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तीन गांवों के लोग होंगे विस्थापित, 39 में बनेेगी पानी की टंकियां
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फोटो संख्या 09- ग्राम खिरीटी के लिए मार्ग तैयार कर रहे मनरेगा मजदूर
- फोटो : ETAWAH
इटावा। चकरनगर के बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत और पुनर्वास का काम तेजी से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित गांवों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद यह निर्देश दिए थे।
इन गांवों के लोगों को विस्थापित कर ऊंचे स्थानों पर आबाद किया जाएगा। ताकि बाढ़ जैसी विभीषिका में लोगों का जीवन संकट में न पड़े। जिला प्रशासन ने ऐसे गांवों का सर्वे कर लिया है।
तीन गांवों को विस्थापित कर ऊंचाई पर बसाने का निर्णय लिया गया है। बाकी गांवों में प्रभावित परिवारों को ऊंचाई पर शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही पीने के लिए शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए सभी प्रभावित 39 गांवों में जल निगम पानी की टंकियां बनाकर पाइप लाइन से घर घर पानी पहुंचाएगा। जल निगम के अधिकारी दो दिन से क्षेत्र में टंकियों और पाइप लाइन के कार्य का सर्वे कर रहे हैं।
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खिरीटी, ककैरया, रनियां गांव का मनरेगा से बना रास्ता
चकरनगर के बाढ़ प्रभावित गांवों के विस्थापन को भूमि चिन्हीकरण का कार्य तहसील प्रशासन ने शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री का आदेश धरातल पर उतरने लगा है। झोपड़ियों में रहने वाले अति गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए सूची तैयार हो रही है।
बाढ़ में डूबे खिरीटी, ककरैया, रनिया गांव के लोगों ने प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही से गांव के पुराने रास्ते को बनवाये जाने की मांग की थी। ताकि तहसील मुख्यालय आना जाना आसान हो सके।
वहीं बाढ़ जैसी आपदा के दौरान गांव का आवागमन बाधित न हो। मंत्री के आदेश पर मनरेगा के तहत खिरीटी गांव होते हुए तेजपुरा संपर्क मार्ग से जोड़ दिया गया है। जिससे लोगों को चकरनगर जाने के लिए सात से आठ किलोमीटर का चक्कर बचेगा।
30 गांवों में सुरक्षित भूमि का हो रहा चिन्हीकरण
उप जिलाधिकारी सत्यप्रकाश ने बताया कि हर बार बाढ़ में डूबने वाले गांव हरौली, मचल मढै़यां, चकरपुरा के विस्थापन की तैयारी की जा रही है। सुरक्षित भूमि का चिन्हीकरण सभी बाढ़ प्रभावित 30 गांवों में किया जा रहा है। कुछ गांवों में ज्यादा समस्या है कुछ गांवों में आंशिक तौर पर घर डूबते हैं। बाढ़ में डूबने वाले घरों के परिवारों को सुरक्षित भूमि पर बसाने की तैयारी चल रही है।
पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तहसील क्षेत्र के 39 गांव में जल निगम अष्टम शाखा पानी की टंकियों के लिए भूमि का सर्वे कर रही है। चकरनगर ब्लॉक के 22 गांव नीवरी, कुंदौल, गोपालपुरा, चांदई, ददरा, गढ़ैया, विडोरी, इमलिया, अचरौली, हनुमंतपुरा, चकरपुरा, पसिया, हरौली एवं महेवा ब्लाक के 17 गांव नगला महासिंहपुर, नगला हरी, चंद्रपुरा, मेहंदी पुरा, विनायक पुरा, तुर्कपुर पहाड़पुरा, वरौली, करौधी, टकरूपुर, महिपालपुर आदि गांव में जल जीवन मिशन हर घर नल से जल योजना के तहत पानी की टंकियों की स्थापना करवा कर पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाएगी।
विद्यालय भवनों की होगी तकनीकी जांच
बाढ़ में डूबे हुए स्कूलों में पठन-पाठन शुरू कराने से पहले भवन की तकनीकी जांच होगी। एसडीएम ने बताया कि बाढ़ ग्रस्त गांव के स्कूलों में नदियों का पानी भरने से स्कूल भवनों में दरारें चटकन आदि की आशंका है। इसलिए बीईओ को लिखित आदेश दिया गया है कि वह बाढ़ में डूबे हुए स्कूल भवनों की इंजीनियर से जांच पड़ताल कराकर ही शिक्षण कार्य करवाएं। जिन स्कूलों में भवनों में दरारें या चटकन आदि आ गई है। उन भवनों में तो बच्चों को बाहर खुले में या टेंट लगाकर शिक्षण कार्य करवाएं।
रनियां प्राथमिक विद्यालय क्षतिग्रस्त
रनियां प्राथमिक विद्यालय यमुना नदी की बाढ़ में डूबने से क्षतिग्रस्त हो गया। प्रधानाध्यापक ने बीईओ को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पत्र लिखा है। प्रधानाध्यापक अरविंद सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2019 में आई बाढ़ के चलते स्कूल का कुछ हिस्सा धराशाई हो गया था। विद्यालय के अभिलेख, कुर्सी, मेज आदि सामान रखकर साफ सफाई करवा दी है। एक तारीख से बच्चे विद्यालय आने लगेंगे, लेकिन खतरा है। स्कूल भवन की दीवारें बाढ़ के पानी से दरक गई हैं। बीईओ अल्केश कुमार ने बताया कि स्कूल भवनों का निरीक्षण किया जा रहा है। बच्चों के भविष्य से कहीं भी खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।
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इन गांवों के लोगों को विस्थापित कर ऊंचे स्थानों पर आबाद किया जाएगा। ताकि बाढ़ जैसी विभीषिका में लोगों का जीवन संकट में न पड़े। जिला प्रशासन ने ऐसे गांवों का सर्वे कर लिया है।
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तीन गांवों को विस्थापित कर ऊंचाई पर बसाने का निर्णय लिया गया है। बाकी गांवों में प्रभावित परिवारों को ऊंचाई पर शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही पीने के लिए शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए सभी प्रभावित 39 गांवों में जल निगम पानी की टंकियां बनाकर पाइप लाइन से घर घर पानी पहुंचाएगा। जल निगम के अधिकारी दो दिन से क्षेत्र में टंकियों और पाइप लाइन के कार्य का सर्वे कर रहे हैं।
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खिरीटी, ककैरया, रनियां गांव का मनरेगा से बना रास्ता
चकरनगर के बाढ़ प्रभावित गांवों के विस्थापन को भूमि चिन्हीकरण का कार्य तहसील प्रशासन ने शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री का आदेश धरातल पर उतरने लगा है। झोपड़ियों में रहने वाले अति गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए सूची तैयार हो रही है।
बाढ़ में डूबे खिरीटी, ककरैया, रनिया गांव के लोगों ने प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही से गांव के पुराने रास्ते को बनवाये जाने की मांग की थी। ताकि तहसील मुख्यालय आना जाना आसान हो सके।
वहीं बाढ़ जैसी आपदा के दौरान गांव का आवागमन बाधित न हो। मंत्री के आदेश पर मनरेगा के तहत खिरीटी गांव होते हुए तेजपुरा संपर्क मार्ग से जोड़ दिया गया है। जिससे लोगों को चकरनगर जाने के लिए सात से आठ किलोमीटर का चक्कर बचेगा।
30 गांवों में सुरक्षित भूमि का हो रहा चिन्हीकरण
उप जिलाधिकारी सत्यप्रकाश ने बताया कि हर बार बाढ़ में डूबने वाले गांव हरौली, मचल मढै़यां, चकरपुरा के विस्थापन की तैयारी की जा रही है। सुरक्षित भूमि का चिन्हीकरण सभी बाढ़ प्रभावित 30 गांवों में किया जा रहा है। कुछ गांवों में ज्यादा समस्या है कुछ गांवों में आंशिक तौर पर घर डूबते हैं। बाढ़ में डूबने वाले घरों के परिवारों को सुरक्षित भूमि पर बसाने की तैयारी चल रही है।
पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तहसील क्षेत्र के 39 गांव में जल निगम अष्टम शाखा पानी की टंकियों के लिए भूमि का सर्वे कर रही है। चकरनगर ब्लॉक के 22 गांव नीवरी, कुंदौल, गोपालपुरा, चांदई, ददरा, गढ़ैया, विडोरी, इमलिया, अचरौली, हनुमंतपुरा, चकरपुरा, पसिया, हरौली एवं महेवा ब्लाक के 17 गांव नगला महासिंहपुर, नगला हरी, चंद्रपुरा, मेहंदी पुरा, विनायक पुरा, तुर्कपुर पहाड़पुरा, वरौली, करौधी, टकरूपुर, महिपालपुर आदि गांव में जल जीवन मिशन हर घर नल से जल योजना के तहत पानी की टंकियों की स्थापना करवा कर पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाएगी।
विद्यालय भवनों की होगी तकनीकी जांच
बाढ़ में डूबे हुए स्कूलों में पठन-पाठन शुरू कराने से पहले भवन की तकनीकी जांच होगी। एसडीएम ने बताया कि बाढ़ ग्रस्त गांव के स्कूलों में नदियों का पानी भरने से स्कूल भवनों में दरारें चटकन आदि की आशंका है। इसलिए बीईओ को लिखित आदेश दिया गया है कि वह बाढ़ में डूबे हुए स्कूल भवनों की इंजीनियर से जांच पड़ताल कराकर ही शिक्षण कार्य करवाएं। जिन स्कूलों में भवनों में दरारें या चटकन आदि आ गई है। उन भवनों में तो बच्चों को बाहर खुले में या टेंट लगाकर शिक्षण कार्य करवाएं।
रनियां प्राथमिक विद्यालय क्षतिग्रस्त
रनियां प्राथमिक विद्यालय यमुना नदी की बाढ़ में डूबने से क्षतिग्रस्त हो गया। प्रधानाध्यापक ने बीईओ को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पत्र लिखा है। प्रधानाध्यापक अरविंद सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2019 में आई बाढ़ के चलते स्कूल का कुछ हिस्सा धराशाई हो गया था। विद्यालय के अभिलेख, कुर्सी, मेज आदि सामान रखकर साफ सफाई करवा दी है। एक तारीख से बच्चे विद्यालय आने लगेंगे, लेकिन खतरा है। स्कूल भवन की दीवारें बाढ़ के पानी से दरक गई हैं। बीईओ अल्केश कुमार ने बताया कि स्कूल भवनों का निरीक्षण किया जा रहा है। बच्चों के भविष्य से कहीं भी खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।

फोटो संख्या 10 आर - एसडीएम सत्यप्रकाश- फोटो : ETAWAH