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मूर्ति बनाने के धंधे में हैं मुश्किलें, छोड़ भी नहीं सकते
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फोटो संख्या 04 मूर्ति बनाती महिला
- फोटो : ETAWHA
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बुधवार को युवा कौशल दिवस दिवस इस कदर चुपके से बीत गया की अधिकांश हुनरमंदों को इसका पता ही नहीं चल सका।
लिहाजा कुछ हुनरमंद आज के दिन भी अपने काम मे लगे रहे। कुछ मूर्ति कारीगरों से बातचीत की तो उन्होंने सरकार के रवैये पर ददर्ज बयां किया कि इस काम में मुश्किलें हैं, पर छोड़ भी नहीं सकते।
शहर के कबीरगंज में वैष्णव मूर्ति कला केंद्र पर भी लोग अपने कार्य मे लगे रहे। मूर्ति कारीगर धर्मेंद्र प्रजापति ने बताया कि होश संभालते ही पिता के साथ मूर्ति बनाने का काम करते हुए करीब 30 साल ही गए हैं। अब यह कार्य घाटे का सौदा होता जा रहा है।
पुश्तैनी धंधा होने की वजह से इसे खत्म भी नहीं कर सकते। बताया काम को आगे बढ़ाने के लिए लोन भी लिया, लेकिन किस्त चुकाना तक भारी पड़ रहा है। कहा कि मिट्टी महंगी मिलने की समस्या भी कम नहीं है।
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युवा कारीगर विनीत ने बताया कि भी करीब पांच साल से मूर्ति बनाने का कार्य कार्य कर रहे हैं, लेकिन मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम होने से यह फायदे का काम नहीं रहा।
लिहाजा अभी आगे के बारे में सोचा नहीं है लेकिन आगे तो कुछ न कुछ सोचना ही पड़ेगा और कोई दूसरा काम ढूंढना पड़ेगा। सरकार को ध्यान देने की जरुरत है अन्यथा कोई भी युवा मिट्टी के इस काम मे हाथ नहीं लगाएगा।
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लिहाजा कुछ हुनरमंद आज के दिन भी अपने काम मे लगे रहे। कुछ मूर्ति कारीगरों से बातचीत की तो उन्होंने सरकार के रवैये पर ददर्ज बयां किया कि इस काम में मुश्किलें हैं, पर छोड़ भी नहीं सकते।
शहर के कबीरगंज में वैष्णव मूर्ति कला केंद्र पर भी लोग अपने कार्य मे लगे रहे। मूर्ति कारीगर धर्मेंद्र प्रजापति ने बताया कि होश संभालते ही पिता के साथ मूर्ति बनाने का काम करते हुए करीब 30 साल ही गए हैं। अब यह कार्य घाटे का सौदा होता जा रहा है।
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पुश्तैनी धंधा होने की वजह से इसे खत्म भी नहीं कर सकते। बताया काम को आगे बढ़ाने के लिए लोन भी लिया, लेकिन किस्त चुकाना तक भारी पड़ रहा है। कहा कि मिट्टी महंगी मिलने की समस्या भी कम नहीं है।
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युवा कारीगर विनीत ने बताया कि भी करीब पांच साल से मूर्ति बनाने का कार्य कार्य कर रहे हैं, लेकिन मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम होने से यह फायदे का काम नहीं रहा।
लिहाजा अभी आगे के बारे में सोचा नहीं है लेकिन आगे तो कुछ न कुछ सोचना ही पड़ेगा और कोई दूसरा काम ढूंढना पड़ेगा। सरकार को ध्यान देने की जरुरत है अन्यथा कोई भी युवा मिट्टी के इस काम मे हाथ नहीं लगाएगा।