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कुंदौल तालाब से मगरमच्छों को निकालने का रेस्क्यू
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चकरनगर। क्षेत्र के कुंदौल गांव स्थित तालाब में डेरा जमाए मगरमच्छों को बचाने (रेस्क्यू) का काम सेंक्चुअरी प्रशासन ने रविवार को शुरू करा दिया। अमर उजाला में शुक्रवार को छपी खबर के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
रविवार सुबह 11 बजे स्थानीय सेंक्चुअरी का अमला ट्रैक्टर चलित पंप सेट लेकर कुंदौल गांव पहुंचा। दोपहर 12.30 पर शुरू हुए रेस्क्यू में देर शाम 5.30 बजे तक पांच घंटे में तालाब का लगभग दो फीट पानी कम हो सका।
तालाब गहरा होने के कारण विभाग का अनुमान है कि पानी निकालने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। वन दरोगा सेंक्चुअरी विष्णु पाल सिंह चौहान ने बताया कि घरों का कूड़ा, कचरा तालाब में होने के कारण पानी निकासी में पंप सेट का वाल्व चोक हो रहा है। मगरमच्छ होने के कारण वाल्व को गहरे पानी में नहीं डाला जा रहा है।
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वन क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि मगरमच्छों को रेस्क्यू करने के लिए गढायता सेंटर से स्पेशल टीम बुलाई गई है। तालाब का पानी कम होते ही मगरमच्छों को पकड़कर चंबल नदी में छोड़ दिया जाएगा।
तालाब में मगरमच्छों की संख्या कितनी है यह बता पाना अभी मुमकिन नहीं है। हालांकि ग्रामीणों के मुताबिक इनकी संख्या तीन है। ये चंबल नदी में आई बाढ़ के दौरान तालाब में आ गए हैं।
अभियान की जानकारी पर कबाड़ी भी पहुंचे
घरों के बीच बस्ती में स्थित तालाब में लोग खाली बोतलें, साइकिल के पुराने टायर व अन्य सामान फेंक देते हैं। तालाब का पानी निकालने की जानकारी पर कई कबाड़ी भी पहुंच गए।
पानी कम होते ही दिखने वाली चीजों को लेने के लिए कबाड़ी मगरमच्छों की चिंता किए बिना तालाब में घुस जाते। पानी निकाल रहे अधिकारियों ने भी पंप सेट का वाल्व साफ कराने में कबाड़ियों की ही मदद ली। कबाड़ी लुकमान अली ने बताया कि कबाड़ा बेचकर कुछ पैसों का जुगाड़ हो जाएगा। तालाब से निकलने वाला कबाड़ा लेने के लिए 200 रुपये किराये पर टेंपो लाया है।
लोगों की जमा रही भीड़
मगरमच्छ पकड़े जाने की सूचना पर आसपास के गांव के लोग भी तालाब किनारे जुट गए। मगरमच्छ को पकड़े जाते देखने के लिए देर शाम तक मजमा लगा रहा।
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रविवार सुबह 11 बजे स्थानीय सेंक्चुअरी का अमला ट्रैक्टर चलित पंप सेट लेकर कुंदौल गांव पहुंचा। दोपहर 12.30 पर शुरू हुए रेस्क्यू में देर शाम 5.30 बजे तक पांच घंटे में तालाब का लगभग दो फीट पानी कम हो सका।
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तालाब गहरा होने के कारण विभाग का अनुमान है कि पानी निकालने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। वन दरोगा सेंक्चुअरी विष्णु पाल सिंह चौहान ने बताया कि घरों का कूड़ा, कचरा तालाब में होने के कारण पानी निकासी में पंप सेट का वाल्व चोक हो रहा है। मगरमच्छ होने के कारण वाल्व को गहरे पानी में नहीं डाला जा रहा है।
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वन क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि मगरमच्छों को रेस्क्यू करने के लिए गढायता सेंटर से स्पेशल टीम बुलाई गई है। तालाब का पानी कम होते ही मगरमच्छों को पकड़कर चंबल नदी में छोड़ दिया जाएगा।
तालाब में मगरमच्छों की संख्या कितनी है यह बता पाना अभी मुमकिन नहीं है। हालांकि ग्रामीणों के मुताबिक इनकी संख्या तीन है। ये चंबल नदी में आई बाढ़ के दौरान तालाब में आ गए हैं।
अभियान की जानकारी पर कबाड़ी भी पहुंचे
घरों के बीच बस्ती में स्थित तालाब में लोग खाली बोतलें, साइकिल के पुराने टायर व अन्य सामान फेंक देते हैं। तालाब का पानी निकालने की जानकारी पर कई कबाड़ी भी पहुंच गए।
पानी कम होते ही दिखने वाली चीजों को लेने के लिए कबाड़ी मगरमच्छों की चिंता किए बिना तालाब में घुस जाते। पानी निकाल रहे अधिकारियों ने भी पंप सेट का वाल्व साफ कराने में कबाड़ियों की ही मदद ली। कबाड़ी लुकमान अली ने बताया कि कबाड़ा बेचकर कुछ पैसों का जुगाड़ हो जाएगा। तालाब से निकलने वाला कबाड़ा लेने के लिए 200 रुपये किराये पर टेंपो लाया है।
लोगों की जमा रही भीड़
मगरमच्छ पकड़े जाने की सूचना पर आसपास के गांव के लोग भी तालाब किनारे जुट गए। मगरमच्छ को पकड़े जाते देखने के लिए देर शाम तक मजमा लगा रहा।