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सूखा भूसा खा रहे हैं गोशालाओं में रखे गये गोवंश
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इटावा। कोरोना काल में पूरा प्रशासनिक अमला ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट की नीति को लागू करने में व्यस्त बना रहा। वहीं, जिले की गोशालाओं में रहने वाले गोवंश की सुध सबने भुला दी। इस भीषण गर्मी में गोशालाओं में गोवंश को धूप से बचाने के पर्याप्त प्रबंधों की कमी है। वहीं, चारे के नाम पर सूखा भूसा ही मिल पा रहा है। जिले की गोशालाओं की हालत दिनों दिन खराब हो रही है।
हरा चारा के बिना ही हैं गोवंश
बकेवर संवाद प्रतिनिधि के अनुसार हरे चारे की जगह गोशाला में गोवंश सूखा भूसा खा रहे हैं। बकेवर नगर पंचायत की गोशाला में करीब डेढ़ सौ गोवंश हैं। नगला बनी गांव के सामने जलकल परिसर में गोशाला बना दी गई है। गोशाला में 146 पशु हैं। जिसमे 80 गाय, 39 सांड़ और 7 बछड़े- बछिया हैं। शासन ने गोशालाओं में बंद गायों और गोवंशों को हरा चारा खिलाने का निर्देश दिया है। जबकि यहां पशुओं की नाद में सूखा भूसा पड़ा दिखा। कर्मचारी प्रदीप ने बताया कि सभी को दो टाइम सुबह व शाम को कपिला पशुआहार के साथ भूसे की सानी दी जा रही है। हरा चारा नहीं है।
लवेदी संवाद प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम नवादा खुर्दकला और बहादुरपुर घार में बनी गोशालाओं में जानवरों को हरा चारा नहीं मिल रहा है। ग्राम पंचायत बहादुरपुर घार में बनी गोशाला में करीब 70 गायें, सांड़, बछड़े मौजूद हैं। सूखा भूसा के साथ पशु आहार भी दिया जा रहा है। हरा चारा उपलब्ध नहीं है। नबादा खुर्दकला गोशाला में भी 47 पशु मौजूद हैं। दोनों गोशालाओं में पशुओं को सूखा भूसा खाकर ही रहना पड़ा है। भीषण गर्मी में इन गायों की हालत भी दयनीय बनी हुई है। चकरनगर बीहड़ी क्षेत्र की गोशालाओं में हरा चारा व दाना तो दूर दिन में एक बार सूखा चारा व बिजली आने पर इस भीषण गर्मी में पानी मुश्किल से नसीब होता है
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धूप से बचने के नहीं है पर्याप्त प्रबंध
चकरनगर संवाद प्रतिनिधि के अनुसार छुट्टा गोवंशों को आसरा देने के लिए 5 गोशालाएं संचालित हैं। यहां किसी भी गोशाला में गोवंश को दाना या हरा चारा नसीब नहीं हो रहा। सहसों गोशाला में 120 गोवंश हैं। राजू बाल्मीकि बताते हैं कि 6 माह से न तो दाना मिला है न ही हरे चारे की कोई व्यवस्था है। ठेकेदार सूखा भूसा लेकर आता है। वही जानवरों को डाल दिया जाता है। अनेठा गोशाला में 106 गोवंश हैं। गो सेवक अरविंद बताते हैं कि केवल भूसा गोवंश के लिए आता है। हरे चारे आदि कोई व्यवस्था नहीं है।
नोगांवा गोशाला में 35 गोवंश हैं। जानवरों को पानी की बड़ी समस्या रहती है। बरचौली में 22 गोवंश हैं। संचालक पप्पू कहते हैं कि गायों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। हरौली गोशाला में 28 गोवंश संरक्षित है। रामसेवक बताते हैं कि गोवंशों को कोई समय से देखने नहीं आता। धूप से बचाने के पर्याप्त प्रबंध नहीं है।
खंड विकास अधिकारी चकरनगर दीनदयाल ने बताया कि गोशाला में संरक्षित गोवंश के लिए 30 रुपये प्रतिदिन खुराक का पैसा सरकारी तौर पर दिया जाता है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने और गोशालाओं में जानवरों के प्रति लापरवाही मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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हरा चारा के बिना ही हैं गोवंश
बकेवर संवाद प्रतिनिधि के अनुसार हरे चारे की जगह गोशाला में गोवंश सूखा भूसा खा रहे हैं। बकेवर नगर पंचायत की गोशाला में करीब डेढ़ सौ गोवंश हैं। नगला बनी गांव के सामने जलकल परिसर में गोशाला बना दी गई है। गोशाला में 146 पशु हैं। जिसमे 80 गाय, 39 सांड़ और 7 बछड़े- बछिया हैं। शासन ने गोशालाओं में बंद गायों और गोवंशों को हरा चारा खिलाने का निर्देश दिया है। जबकि यहां पशुओं की नाद में सूखा भूसा पड़ा दिखा। कर्मचारी प्रदीप ने बताया कि सभी को दो टाइम सुबह व शाम को कपिला पशुआहार के साथ भूसे की सानी दी जा रही है। हरा चारा नहीं है।
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लवेदी संवाद प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम नवादा खुर्दकला और बहादुरपुर घार में बनी गोशालाओं में जानवरों को हरा चारा नहीं मिल रहा है। ग्राम पंचायत बहादुरपुर घार में बनी गोशाला में करीब 70 गायें, सांड़, बछड़े मौजूद हैं। सूखा भूसा के साथ पशु आहार भी दिया जा रहा है। हरा चारा उपलब्ध नहीं है। नबादा खुर्दकला गोशाला में भी 47 पशु मौजूद हैं। दोनों गोशालाओं में पशुओं को सूखा भूसा खाकर ही रहना पड़ा है। भीषण गर्मी में इन गायों की हालत भी दयनीय बनी हुई है। चकरनगर बीहड़ी क्षेत्र की गोशालाओं में हरा चारा व दाना तो दूर दिन में एक बार सूखा चारा व बिजली आने पर इस भीषण गर्मी में पानी मुश्किल से नसीब होता है
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धूप से बचने के नहीं है पर्याप्त प्रबंध
चकरनगर संवाद प्रतिनिधि के अनुसार छुट्टा गोवंशों को आसरा देने के लिए 5 गोशालाएं संचालित हैं। यहां किसी भी गोशाला में गोवंश को दाना या हरा चारा नसीब नहीं हो रहा। सहसों गोशाला में 120 गोवंश हैं। राजू बाल्मीकि बताते हैं कि 6 माह से न तो दाना मिला है न ही हरे चारे की कोई व्यवस्था है। ठेकेदार सूखा भूसा लेकर आता है। वही जानवरों को डाल दिया जाता है। अनेठा गोशाला में 106 गोवंश हैं। गो सेवक अरविंद बताते हैं कि केवल भूसा गोवंश के लिए आता है। हरे चारे आदि कोई व्यवस्था नहीं है।
नोगांवा गोशाला में 35 गोवंश हैं। जानवरों को पानी की बड़ी समस्या रहती है। बरचौली में 22 गोवंश हैं। संचालक पप्पू कहते हैं कि गायों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। हरौली गोशाला में 28 गोवंश संरक्षित है। रामसेवक बताते हैं कि गोवंशों को कोई समय से देखने नहीं आता। धूप से बचाने के पर्याप्त प्रबंध नहीं है।
खंड विकास अधिकारी चकरनगर दीनदयाल ने बताया कि गोशाला में संरक्षित गोवंश के लिए 30 रुपये प्रतिदिन खुराक का पैसा सरकारी तौर पर दिया जाता है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने और गोशालाओं में जानवरों के प्रति लापरवाही मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।