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प्रकृति से छेड़छाड़ से बिगड़ रहा फसल चक्र

Sun, 03 Oct 2021 10:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Oct 2021 10:54 PM IST
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Crop cycle deteriorating due to tampering with nature
चकरनगर। प्रकृति में छेड़छाड़ से फसल चक्र बिगड़ रहा है। यह बात वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर सामाजिक वानिकी प्रभाग रेंज चकरनगर और सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के तत्वाधान में जागरूकता गोष्ठी में वक्ताओं ने कही। भारतीय नदियों पर छाये संकट पर गंभीर चिंता प्रकट की गई।
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चकरनगर रेंज परिसर में आयोजित गोष्ठी में वन क्षेत्राधिकारी चकरनगर शिवकुमार सिंह ने बताया कि नदी पर आश्रित पेड़-पौधे एवं जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियां नदी के जल को प्राकृतिक तरीके से स्वच्छ रखने का कार्य करती हैं।
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आज भारतीय नदियों का अस्तित्व समाप्ति की कगार पर है। वन दरोगा सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि इनदिनों धरती के तापमान में वृद्धि हो रही है। हिमखंड तेजी से पिघल रहे हैं। समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
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इससे कुदरत के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। प्रकृति में छेड़छाड़ के चलते वायुमंडल में गैसों का संतुलन बिगड़ गया है। इससे फसल चक्र गड़बड़ाया है, धरती की उर्वरता कम हुई।

स्कॉन सचिव वन्यजीव विशेषज्ञ संजीव चौहान ने कहा कि आप अपने आसपास पाए जाने वाले पेड़-पौधे, जलीय जीव, पक्षियों एवं वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाएं। कार्यक्रम में वन दरोगा अमरेश कुमार, अवधेश यादव व अंगद राजपूत का योगदान रहा।
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