{"_id":"614b76da8ebc3efd122ebceb","slug":"etawah-news-etawah-news-knp6538147104","type":"story","status":"publish","title_hn":"गबन में 20 साल बाद एसबीआई के सहायक प्रबंधक को हुई पांच साल की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गबन में 20 साल बाद एसबीआई के सहायक प्रबंधक को हुई पांच साल की सजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। कोर्ट ने 20 साल बाद एसबीआई से सेवानिवृत्त सहायक प्रबंधक सुदर्शन लाला मौर्या को बैंक के कागजातों से छेड़छाड़, फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बैंक के अकाउंट से एक लाख रुपये का गबन करने के आरोप में पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही प्रबंधक पर 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी को जेल भेजा गया।
एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि चार सितंबर 2001 को फ्रेंड्स कॉलोनी के रामनगर शाखा की भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधक सत्यनारायण गुप्ता ने सिविल लाइन थाने में सहायक प्रबंधक सुदर्शन लाल मौर्या के खिलाफ तहरीर दी थी। आरोप था कि सहायक प्रबंधक ने फर्जी हस्ताक्षर बनाकर, कागजातों से छेड़छाड़ कर खाताधारक राम सिंह के बैंक अकाउंट से करीब एक लाख रुपये की निकासी की। आरोप के आधार पर पुलिस ने आरोपी सहायक प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी, कागजातों में हेराफरी कर रुपये निकासी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई।
21 नवंबर 2001 को आरोपी सहायक प्रबंधक सुदर्शन लाल ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। मामले में विवेचना अधिकारी ने साक्ष्य एकत्र कर आरोप पत्र एक दिसंबर 2001 को कोर्ट में पेश किया। थाना सिविल लाइन की पुलिस टीम, मॉनिटरिंग, पैरवी सैल व अभियोजन अधिकारी अनार सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए समयानुसार गवाहों व अन्य साक्ष्यों को कोर्ट में पेशकर पैरवी की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिलीप कुमार सचान ने फ्रेंड्स कॉलोनी 118 निवासी सेवानिवृत्त सहायक प्रबंधक सुदर्शन लाल मौर्या को पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके बाद जेल भेजा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि चार सितंबर 2001 को फ्रेंड्स कॉलोनी के रामनगर शाखा की भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधक सत्यनारायण गुप्ता ने सिविल लाइन थाने में सहायक प्रबंधक सुदर्शन लाल मौर्या के खिलाफ तहरीर दी थी। आरोप था कि सहायक प्रबंधक ने फर्जी हस्ताक्षर बनाकर, कागजातों से छेड़छाड़ कर खाताधारक राम सिंह के बैंक अकाउंट से करीब एक लाख रुपये की निकासी की। आरोप के आधार पर पुलिस ने आरोपी सहायक प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी, कागजातों में हेराफरी कर रुपये निकासी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई।
विज्ञापन
21 नवंबर 2001 को आरोपी सहायक प्रबंधक सुदर्शन लाल ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। मामले में विवेचना अधिकारी ने साक्ष्य एकत्र कर आरोप पत्र एक दिसंबर 2001 को कोर्ट में पेश किया। थाना सिविल लाइन की पुलिस टीम, मॉनिटरिंग, पैरवी सैल व अभियोजन अधिकारी अनार सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए समयानुसार गवाहों व अन्य साक्ष्यों को कोर्ट में पेशकर पैरवी की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिलीप कुमार सचान ने फ्रेंड्स कॉलोनी 118 निवासी सेवानिवृत्त सहायक प्रबंधक सुदर्शन लाल मौर्या को पांच साल की सजा सुनाई। साथ ही 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके बाद जेल भेजा गया।
विज्ञापन