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रैन बसेरा को बनाया कोविड सेंटर, तीमारदार भटक रहे
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टिन शेड का बना रैन बसेरा, जिसमें लगी प्लास्टिक की फटी पन्नी
- फोटो : ETAWAH
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सैफई। ठंड रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन अस्पताल में भी तीमारदारों के लिए बनाए गए रैन बसेरों में भी उनकी जानमाल की सुरक्षा व ठंड से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। ऐसा ही हाल है सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का। मेडिकल यूनिवर्सिटी में तीमारदारों के रुकने के लिए परिसर में तीन मंजिला रैन बसेरा है, लेकिन इसे कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर कोविड-19 सेंटर बना दिया गया है। उसके बाद से यूनिवर्सिटी में भर्ती 700 मरीजों के तीमारदारों को सिर छिपाने व दैनिक कार्यों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जैसे-जैसे सर्दी जोर पकड़ रही है, वैसे-वैसे तीमारदारों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं।
तीन मंजिला रैन बसेरा की बिल्डिंग में 84 बेड
मेडिकल यूनिवर्सिटी परिसर में तीमारदारों के ठहरने के लिए रैन बसेरा की तीन मंजिला बिल्डिंग है। यहां पर तीमारदारों के आराम के लिए 84 बेड व बिस्तरों की व्यवस्था है। इधर, कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रैन बसेरा को कोविड-19 सेंटर में तब्दील कर दिया है। अब यहां कोरोना मरीजों की भर्ती कर उपचार करने की व्यवस्था कर दी गई है।
अस्थायी रैन बसेरा में न टॉयलेट ना ही बाथरूम
रैन बसेरा की बिल्डिंग को कोविड सेंटर बनाए जाने के बाद तीमारदारों को सर्दी में सिर छिपाने के लिए परिसर में इधर-उधर भटकना पड़ता था। यह मामला मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन तक पहुंचा, तो अधिकारी हरकत में आ गए। परिसर में टिन शेड लगाकर एक रैन बसेरा बना दिया गया। उसमें टॉयलेट व बाथरूम की भी व्यवस्था नहीं है। यहां पर सिर्फ एक बेड पड़ा है। इसके अलावा वहां तीमारदारों के लिए कोई और व्यवस्था नहीं है।
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आए दिन हो रही चोरी की घटनाएं
यूनिवर्सिटी में बने रैन बसेरा में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। न तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वहां पर किसी सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी लगाई है और न ही अलमारियों की व्यवस्था की है। अगर कोई तीमारदार मजबूरी में इस रैन बसेरा में रुकता है तो उसका कोई न कोई सामान गायब हो जाता है। कभी किसी तीमारदार को मोबाइल फोन, तो कभी मरीज की दवा आदि के लिए रखे पैसे चोरी हो जाते हैं। कई बार तीमारदार पुलिस और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से चोरी की शिकायत कर चुके हैं। बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तीमारदारों के जानमाल की सुरक्षा का प्रबंध रैन बसेरा में नहीं किया है।
कुलसचिव बोले
पहले जो रैन बसेरा था। वहां पर कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के लिए कोविड-19 का सेंटर खोल दिया गया है। उसी के बगल में तीमारदारों के लिए टिनशेड डालकर रैन बसेरा बनाया गया है। वहां पर तीमारदार रुक सकते हैं।
-सुरेश चंद्र शर्मा, कुलसचिव मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई
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तीन मंजिला रैन बसेरा की बिल्डिंग में 84 बेड
मेडिकल यूनिवर्सिटी परिसर में तीमारदारों के ठहरने के लिए रैन बसेरा की तीन मंजिला बिल्डिंग है। यहां पर तीमारदारों के आराम के लिए 84 बेड व बिस्तरों की व्यवस्था है। इधर, कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रैन बसेरा को कोविड-19 सेंटर में तब्दील कर दिया है। अब यहां कोरोना मरीजों की भर्ती कर उपचार करने की व्यवस्था कर दी गई है।
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अस्थायी रैन बसेरा में न टॉयलेट ना ही बाथरूम
रैन बसेरा की बिल्डिंग को कोविड सेंटर बनाए जाने के बाद तीमारदारों को सर्दी में सिर छिपाने के लिए परिसर में इधर-उधर भटकना पड़ता था। यह मामला मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन तक पहुंचा, तो अधिकारी हरकत में आ गए। परिसर में टिन शेड लगाकर एक रैन बसेरा बना दिया गया। उसमें टॉयलेट व बाथरूम की भी व्यवस्था नहीं है। यहां पर सिर्फ एक बेड पड़ा है। इसके अलावा वहां तीमारदारों के लिए कोई और व्यवस्था नहीं है।
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आए दिन हो रही चोरी की घटनाएं
यूनिवर्सिटी में बने रैन बसेरा में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। न तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वहां पर किसी सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी लगाई है और न ही अलमारियों की व्यवस्था की है। अगर कोई तीमारदार मजबूरी में इस रैन बसेरा में रुकता है तो उसका कोई न कोई सामान गायब हो जाता है। कभी किसी तीमारदार को मोबाइल फोन, तो कभी मरीज की दवा आदि के लिए रखे पैसे चोरी हो जाते हैं। कई बार तीमारदार पुलिस और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से चोरी की शिकायत कर चुके हैं। बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तीमारदारों के जानमाल की सुरक्षा का प्रबंध रैन बसेरा में नहीं किया है।
कुलसचिव बोले
पहले जो रैन बसेरा था। वहां पर कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के लिए कोविड-19 का सेंटर खोल दिया गया है। उसी के बगल में तीमारदारों के लिए टिनशेड डालकर रैन बसेरा बनाया गया है। वहां पर तीमारदार रुक सकते हैं।
-सुरेश चंद्र शर्मा, कुलसचिव मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई