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Etawah News: सरकारी राशन पर कमीशन-घटतौली की मार, होता उपभोक्ता परेशान

Fri, 25 Sep 2026 11:41 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 11:41 PM IST
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Commission and under-weighing plague government rations; consumers suffer.
फोटो 20::जिला पूर्ति कार्यालय से सप्लाई इंस्पेक्टर योगेश वर्मा को पकड़कर ले जाती एंटी करप्शन टी
इटावा। जिला पूर्ति कार्यालय में 30 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में पूर्ति निरीक्षक समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद राशन वितरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत में राशन के उठान से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने के बीच कई स्तर पर कथित कटौती और वसूली होती है। ऊपर से कमीशन और नीचे घटतौली की मार अंततः सरकारी राशन पर निर्भर परिवारों को झेलनी पड़ती है।
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जिले के सभी आठ ब्लॉकों और छह नगर निकायों में कुल 648 राशन दुकानों से खाद्यान्न का वितरण होता है। इन दुकानों से 2.91 लाख राशन कार्डों पर 10.87 लाख उपभोक्ता जुड़े हैं। शुक्रवार को राशन डीलर की शिकायत पर एंटी करप्शन की टीम ने पूर्ति निरीक्षक सहित कुल तीनों लोगों को गिरफ्तार किया गया था। शिकायतकर्ता ओम शरण ने बताया कि राशन दुकानदारों से तीन हजार रुपये की मासिक एंट्री के नाम पर वसूली की जाती है।
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वहीं उप्र सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रशेखर प्रजापति ने बताया कि ट्रैक्टर से खाद्यान्न उठान के दौरान हर ट्रैक्टर पर 15 किलो राशन कम दिया जाता है। इस हिसाब से 100 ट्रैक्टर पर 1,500 किलो यानी 15 क्विंटल खाद्यान्न कम दिया जाता है। उन्होंने बताया कि विभाग से जुड़े ठेकेदार की जिम्मेदारी राशन की दुकान तक राशन पहुंचाने की होती है, जबकि जनपद में इसका सात रुपये प्रति क्विंटल की पल्लेदारी और 250 रुपये तौल के नाम पर लिया जाता है। ऐसे में कई राशन डीलर घटतौली करने को मजबूर हो जाते हैं। अगर ऊपर से ही सही तरीके से नियमानुसार वितरण प्रक्रिया की जाए और कमीशन खोरी बंद हो तो राशन डीलर भी ईमानदारी से काम करें और उपभोक्ताओं को इसका खामियाजा न भुगतना पड़े।
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हर माह चुराया जाता 145.5 टन खाद्यान्न
यदि 2.91 लाख राशन कार्डों में प्रत्येक पर सिर्फ 500 ग्राम की घटतौली मान ली जाए तो कुल 1,45,500 किलो यानी 145.5 टन राशन कम बैठेगा। इतनी बड़ी मात्रा में राशन की कमी का सीधा असर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ेगा। यह आंकड़ा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को भी उजागर करता है।

कम राशन मिलने की शिकायत पर लड़ने को हो जाते तैयार

शहर के स्वरूप नगर निवासी उपभोक्ता अतुल दुबे ने बताया कि बताया कि राशन लेने के समय ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाया जाता है और निर्धारित मात्रा दिखाई जाती है, लेकिन कई बार हाथ में मिलने वाला राशन उससे कम होता है। कम राशन मिलने की शिकायत करने पर कोटेदार उपभोक्ता से विवाद करने पर उतारू हो जाते हैं।
घटतौली से प्रभावित होता है महीने का घरेलू खर्च
शहर के मोहल्ला मढैया ख्यालीराम निवासी उपभोक्ता मनोज कुमार ने परिवार के लिए मिलने वाला राशन पहले से ही सीमित होता है। इसमें भी कटौती हो जाए तो महीने का घरेलू खर्च प्रभावित होता है। उनका कहना है कि राशन की तौल उपभोक्ता के सामने स्पष्ट रूप से हो और जितनी मात्रा कार्ड पर दर्ज है, उतनी ही खाद्यान्न मिले। साथ ही कम राशन मिलने की स्थिति में शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
वर्जन
कुछ महीने पहले ही जिले का प्रभार लिया है। शिकायत आती है, उसके त्वरित निस्तारण का प्रयास होता है। जहां तक ठेकेदार की मनमानी और कम राशन दिए जाने की बात है तो जांच करवाएंगे। वितरण व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे। -

जीवेश कुमार मौर्य, जिला पूर्ति अधिकारी

फोटो 20::जिला पूर्ति कार्यालय से सप्लाई इंस्पेक्टर योगेश वर्मा को पकड़कर ले जाती एंटी करप्शन टी

फोटो 20::जिला पूर्ति कार्यालय से सप्लाई इंस्पेक्टर योगेश वर्मा को पकड़कर ले जाती एंटी करप्शन टी

फोटो 20::जिला पूर्ति कार्यालय से सप्लाई इंस्पेक्टर योगेश वर्मा को पकड़कर ले जाती एंटी करप्शन टी

फोटो 20::जिला पूर्ति कार्यालय से सप्लाई इंस्पेक्टर योगेश वर्मा को पकड़कर ले जाती एंटी करप्शन टी

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