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हाइड्रोपोनिक खेती की शुरुआत कर पूर्वी ने बनाई अलग पहचान

Sun, 27 Mar 2022 12:16 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2022 12:16 AM IST
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By introducing hydroponic farming, the eastern made a different identity
ओक लेट्यूस पकड़े पूर्वी - फोटो : ETAWAH
इटावा। घाटे का सौदा बन चुकी खेती-किसानी से जहां युवाओं का मोहभंग हो रहा है, वहीं विदेश से एमबीए की पढ़ाई करने वाली पूर्वी ने हाइड्रोपोनिक खेती (बिना मिट्टी की खेती) शुरू कर नई मिसाल कायम की है। उनका उद्देश्य लोगों को सस्ते फल और सब्जियां उपलब्ध कराना तो है ही, साथ ही महिलाओं को जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
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शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर हाईवे किनारे स्थित फूफई गांव निवासी पूर्वी लॉकडाउन से पहले बाइक बनाने वाली कंपनी हीरो के मार्केटिंग विभाग में नौकरी करतीं थीं। कोरोना के चलते मार्च 2020 में लॉकडाउन लगा तो घर आ गईं और यहीं पर कुछ नया करने की ठानी। पूर्वी बताती हैं कोरोना काल में स्वास्थ्य और पोषण दोनों का महत्व जन-जन ने समझा। उसी समय मैंने हाइड्रोपोनिक खेती करने का मन बनाया।
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इसके लिए अपने गांव में ऑटोमेटेड फार्म बैंक टू रूट्स तैयार किया और बिना मिट्टी वाली खेती करने लगीं। बताया कि फार्म में ओक लेट्यूस, ब्रॉकली, पाक चाय, चेरी टोमेटो, बेल पेपर और बेसिल की खेती कर रहीं हैं।
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यहां पैदा होने वाली सब्जियों की सबसे ज्यादा मांग होटलों में है। यहां की सब्जियां पर्यटक भी खूब पसंद करते हैं। बताया कि मेरा उद्देश्य महिला किसान के रूप में जिले के लोगों को स्वास्थ्यवर्द्धक फल और सब्जियां सस्ते दामों पर घर बैठे उपलब्ध कराना है, जिससे सभी लोग स्वस्थ रहें।
बेहद सेहतमंद हैं हाइड्रोपोनिक खेती की सब्जियां और फल
जनता कृषि महाविद्यालय बकेवर के प्राचार्य डॉ. राजेश त्रिपाठी के मुताबिक हाइड्रोपोनिक तकनीकी से उत्पादित सब्जियां बहुत ही सेहतमंद होती हैं। बताया कि समय-समय पर हाइड्रोपोनिक फार्मिंग के लिए जनता महाविद्यालय के उद्यान विभाग से पूर्वी को सहयोग भी दिया जाता है।
जिला अस्पताल की आहार विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह के मुताबिक हाइड्रोपोनिक खेती से उत्पादित सब्जियां विटामिन, खनिज तत्व से परिपूर्ण होती हैं। इनका उपयोग सलाद, जूस, सैंडविच, बर्गर समेत विभिन्न व्यंजनों में किया जा सकता है। ये पौधे पूर्णतया ऑर्गेनिक होते हैं। ये उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ओबेसिटी और हृदय रोगियों के लिए बेहद लाभदायक होते हैं।
ये है हाइड्रोपोनिक खेती
आसान भाषा में कहें तो हाइड्रोपोनिक्स खेती का मतलब बिना मिट्टी वाली खेती है। इसमें पौधों को सभी जरूरी पोषण पानी के माध्यम से दिया जाता है। इसके लिए सिर्फ पानी, पोषक तत्व और प्रकाश की जरूरत होती है।

उद्यान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके पांडे ने बताया यह खेती पूरी तरह जल पर निर्भर होती है। इसमें मिट्टी का प्रयोग नहीं होता। इस कारण इसमें किसी भी कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता। ये पौधे पूर्णतया ऑर्गेनिक होते हैं। यह भी बताया कि इसमें पानी की बर्बादी कम होती है। इसमें खेतों की अपेक्षा सिर्फ दस फीसदी ही पानी लगता है।
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