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साजिशन अधीक्षक पद से हटाया गया
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सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई में मरीजों को खाना बांटने वाली संस्था का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर उपजा विवाद गहरा गया है। मामले में बुधवार को हटाए गए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस करके आरोप लगाया कि उन्हें षड्यंत्र करके हटाया गया है।
प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. आदेश कुमार ने सवाल उठाते हुए बताया कि संस्था का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में जांच समिति ने रजिस्ट्रार को भी दोषी ठहराया है, इस लिहाज से रजिस्ट्रार उन्हें हटाने का पत्र कैसे जारी कर स
कते हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, कुलाधिपति और डीएम को उन्होंने पत्र लिखा है। उन्होंने कार्डियोलॉजी विभाग में तैनात रहे एक डॉक्टर व अन्य लोगों पर 2019 में करीब एक करोड़ मूल्य की अनावश्यक सामग्री की खरीद करने व लाखों रुपये की धांधली के आरोप भी लगाए हैं। आरोप है कि कई मरीजों को नकली पेसमेकर लगाकर उनकी जान जोखिम में डाली गई।
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बताया कि मामले में गठित जांच कमेटी में वह खुद अध्यक्ष थे। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम सैफई हेम सिंह, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी डॉ देवेंद्र पाठक, डॉ मनोज कुमार, डॉ अमित सिंह शामिल थे।
जांच में एक डॉक्टर को दोषी पाया गया था। एक अन्य कमेटी की जांच में भी वह दोषी मिले। डॉ. आदेश ने आरोप लगाया कि मामले में डॉक्टर पर मामला दर्ज कराने की बजाए उन्हें बचाया जा रहा है।
बताया कि 24 दिसंबर को थानाध्यक्ष सैफई को उक्त डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए डाक से पत्र भेजा था। पत्र 28 दिसंबर को थाने में रिसीव हुआ। इस दिन उन्हें चिकित्सा अधीक्षक पद से हटाने का पत्र कुलसचिव ने जारी कर दिया था। इसके बाद से ही ये विवाद उठ खड़ा हुआ है।
40 की मौत, 150 की जान खतरे में
हटाए गए चिकित्सा अधीक्षक ने आरोप लगाया कि सैफई मेडीकल यूनिवर्सिटी में नॉन एमआरआई पेसमेकर के प्रयोग से 40 मरीजों की मौत हो चुकी है। 150 मरीजो की जान खतरे में है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद आरोपी डाक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। दो-दो बार दोष सिद्ध होने के बाद डाक्टर को सिर्फ निलंबित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी डॉक्टर को बचाया जा रहा है।
दो और प्रोफेसरों से अतिरिक्त प्रभार छिना
खाना बांटने वाली संस्था का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में दो और प्रोफेसरों से अतिरिक्त प्रभार छीन लिया गया। इसमें डॉ जेपी मथुरिया को निविदा प्रकोष्ठ व डॉ प्रवीण कुमार शर्मा को अनुबंध प्रकोष्ठ के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
मामले में डॉ. आदेश कुमार को पहले हटा दिया गया है। मामले में कुलसचिव समेत 14 लोगों को जांच कमेटी ने दोषी ठहराया है। इसमें दो अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. आदेश कुमार ने सवाल उठाते हुए बताया कि संस्था का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में जांच समिति ने रजिस्ट्रार को भी दोषी ठहराया है, इस लिहाज से रजिस्ट्रार उन्हें हटाने का पत्र कैसे जारी कर स
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कते हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, कुलाधिपति और डीएम को उन्होंने पत्र लिखा है। उन्होंने कार्डियोलॉजी विभाग में तैनात रहे एक डॉक्टर व अन्य लोगों पर 2019 में करीब एक करोड़ मूल्य की अनावश्यक सामग्री की खरीद करने व लाखों रुपये की धांधली के आरोप भी लगाए हैं। आरोप है कि कई मरीजों को नकली पेसमेकर लगाकर उनकी जान जोखिम में डाली गई।
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बताया कि मामले में गठित जांच कमेटी में वह खुद अध्यक्ष थे। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम सैफई हेम सिंह, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी डॉ देवेंद्र पाठक, डॉ मनोज कुमार, डॉ अमित सिंह शामिल थे।
जांच में एक डॉक्टर को दोषी पाया गया था। एक अन्य कमेटी की जांच में भी वह दोषी मिले। डॉ. आदेश ने आरोप लगाया कि मामले में डॉक्टर पर मामला दर्ज कराने की बजाए उन्हें बचाया जा रहा है।
बताया कि 24 दिसंबर को थानाध्यक्ष सैफई को उक्त डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए डाक से पत्र भेजा था। पत्र 28 दिसंबर को थाने में रिसीव हुआ। इस दिन उन्हें चिकित्सा अधीक्षक पद से हटाने का पत्र कुलसचिव ने जारी कर दिया था। इसके बाद से ही ये विवाद उठ खड़ा हुआ है।
40 की मौत, 150 की जान खतरे में
हटाए गए चिकित्सा अधीक्षक ने आरोप लगाया कि सैफई मेडीकल यूनिवर्सिटी में नॉन एमआरआई पेसमेकर के प्रयोग से 40 मरीजों की मौत हो चुकी है। 150 मरीजो की जान खतरे में है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद आरोपी डाक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। दो-दो बार दोष सिद्ध होने के बाद डाक्टर को सिर्फ निलंबित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी डॉक्टर को बचाया जा रहा है।
दो और प्रोफेसरों से अतिरिक्त प्रभार छिना
खाना बांटने वाली संस्था का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में दो और प्रोफेसरों से अतिरिक्त प्रभार छीन लिया गया। इसमें डॉ जेपी मथुरिया को निविदा प्रकोष्ठ व डॉ प्रवीण कुमार शर्मा को अनुबंध प्रकोष्ठ के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
मामले में डॉ. आदेश कुमार को पहले हटा दिया गया है। मामले में कुलसचिव समेत 14 लोगों को जांच कमेटी ने दोषी ठहराया है। इसमें दो अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।