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पत्नी को छोड़ दिया गाय नहीं छोड़ीं
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Sun, 20 Mar 2016 11:59 PM IST
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बाइस ख्वाजा के पास अपनी गौशाला में मौजूद मुन्ना।
- फोटो : अमर उजाला
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इटावा। न कोई गौशाला न सरकारी इमदाद। मगर आफाक अली उर्फ मुन्ना अपनी गायों के लिए बेहतर इंतजाम करते है। बीफ पार्टी के बहाने आए दिन होने वाले घमासान करने वालों को खुले आसमान के नीचे चल रही उनकी गौशाला एक आइना है। गौशाला में गायें हैं जो अपने मालिक की बात खूब समझती हैं। मूलरूप से कानपुर के अमरोहदा के रहने वाले मुन्ना पिछले तीन दशकों से इटावा शहर में बाइस ख्बाजा के पास जंगल में बने लकड़ी के बाड़े मेें अपनी गायों के साथ रहते हैं। अब ये गायें ही मुन्ना की सब कुछ हैं।
55 वर्षीय मुन्ना ने बताया कि करीब 15 साल पहले उसकी शादी इटावा के बकेवर की रहने वाली अफरोज जहां से हुई थी। करीब तीन साल साथ रहने के बाद बीबी उसको छोड़ कर चली गई। वह इसलिए गई क्योंकि उसे हमारा गाय प्रेम पसंद नहीं आया। इसी को लेकर तकरार हुई थी। तब से मुन्ना गाय का प्रेमी बन गया है। मुन्ना के पास इस समय करीब चौदह गाय हैं। जिससे उसकी जिंदगी कट रही है।
मुन्ना का कहना है कि उसको गायों से इतना प्रेम है कि वह गायों के ही बीच ही सो जाता यहै। मुन्ना का कहना है कि बचपन में भले ही उसने कभी मांस का सेवन किया हो, लेकिन जब से होश संभाला तब से वह पूरी तरह शाकाहारी है। मुन्ना ने बताया कि वह 13 साल की उम्र से इटावा में है। तब से यहीं का होकर रह गया। बचपन से गायों को पालने को शौक रहा। पंद्रह साल की उम्र से गाय पालन का काम शुरू किया। गायों की देखभाल करने के इरादे से मुन्ना सुबह तड़के उठते हैं और गाय का गोबर उठाते है। चारा सानी करते है फिर दूध निकाल कर बेंचने जाते हैं। जिससे गायों का चारा और उसके खाने का बंदोबस्त हो जाता है। उसने बताया कि गाय को बेचना या अन्य उसे कतई पंसद नहीं है।
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55 वर्षीय मुन्ना ने बताया कि करीब 15 साल पहले उसकी शादी इटावा के बकेवर की रहने वाली अफरोज जहां से हुई थी। करीब तीन साल साथ रहने के बाद बीबी उसको छोड़ कर चली गई। वह इसलिए गई क्योंकि उसे हमारा गाय प्रेम पसंद नहीं आया। इसी को लेकर तकरार हुई थी। तब से मुन्ना गाय का प्रेमी बन गया है। मुन्ना के पास इस समय करीब चौदह गाय हैं। जिससे उसकी जिंदगी कट रही है।
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मुन्ना का कहना है कि उसको गायों से इतना प्रेम है कि वह गायों के ही बीच ही सो जाता यहै। मुन्ना का कहना है कि बचपन में भले ही उसने कभी मांस का सेवन किया हो, लेकिन जब से होश संभाला तब से वह पूरी तरह शाकाहारी है। मुन्ना ने बताया कि वह 13 साल की उम्र से इटावा में है। तब से यहीं का होकर रह गया। बचपन से गायों को पालने को शौक रहा। पंद्रह साल की उम्र से गाय पालन का काम शुरू किया। गायों की देखभाल करने के इरादे से मुन्ना सुबह तड़के उठते हैं और गाय का गोबर उठाते है। चारा सानी करते है फिर दूध निकाल कर बेंचने जाते हैं। जिससे गायों का चारा और उसके खाने का बंदोबस्त हो जाता है। उसने बताया कि गाय को बेचना या अन्य उसे कतई पंसद नहीं है।
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