून की जांच की दुकानें खुली हैं। इन पैथालॉजी संचालकों के पास न ही लैब टेक्नीशियन हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण। खून की जांच के एवज में 700 से 1000 रुपये वसूले जा रहे हैं।
इसमें 150-300 रुपये झोलाछाप को कमीशन मिलता है। अवैध लैब में ज्यादातर लोगों को प्लेट्स कम होने की रिपोर्ट दी जाती है।
इस रिपोर्ट के आधार पर झोलाछाप तीमारदारों से मोटी रकम वसूल कर लेते हैं। पिछले सप्ताह बुखार से पीड़ित ग्रामीण को जांच में प्लेट्स कम बताए गए। उसने शुक्रवार को इटावा के एक चिकित्सक को दिखाया तो प्लेट्स सही निकली।
मेडिकल स्टोर पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। सुबह से शाम तक भीड़ लगी रहती है। करीब 20 मेडिकल स्टोर संचालक न ही खुद मास्क लगाते हैं और न ही ग्राहकों को प्रेरित करते हेँ।
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क्षेत्र में वायरल के मरीज बढ़े हैं। हर घर में कोई न कोई बीमार है। पेरासिटामोल, जिंक, विटामिन ई, एंटीबायोटिक, एंटीएलर्जी, कफ सीरप आदि की खपत बढ़ गई है। खपत के बढ़ने दवा कंपनियों ने दाम भी बढ़ा दिए हैं।
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अहेरीपुर, निवाड़ीकला, उरैंग, भरईपुर समेत कई गांवों में खून की जांच की दुकानें खुली हैं। इन पैथालॉजी संचालकों के पास न ही लैब टेक्नीशियन हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण। खून की जांच के एवज में 700 से 1000 रुपये वसूले जा रहे हैं।
इसमें 150-300 रुपये झोलाछाप को कमीशन मिलता है। अवैध लैब में ज्यादातर लोगों को प्लेट्स कम होने की रिपोर्ट दी जाती है।
इस रिपोर्ट के आधार पर झोलाछाप तीमारदारों से मोटी रकम वसूल कर लेते हैं। पिछले सप्ताह बुखार से पीड़ित ग्रामीण को जांच में प्लेट्स कम बताए गए। उसने शुक्रवार को इटावा के एक चिकित्सक को दिखाया तो प्लेट्स सही निकली।
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मेडिकल स्टोर पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। सुबह से शाम तक भीड़ लगी रहती है। करीब 20 मेडिकल स्टोर संचालक न ही खुद मास्क लगाते हैं और न ही ग्राहकों को प्रेरित करते हेँ।
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