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ब्लैक फंगस का मरीज सामने आया, तो जागा स्वास्थ्य विभाग
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इटावा। जिले में ब्लैक फंगस की दस्तक के बाद जिला अस्पताल में आनन फानन बनाया गया ब्लैक फंगस वार्ड खुद ही बीमार दिख रहा है। अलग वार्ड बनाने के बजाए आईसोलेशन वार्ड में ही ब्लैक फंगस वार्ड बनाने की खानापूरी कर दी गई, बोर्ड तक नहीं लगाया गया। डॉक्टर तो मुस्तैद कर दिए गए लेकिन शासन से दवाएं नहीं आई हैं। ऐसे में अगर ब्लैक फंगस को कोई मरीज आ गया तो उसे रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
इटावा शहर के लाइन पार क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी 63 वर्षीय बुजुर्ग चार मई को कोरोना संक्रमित हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने उनको होम आइसोलेट कर दिया था। 17 मई को बुजुर्ग को दिक्कत बढ़ गई। 19 मई को सैफई चिकित्सा विवि में जांच कराई।
ब्लैक फंगस की आशंका पर डॉक्टर ने लखनऊ के केजीएमयू रेफर कर दिया। 20 मई को केजीएमयू में भर्ती कर बुजुर्ग की जांच की गई। 22 मई को आई रिपोर्ट में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो गई। सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय में भर्ती एक अन्य मरीज में भी ब्लैक फंगस की आशंका है। पोर्टल के जरिये बुजुर्ग को ब्लैक फंगस होने की जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन जिला अस्पताल में एक वार्ड बना दिया लेकिन दवाएं और अन्य संसाधन अस्पताल में नहीं हैं। सीएमओ वार्ड में 35 बेड का दवा कर रहे हैं लेकिन सीएमएस 20 बेड होने की बात कह रहे हैं। ब्लैक फंगस वार्ड का बोर्ड तक नहीं है। वार्ड के मुख्य द्वार पर आईसोलेशन वार्ड लिखा हुआ है।
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वार्ड में चार डॉक्टरों की ड्यूटी
ब्लैक फंगस वार्ड में चार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। सीएमएस ने बताया कि फिजीशियन डॉ. वीके साहू, सर्जन डॉ. मंगल सिंह, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जयदेश कुमार, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी चौधरी और एनेथेसिया विशेषज्ञ डॉ. आरसी यादव को टीम में शामिल किया गया है। डॉक्टरों की यह टीम ब्लैक फंगस के मरीज का ऑपरेशन भी करेगी।
अधिकारियों के बयान विरोधाभाषी
35 बेड का वार्ड बना
सीएमओ ने डॉ. भगवान दास ने कहा कि जिले के एक बुजुर्ग में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। वह लखनऊ में भर्ती है। सैफ़ई में भर्ती एक मरीज में ब्लैक फंगस के लक्षण प्रतीत हो रहे हैं, अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसे देखते हुए जिला अस्पताल में 35 बेड का ब्लैक फंगस वार्ड बनाकर डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगा दी गई है।
वार्ड में ब्लैक फंगस के 20 बेड
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएस भदौरिया ने कहा कि के आइसोलेशन वार्ड में 36 बेड हैं। इनमें 20 बेड का ब्लैक फंगस वार्ड बनाया गया है। बाकी 16 बेड पर कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा। अस्पताल में अभी तक शासन से ब्लैक फंगस की दवा भी नहीं आई है।
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इटावा शहर के लाइन पार क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी 63 वर्षीय बुजुर्ग चार मई को कोरोना संक्रमित हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने उनको होम आइसोलेट कर दिया था। 17 मई को बुजुर्ग को दिक्कत बढ़ गई। 19 मई को सैफई चिकित्सा विवि में जांच कराई।
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ब्लैक फंगस की आशंका पर डॉक्टर ने लखनऊ के केजीएमयू रेफर कर दिया। 20 मई को केजीएमयू में भर्ती कर बुजुर्ग की जांच की गई। 22 मई को आई रिपोर्ट में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो गई। सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय में भर्ती एक अन्य मरीज में भी ब्लैक फंगस की आशंका है। पोर्टल के जरिये बुजुर्ग को ब्लैक फंगस होने की जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन जिला अस्पताल में एक वार्ड बना दिया लेकिन दवाएं और अन्य संसाधन अस्पताल में नहीं हैं। सीएमओ वार्ड में 35 बेड का दवा कर रहे हैं लेकिन सीएमएस 20 बेड होने की बात कह रहे हैं। ब्लैक फंगस वार्ड का बोर्ड तक नहीं है। वार्ड के मुख्य द्वार पर आईसोलेशन वार्ड लिखा हुआ है।
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वार्ड में चार डॉक्टरों की ड्यूटी
ब्लैक फंगस वार्ड में चार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। सीएमएस ने बताया कि फिजीशियन डॉ. वीके साहू, सर्जन डॉ. मंगल सिंह, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जयदेश कुमार, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी चौधरी और एनेथेसिया विशेषज्ञ डॉ. आरसी यादव को टीम में शामिल किया गया है। डॉक्टरों की यह टीम ब्लैक फंगस के मरीज का ऑपरेशन भी करेगी।
अधिकारियों के बयान विरोधाभाषी
35 बेड का वार्ड बना
सीएमओ ने डॉ. भगवान दास ने कहा कि जिले के एक बुजुर्ग में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। वह लखनऊ में भर्ती है। सैफ़ई में भर्ती एक मरीज में ब्लैक फंगस के लक्षण प्रतीत हो रहे हैं, अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसे देखते हुए जिला अस्पताल में 35 बेड का ब्लैक फंगस वार्ड बनाकर डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगा दी गई है।
वार्ड में ब्लैक फंगस के 20 बेड
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएस भदौरिया ने कहा कि के आइसोलेशन वार्ड में 36 बेड हैं। इनमें 20 बेड का ब्लैक फंगस वार्ड बनाया गया है। बाकी 16 बेड पर कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा। अस्पताल में अभी तक शासन से ब्लैक फंगस की दवा भी नहीं आई है।