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दहेज हत्या में सास और देवर को उम्रकैद, पति बरी
Fri, 08 Mar 2019 11:58 PM IST
प्रतीक दुबे
इटावा, अमर उजाला ब्यूरो
इटावा, अमर उजाला ब्यूरो
Published by: प्रतीक दुबे
Updated Fri, 08 Mar 2019 11:58 PM IST
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court
- फोटो : PTI
दहेज हत्या के मामले में सास व देवर को शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश षष्टम कमलेश कुमार ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, कोर्ट ने पति को दोष मुक्त क र बरी कर दिया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अजीत प्रताप सिंह तोमर ने बताया कि मोहल्ला अग्रवाल मैनपुरी निवासी राधा रमन ने 16 सितंबर 2017 को थाना फ्रेंड्स कालोनी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसने पुत्री रचना की शादी फ्रेंड्स कालोनी थाना क्षेत्र के इटगांव निवासी शरद यादव पुत्र अरुण कुमार के साथ 28 अप्रैल 2017 को की थी। शादी के बाद से शरद यादव, ससुर अरुण कुमार, सास शशि व देवर रिषभ व आशु चार पहिया की गाड़ी देने की मांग कर रहे थे। 15 सितंबर को उसके पास रचना का फोन आया कि ससुराल वाले कार की मांग को लेकर मारपीट कर रहे हैं पापा मुझे बचा लो। इस पर उसका भांजे अतुल ससुराल गया तो देखा कि रचना झुलसी हुई पड़ी थी।
रचना ने बताया कि कार न देने के कारण उसे ससुराल वालों ने जला दिया है। रचना को निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद शरद, सास शशि व देवर रिषभ के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट दाखिल किया। गवाहों के बयान व साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के दौरान रचना के द्वारा मृत्यु पूर्व दिए गए बयान में पति शरद का नाम न लिए जाने के चलते न्यायाधीश ने शरद को मामले में दोषी नहीं माना और उसे बरी कर दिया। जबकि, सास शशि व देवर रिषभ को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई साथ ही पांच पांच हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अजीत प्रताप सिंह तोमर ने बताया कि मोहल्ला अग्रवाल मैनपुरी निवासी राधा रमन ने 16 सितंबर 2017 को थाना फ्रेंड्स कालोनी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसने पुत्री रचना की शादी फ्रेंड्स कालोनी थाना क्षेत्र के इटगांव निवासी शरद यादव पुत्र अरुण कुमार के साथ 28 अप्रैल 2017 को की थी। शादी के बाद से शरद यादव, ससुर अरुण कुमार, सास शशि व देवर रिषभ व आशु चार पहिया की गाड़ी देने की मांग कर रहे थे। 15 सितंबर को उसके पास रचना का फोन आया कि ससुराल वाले कार की मांग को लेकर मारपीट कर रहे हैं पापा मुझे बचा लो। इस पर उसका भांजे अतुल ससुराल गया तो देखा कि रचना झुलसी हुई पड़ी थी।
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रचना ने बताया कि कार न देने के कारण उसे ससुराल वालों ने जला दिया है। रचना को निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद शरद, सास शशि व देवर रिषभ के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट दाखिल किया। गवाहों के बयान व साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के दौरान रचना के द्वारा मृत्यु पूर्व दिए गए बयान में पति शरद का नाम न लिए जाने के चलते न्यायाधीश ने शरद को मामले में दोषी नहीं माना और उसे बरी कर दिया। जबकि, सास शशि व देवर रिषभ को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई साथ ही पांच पांच हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।
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