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बाल वैज्ञानिकों ने बताए जैविक कोयले के गुण
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Fri, 30 Oct 2015 11:55 PM IST
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अर्चना मेमोरियल सरस्वती ज्ञान मंदिर इंटर कालेज के बाल वैज्ञानिकों ने अड्डा टीला में संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में बाल वैज्ञानिकों ने लोगों को जैविक कोयले के प्रयोग से होने वाले लाभों के प्रति जागरूक किया। कहा इसके बारे में व्यापक प्रचार प्रसार की जरूरत है।
मौसम और जलवायु को समझें विषय पर आयोजित संगोष्ठी में समूह प्रमुख अपर्णा द्विवेदी ने जैविक कोयले के प्रयोग से होने लाभ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह कोयला गन्ने की छोल, मूंगफली के छिलके तथा जैविक पदार्थों व उत्पादों को उच्च दाब पर दाबित करके तैयार किया जाता है।
कोयला धुआं रहित होने के कारण प्रदूषण मुक्त होता है। जबकि पारम्परिक कोयले में धुएं तथा अन्य प्रदूषक तत्व पाए जाते हैं। पारम्पारिक कोयले तथा जैविक कोयले की तुलना करते हुए बाल वैज्ञानिक ने बताया कि यह कोयला उच्च कैलोरी मान के कारण सर्वश्रेष्ठ जैविक ईधन है।
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उन्होंने लकड़ी, पारम्पारिक कोयले तथा जैविक कोयले की एक एक किलो की मात्रा के प्रयोग में जैविक कोयले की श्रेष्ठता सिद्घ की। संगोष्ठी में प्रगति गुप्ता, फैजान खान, वंश अग्रवाल, अभिजीत सक्सेना, आदि शामिल रहे। प्रधानाचार्य नीलम आनन्द ने बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया।
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मौसम और जलवायु को समझें विषय पर आयोजित संगोष्ठी में समूह प्रमुख अपर्णा द्विवेदी ने जैविक कोयले के प्रयोग से होने लाभ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह कोयला गन्ने की छोल, मूंगफली के छिलके तथा जैविक पदार्थों व उत्पादों को उच्च दाब पर दाबित करके तैयार किया जाता है।
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कोयला धुआं रहित होने के कारण प्रदूषण मुक्त होता है। जबकि पारम्परिक कोयले में धुएं तथा अन्य प्रदूषक तत्व पाए जाते हैं। पारम्पारिक कोयले तथा जैविक कोयले की तुलना करते हुए बाल वैज्ञानिक ने बताया कि यह कोयला उच्च कैलोरी मान के कारण सर्वश्रेष्ठ जैविक ईधन है।
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उन्होंने लकड़ी, पारम्पारिक कोयले तथा जैविक कोयले की एक एक किलो की मात्रा के प्रयोग में जैविक कोयले की श्रेष्ठता सिद्घ की। संगोष्ठी में प्रगति गुप्ता, फैजान खान, वंश अग्रवाल, अभिजीत सक्सेना, आदि शामिल रहे। प्रधानाचार्य नीलम आनन्द ने बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया।