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शिशुओं की मृत्यु दर कम करने पर जोर
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Sun, 02 Aug 2015 11:36 PM IST
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जन्म लेने के बाद नवजात शिशुओं में सांस की परेशानियों के निदान को प्रशिक्षण के लिए उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान के शिशु एवं बाल रोग विभाग में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
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इसमें विशेष जोर शिशुओं की मृत्यु दर कम करने और सांस से होने वाली समस्याओं से बचाव पर रहा। एक दिवसीय नवजात शिशु पुनर्जीवन पर कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए संस्थान के निदेशक डा. (ब्रिगेडियर) टी प्रभाकर ने कहा कि प्रशिक्षण में विशेष जोर नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर रहेगा।
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कार्यशाला में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने के लिए टिप्स दिए गए। इस मौके पर शिशु एवं बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. केएम शुक्ला ने बताया कि कार्यशाला को विशेष प्रशिक्षक चिकित्सक डा. केसी अग्रवाल, विभागाध्यक्ष सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली, डा. एसएन सिंह, केजीएमसी लखनऊ, डा. एलके भारती विभागाध्यक्ष जयप्रकाश अस्पताल नई दिल्ली, डा कीर्ति मोहन, इलाहाबाद मेडिकल कालेज, डा आराधना रिम्स आदि ने जानकारियां दीं।
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डा रवि सचान, डा डीके सिंह, डा आई के शर्मा, डा मुकेश वीर सिंह, डा राजेश कुमार यादव, डा. दिनेश कुमार, डा दुर्गेश कुमार, डा. गणेश कुमार तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से डा. शिखा सेठ, डा. ममता सिंह आदि उपस्थित रहे।