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इटावा: निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान पेट में छूट गई थी पट्टी, महिला की मौत
Sat, 23 Jan 2021 10:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 23 Jan 2021 10:25 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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इटावा के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान गर्भवती के पेट मेें पट्टी छोड़े जाने के आरोप की जांच पूरी भी नहीं हो पाई कि महिला ने शुक्रवार को दम तोड़ दिया। अक्तूबर में महिला का ऑपरेशन करके पेट से पट्टी निकाली गई थी। पीड़िता के पति का आरोप है कि उसकी पत्नी को न जिला अस्पताल में इलाज मिला न ही सैफई पीजीआई में।
छह महीने वह दर्द से तड़पती रही। मजबूरन निजी अस्पताल में ऑपेरशन कर पेट से पट्टी निकलवाई। जसवंतनगर के भगवानपुरा निवासी नरेश ने सात अप्रैल 2020 को पत्नी रिंकी को सिविल लाइंस के एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। यहां ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ।
आपरेशन के बाद रिंकी के पेट में लगातार दर्द बना रहता था। मई में वह दोबारा हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉक्टर ने कुछ दिनों में ठीक होने की बात कही। लेकिन दर्द ठीक नहीं हुआ। सितंबर में असहनीय दर्द होने रिंकी को लेकर जिला अस्पताल में दिखाया। यहां सीटी स्कैन से पेट में पट्टी होने का पता चला। यह ऑपरेशन के दौरान छूट गई थी।
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नरेश वापस उसी हॉस्पिटल गए तो उन्हें भगा दिया गया। डीएम से शिकायत पर रिंकी को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। नरेश का आरोप है कि यहां ऑपरेशन करने के बजाय तीन दिन बाद सैफई भेज दिया गया। सैफई में भी ऑपरेशन नहीं हुआ तो वह अक्तूबर में पत्नी को अलीगढ़ ले गया। जहां प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन कर पट्टी को निकलवाया।
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छह महीने वह दर्द से तड़पती रही। मजबूरन निजी अस्पताल में ऑपेरशन कर पेट से पट्टी निकलवाई। जसवंतनगर के भगवानपुरा निवासी नरेश ने सात अप्रैल 2020 को पत्नी रिंकी को सिविल लाइंस के एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। यहां ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ।
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आपरेशन के बाद रिंकी के पेट में लगातार दर्द बना रहता था। मई में वह दोबारा हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉक्टर ने कुछ दिनों में ठीक होने की बात कही। लेकिन दर्द ठीक नहीं हुआ। सितंबर में असहनीय दर्द होने रिंकी को लेकर जिला अस्पताल में दिखाया। यहां सीटी स्कैन से पेट में पट्टी होने का पता चला। यह ऑपरेशन के दौरान छूट गई थी।
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नरेश वापस उसी हॉस्पिटल गए तो उन्हें भगा दिया गया। डीएम से शिकायत पर रिंकी को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। नरेश का आरोप है कि यहां ऑपरेशन करने के बजाय तीन दिन बाद सैफई भेज दिया गया। सैफई में भी ऑपरेशन नहीं हुआ तो वह अक्तूबर में पत्नी को अलीगढ़ ले गया। जहां प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन कर पट्टी को निकलवाया।